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MP अजब है! यहां जाति से जाने जाते हैं नव आरक्षक

भोपाल। मध्यप्रदेश आजकल देशभर में जाति संग्राम को लेकर चर्चा में है। एससी एसटी एक्ट को लेकर आरक्षित वर्ग का आंदोलन हो या फिर एक्ट के विरोध और जातिगत आरक्षण के खिलाफ सवर्णों का आक्रोश, के बाद प्रदेश में उपजे हालात चिंतनीय होते जा रहे हैं। इस बीच एक बार जाति को लेकर एक नया मामला सामने आया है। इस बार पुलिस महकमें में नव आरक्षकों की जाति पर बड़ा विवाद खड़ा होता नजर आ रहा है। दरअसल, प्रदेश के रीवा में ट्रेनिंग देने वाले पुलिस प्रशिक्षण स्कूल में नव आरक्षकों को उनकी जाति से चिन्हित किया जा रहा है। जबकि इस मामले में पुलिस मुख्यालय से निर्देश है कि नव आरक्षकों के सीने पर उनकी जाति का उल्लेख करने के बजाए सिर्फ नाम और बैच नंबर ही लिखा जाए। 

इस ट्रेनिंग स्कूल में नव आरक्षक  त्रिपाठी, पांडे, जाट जैसी जाति से पहचाने जा रहे हैं। इस पूरे प्रकरण में अब पुलिस विभाग की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जब पीएचक्यू से निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं तो उनकी उपेक्षा क्यों की जा रही है। ऐसे में आरक्षित वर्ग के नव आरक्षक खुद को अपमानित महसूस कर रहे हैं। 

पीटीएस परिसर के अंदर नव आरक्षकों को रोजमर्रा के प्रशिक्षण के दौरान सफेद टी-शर्ट पर उपजाति की का नाम लिखा रहता है। जिसे देखने वाले हैरान रह जाते हैं।  पुलिस अधिकारियों का रवैया पुलिस मुख्यालय के लिए दुखदाई बन सकता है। इस पूरे मामले में नव आरक्षक कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। हालांकि, नाम गुप्त रखने की शर्त पर एक नव आरक्षक ने कहा कि ये बेहद शर्मनाक बात है, हमें हमारी जाति से चिन्हित किया जा रहा है। जबकि ट्रेनिंग के बाद सभी जवान एक ही रंग की खाकी वर्दी में होते हैं। अगर ये किसी मंशा के तहत किया जा रहा है तो भविष्य में भी भेदभाव की पूरी संभावना हो सकती है। 

गौरतलब है कि इससे पहले धार जिला अस्पताल में आरक्षकों की भर्ती के लिए मेडिकल परीक्षण की प्रकिया चल रही थी। आरक्षित वर्ग के चयनित उम्मीदवारों के सीने पर ही उनका वर्ग यानी एससी-एसटी दर्ज कर दिया गया था, इस दौरान अभ्यर्थियों के सीने पर उनकी जाति लिख दी गई थी।

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