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आखिर क्यों हटाई गईं सलीना सिह

भोपाल| मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी पद से सीनियर आईएएस सलीना सिंह की विदाई यकायक नहीं हुई। पिछले डेढ़ वर्ष से कई ऐसे कारण थे जो सलीना सिंह के लिए लगातार परेशानी का कारण बन रहे थे । 31 मार्च 2017 को भिंड जिले के अटेर में उप चुनाव के दौरान vvpat मशीनों से उपजा विवाद इसकी शुरुआत कहा जा सकता है। उत्तर प्रदेश से आई ईवीएम मशीनों को बिना क्लीनिंग के मीडिया के सामने प्रदर्शित करना और उसमें लगातार कमल के चिन्ह वाले मतों का निकलना इसमें चुनाव आयोग की जमकर फजीहत कराई थी ।कोलारस और  मुंगावली उपचुनाव के दौरान भी फर्जी मतदाता सूची का मामला सुर्खियों में आया और इसके चलते दोनों जिलों के कलेक्टरों की विदाई हुई। इन उप चुनावों के दौरान भाजपा के दो विधायक शैलेंद्र जैन और नरेश सिंह कुशवाहा के खिलाफ मामला दर्ज करना भी सलीना सिंह के लिए भाजपासे नाराजगी का कारण बन गया।

इन्हीं उपचुनावों में  सलीना ने प्रदेश सरकार की दो मंत्रियों यशोधरा राजे सिंधिया और माया सिंह को नोटिस भी जारी कर दिए थे। कोलारस  और मुंगावली उपचुनाव के दौरान बीजेपी के कई वरिष्ठ नेताओं से सलीना सिंह की मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय में जमकर बहस भी हुई थी। मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव की सेवा वृद्धि के मामले को भी सीधे मंत्रालय भेज देना मध्य प्रदेश की सरकार का सलीना सिह से नाराजगी का कारण बन गया । इंदौर के कलेक्टर निशांत वरवड़े को ईवीएम मशीन मामले में दिए गए बयान के चलते सलीना का नोटिस भी आईएएस अधिकारियों में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के प्रति नाराजगी का कारण बना । सलीना सिंह के बारे में भाजपा के नेताओं की दबे स्वरो मे प्रतिक्रिया थी कि वह प्रो कांग्रेसी है। इन सभी शिकायतों के मद्देनजर चुनाव आयोग सलीना सिंह को ज्यादा लंबे समय मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के पद पर रखने का इच्छुक नहीं था। आखिरकार सलीना सिंह की विदाई हो ही गई

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