आईपीएस का FB पोस्ट, कैंडल मार्च और विरोध प्रदर्शन से नहीं रुकेंगे बलात्कार

भोपाल

इन दिनों देशभऱ में महिला अपराधों को लेकर लोगों में आक्रोश व्याप्त है। बीते दिनों हुई दो घटनाओं (कठुआ और उन्नाव दुष्कर्म मामला) ने देश को झकझोर कर रख दिया। घटना के बाद से ही देश का एक एक नागरिक इसकी निंदा कर रहा है और न्याय के लिए सड़कों पर उतरा हुआ है। आम आदमी से लेकर अभिनेताओं तक ने सोशल मीडिया पर इसके लिए कैम्पेन चलाया हुआ है।जगह जगह कैंडिल मार्च, विरोध प्रदर्शन किए जा रहे है।वही देश-प्रदेश में महिला सुरक्षा को लेकर सवाल भी खडे होने लगे है। इसी कड़ी में खरगोन डीआईजी ने भी देश मे बढ़ते महिला अपराधों को लेकर सवाल खड़े किए है। उन्होंने लिखा है कि बलात्कार खतम करना है तो समाज बलात्कारी को बचाने की कोशिश करने वालों की शिनाख्त कर उनके विरोध में खडा होना सीखे ,ऐसे लोगों को सजा दिलाने का साहस पैदा करे । यह एक भोगा हुआ सच है ।

बता दे कि बीते दिनों ही डीजीपी ने फरमान जारी कर अधिकारी-कर्मचारियों को सोशल मीडिया और मीडिया से दूरी बनाए रखने के निर्देश जारी किए थे। लेकिन इसके बावजूद खरगोन डीआईजी सोशल मीडिया पर अपनी सलाह देने से नही चूके और महिला अपराधों को लेकर एक पोस्ट कर दी।

खरगोन डीआईजी एके पांडे ने अपने फेसबुक अकाउंट पर महिला अपराधों को लेकर अपनी अभिव्यक्ति व्यक्त की है। डीआईजी पांडे ने अपनी फेसबुक वॉल पर लिखा है  "बलात्कार विरोध-प्रदर्शन व कैंडिल-मार्च से नही , बलात्कारियों को सजा दिलाने से खत्म होगें किंतु जब सजा की बात आती है लोग कहते हैं लडकों से 'गलती' हो जाती है क्या फासी दोगे ? कितने बलात्कारियों , बलात्कारियों के साथ खडे उनके परिवार ,उनके रिश्तेदार , उसकी सहायता करने व्यक्तियों का समाज ने बहिष्कार किया ? जाहिर है किसी का नही"

उन्होंने आगे लिखा है कि "आज बलात्कार का विरोध हुकूमते वक्त का विरोध बन गया है जो बलात्कारी एवं उसके सहायकों का विरोध नही है । यदि बलात्कार का विरोध करना है तो सब मिलकर बलात्कारी को सजा से बचाने के लिए "साम दाम दण्ड भेद " की नीति अपनाने वालों का विरोध करें और उनको असफल करें जिसमें समाज कभी नही खडा होता है और बलात्कारी को सजा दिलाने की कोशिश करने वाले तरह तरह के आरोप लगाकर प्रताडित किये जाते हैं किंतु समाज कभी उनके पक्ष में नही खडा होता है । बलात्कार खतम करना है तो समाज बलात्कारी को बचाने की कोशिश करने वालों की शिनाख्त कर उनके विरोध में खडा होना सीखे ,ऐसे लोगों को सजा दिलाने का साहस पैदा करे ।यह एक भोगा हुआ सच है"


गौरतलब है कि बीते दिनों डीजीपी ऋषि कुमार शुक्ला  ने एक परिपत्र जारी कर मीडिया और सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखने का फरमान जारी किया था। उन्होंने जारी परिपत्र में कहा था कि अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा सोशल मीडिया पर शासकीय दस्तावेज को स्कैन कर, स्क्रीन शॉट लेकर या अन्य किसी प्रकार से ऐसी कोई जानकारी शेयर न की जाए जो कि शासकीय नियमों के अंतर्गत गोपनीय हो। किसी भी विषय , फोटो अन्य सामग्री जो कि दुर्भावनापूर्ण , अश्लील, जाति-धर्म, लिंग, किसी के पक्षपात को प्रदर्शित करती हो इस तरह की पोस्ट पर अफसर और कर्मचारी प्रतिक्रिया न दें, न ही समर्थन करेंगे। पुलिस अफसर और कर्मचारी फर्जी नाम से फेसबुक, व्हाट्सएप और अन्य किसी सोशल साइट पर अपना प्रोफाइल पेज न बनाएं।अगर ऐसा किया जाता है कि उन पर कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में डीआईजी ने फेसबुक पर दो ज्वलंत मुद्दों के बारे मे अपने विचार सार्वजानिक किये हैं। हालांकि सोशल मीडिया अपने विचारों को सांझा करने का एक बढ़िया माध्यम है, लेकिन डीजीपी इस सम्बन्ध में निर्देश दे चुके हैं। ऐसी स्थिति में देखना होगा आगे क्या होता है। फिलहाल डीजीपी के पोस्ट को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा है, वहीं कई लोग उनके इस विचार के समर्थन में भी हैं।