कलेक्टर ने गांव में रात गुजारी, तब जानी विस्थापितों के मन की बात

धार| एक आईएएस अफसर सरकार और जनता के बीच की वो कड़ी है जो हर शासकीय योजना का लाभ आम जनता तक पहुँचाने में मुख्य भूमिका निभाता है| अक्सर अफसरों के बारे में पढ़ा जाता है कि वो दफ्तर में ही बैठकर अपना फर्ज निभा लेते हैं और जमीनी हकीकत क्या है इसका उन्हें पता ही नहीं होता| लेकिन सही मायने वो अधिकारी ही जनता की तकलीफ समझ सकता है जो उनके बीच रहकर काम करे| ऐसे ही एक अधिकारी है आईएएस दीपक सिंह, जो बुरहानपुर के कलेक्टर रहते हुए वहां की जनता के पसंदीदा अधिकारी बन गए थे और बेहतर कार्यशेली के लिए उनके नाम की हर जगह चर्चा रही| अब दीपक सिंह धार के कलेक्टर हैं और पदभार संभालते ही उन्होंने यहां लोगों की समस्याओं के निराकरण के लिए उनके बीच पहुँच कर समस्या समझना शुरू कर दिया है| 

धार जिले में सरदार सरोवर बांध के बैक वाटर से डूबने वाले गांव पर खतरा मंडराते देख कलेक्टर दीपक सिंह ने आते ही गांव का दौरा किया और रात रूककर लोगों की समस्या सुनी| इस दौरान डूब प्रभावित गाँव कटनेरा में एक पेड़ के नीचे खटिया बिछाकर कलेक्टर ने रात गुजारी, तब उन्हें पता चला कि यह लोग स्वयं यहां से हटने को तैयार हैं| दरअसल, सरदार सरोवर परियोजना से जिले के बसाहट वाले 52 गाँव प्रभावित हैं| कुछ गाँव कराये जा चुके हैं, लेकिन ज्यादा बारिश न होने के चलते कुछ गाँव में लोग दुबारा यहां जम गए हैं|  

कलेक्टर ने डूब प्रभावित वाले गाँव का दौरा किया और लोगों के बीच समस्या समझने के लिए रात भी गुजारी, बल्कि प्रभावितों के साथ भोजन भी किया| तब उन्हें लोगों के मन की बात पता चली| अब तक लग रहा था डूब प्रभावितों से गांव खाली कराना मुश्किल हैं, लेकिन जब कलेक्टर ने उनके बीच जाकर चर्चा की तो पता चला वो स्वयं यहां से हटने को तैयार हैं, सिर्फ उन्हें सुविधा चाहिए| कलेक्टर दीपक सिंह का कहना है कि उन्होंने लोगों से चर्चा की है उन्हें केवल सुविधा चाहिए| हम अपने स्तर पर पूरा प्रयास करेंगे कि उन्हें उचित सुविधाएं मिले| वे स्वयं गांव से हटने को तैयार है|