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भारत बंद: 16 जिलों में अवकाश लेकर पहुंचे थे हजारों अधिकारी-कर्मचारी, हो सकते हैं बर्खास्त

भोपाल। सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी-एसीटी एक्ट में किए गए संशोधन के विरोध में 2 अप्रैल को दलित संगठनों के भारत बंद आंदोलन में मप्र सरकार के हजारों अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए थे। उपद्रव के बाद खुफिया विभाग ने सरकार को जो रिपोर्ट भेजी है, उसमें 16 जिलों में अधिकारी एवं कर्मचारियों ने बाकायदा अवकाश लेकर आंदोलन में शिकरत की थी। राजधानी भोपाल के सतपुड़ा, विंध्याचल एवं अरेरा हिल्स पर स्थित अन्य सरकारी कार्यालय के कई अधिकारी कर्मचारी आंदोलन में शामिल पुलिस के कैमरों में कैद हैं। जिनमें से कई चेहरों की पहचान कर ली है। खुफिया एजेंसी ने सरकार से पूछा है कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाना है। 

खुफिया विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक दलित संगठनों के भारत बंद के दौरान 2 अप्रैल को बालाघाट, ग्वालियर, शिवपुरी, दतिया, मुरैना, भिंड, सतना, श्योपुर, भोपाल, गुना, सागर, रायसेन, आगर-मालवा, खंडवा, बुरहानपुर, नीमच, रतलाम आदि जिलों में कानून-व्यवस्था गड़बड़ाने एवं ग्वालियर-चंबल में भारी उपद्रव हुआ था। इनमें से मुरैना, भिंड, ग्वालियर, बालाघाट, आगर-मालवा में कुछ सरकारी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। जो सभी वर्ग से ताल्लुक रखने वाले हैं। उपद्रव के बाद खुफिया विभाग ने सभी जिलों में सीसीटीवी फुटेज एवं सरकारी कार्यालयों से आने-जाने वाले मार्गों के फुटेज खंगाले तो कई चेहरों को पहचान की गई है, जो बंद में शामिल हुए थे। इसी तरह आंदोलन में फंडिंग करने वाले राजनीतिक, नौकरशाह एवं समाजसेवियों को भी चिह्नित किया है, लेकिन किसी पर कार्रवाई नहीं की। 


2 अप्रैल को अवकाश के ज्यादा आवेदन

खुफिया विभाग को सभी सरकारी विभागों से जो इनपुट मिला है, उसके अनुसार 2 अप्रैल को अपेक्षाकृत ज्यादा अधिकारी-कर्मचारियों ने छुट्टी ली थी। खास बात यह है कि इस दिन न तो कोई पर्व था और न ही कोई विशेष दिन। हालांकि कई कार्यालयों ने इसकी जानकारी नहीं दी है। 


कार्रवाई को लेकर असंमजस

जिन अधिकारी-कर्मचारियों का उपद्रव में सीधा हस्तक्षेप रहा है, उन पर कार्रवाई हो गई है। लेकिन जो अवकाश लेकर आंदोलन शामिल हुए और जो आॅन ड्यूटी आंदोलन पहुंचे। उन पर क्या कार्रवाई की जाना है। इसको लेकर पुलिस ने सरकार ने निर्देश मांगे हैं। क्योंकि सरकारी कर्मचारी छुट्टी लेकर आंदोलन में शामिल होता है या कार्यालय छोड़कर भाग लेता है तो सिविल सेवा आचरण नियम के उल्लंघन की श्रेणी में आता है।


बर्खास्तगी की हो सकती है कार्रवाई

सिविल सेवा आचरण नियम के अनुसार यदि कोई शासकीय कर्मचारी किसी आंदोलन में हिस्सा लेता है और शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाता है, सेवा नियम उल्लंघन का दोषी पाते हुए उसके खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई हो सकती है। क्योंकि सरकारी कर्मचारी न तो किसी आंदोलन में हिस्सा ले सकता है और न ही उसका समर्थन कर सकता है। राजधानी के अरेरा हिल्स स्थित कुछ कार्यालयों में 2 अप्रैल को अवकाश लेने वाले अधिकारी-कर्मचारियों ने छुट्टी के आवेदनों को वापस ले लिया है। रिकॉर्ड को मिटाया जा रहा है।

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