यहां एक-दूसरे पर लोग फेंक रहे पत्थर, पुलिस बनी मूकदर्शक, अब तक 32 घायल

छिंदवाड़ा

एक तरफ कांग्रेस ने भारत बंद का आह्नान किया हुआ है, वही दूसरी तरफ पांढुर्णा का प्रसिद्ध गोटमार मेला आज से शुरु हो गया है। मेले में लगातार पत्थर बरसाए जा रहे है, अब तक 32 लोग घायल हो चुके है, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल भर्ती करवाया गया है।वही पत्थरबाज़ी और लोगों के घायल होने का सिलसिला लगातार जारी है।प्रशासन की रोक के बावजूद ग्रामीणों ने इस पारंपरिक मेले का आयोजन किया है। मेला स्थल पर पुलिस और प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद हैं और पूरी व्यवस्था के लिए करीब 1000 पुलिस पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।देश का यह पहला मेला है जिसमें पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में लोग एक दूसरे पर पत्थर बरसाते हैं।

दरअसल, भाद्र के शुक्ल पक्ष की प्रथम तिथि यानि पोला पर्व के दूसरे दिन छिंदवाड़ा ज़िले के पांढुर्णा में गोटमार मेला लगता है।  ये त्योहार महाराष्ट्रीयन परिवारों में मनाया जाता है। चूंकि पांढुर्णा गांव महाराष्ट्र से लगा हुआ है लिहाजा यहां की परंपराओं में मप्र और महाराष्ट्र का खासा प्रभाव रहता है। इस मेले में दोनों गांव के लोग एक दूसरे पर गोफन से पत्थरों की बरसात करते हैं। मराठी में पत्थर को गोटा कहा जाता है, इसलिए इसका नाम गोटमार मेला रखा गया है। मान्यता है कि अंग्रेजी शासनकाल में कभी पांढुर्णा और सावरगांव के युवक और युवती के बीच प्रेम प्रसंग चला था, इससे दोनों के गांव वाले नाराज़ हो गए और दुश्मनी के चलते एक-दूसरे को पत्थर मारने शुरू कर दिए थे। इस पत्थरबाज़ी में दोनों प्रेमी युवक-युवती की मौत हो गई। बस तब से ये सिलसिला आजतक जारी है।

इसके लिए सुबह होते ही पांढुर्णा और सांवरगांव के बीच स्थित जाम नदी के मध्य में पलास का झंडा गाड़ा जाता है। इस झंडे की पूजा के बाद दोनों गांव के लोग एक दूसरे बर पत्थर बरसाते हैं। जब तक इस झंडे को पांढुर्णा के लोग नहीं तोड़ते तब तक दोनों ओर से पत्थर बरसाने का क्रम जारी रहता है। हालांकि जो गांव इसे पहले तोड़ता है वो विजयी माना जाता है। नदी के बीच से झंडा उखाड़ने के बाद इसे गांव के ही चंडी माता को अर्पित किया जाता है।वही ऐसा भी माना जाता है कि जो लोग इस मेले में घायल होते है उसे मां चंडी का प्रसाद मिलता है। हर साल इस दिन दोनों गांवों के लोग एक दूसरे पर पत्थर बरसाते है।हैरानी की बात ये है कि सालों से चली आ रही इस परंपरा में अब तक 13 लोगों की जान जा चुकी है, वहीं कई लोगों की आंखें फूट गई हैं। लेकिन ये परंपरा जारी है। इस बार भी प्रशासन ने मेला परिसर में घायलों के लिए चार अस्थाई अस्पताल बनाएं हैं। 

"To get the latest news update download tha app"