जनाक्रोश के आगे झुका प्रशासन, कलेक्टर का यू-टर्न, पुराने समय पर ही खुलेगा रामराजा मंदिर

टीकमगढ़| विश्व प्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटन नगरी ओरछा के श्रीरामराजा मंदिर की सालों पुरानी परंपरा को तोड़ने के विरोध में पनपे जनाक्रोश के सामने आखिरकार जिला प्रशासन को झुकना पड़ा, कलेक्टर टीकमगढ़ अभिजीत अग्रवाल ने मंदिर का समय बढ़ाये जाने के फैसले को स्थगित कर दिया है| इससे पहले मंदिर खुलने का समय बढ़ाने के विरोध में क्षेत्र के लोगों का आक्रोश फुट पड़ा, सोशल मीडिया से शुरू हुआ विरोध गुरूवार को सड़कों पर देखने को मिला और लोगों ने कलेक्टर के फैसले के खिलाफ तीखा विरोध जताया, लोगों के आक्रोश को शांत कराने एसडीएम, टीआई मौके पर पहुंचे लेकिन समझाइश काम ना आई, इसके बाद कुछ बुद्धिजीवी एवं समाजसेवकों ने कलेक्टर से चर्चा कर समझाइश दी, इसके बाद कलेक्टर ने समय बढ़ाने के फैसले को स्थगित करने का फैसला किया| वहीं लगातार रामराजा दरबार की वर्षों पुरानी परंपरा से खिलवाड़ करने पर लोगों में अब भी आक्रोश है और कलेक्टर की हठधर्मिता के खिलाफ लोग आगे भी बड़े आंदोलन की चेतावनी दे रहे| प्रदर्शन कर रहे सैकड़ो युवाओं ने मुख्यमंत्री के नाम एक पत्र भी भेजा है, जिसमे उन्होंने कहा है अगर कलेक्टर महोदय अपनी हठधर्मिता पर कायम रहे तो लोग पूरे बुन्देलखण्ड में आंदोलन करेंगे। 

मुख्यमंत्री के नाम भेजे गए ज्ञापन में कहा गया है प्रदेश में राम भक्तों की सरकार है और आप और आप के बड़े नेता अयोध्या मुद्दे पर यह बयान दे चुके हैं की आस्था के मसले पर किसी प्रमाण या व्यवस्था को स्वीकार नहीं किया जा सकता । बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था यह है कि श्री राम का जन्म उसी विवादित स्थल पर हुआ था जहां हिंदू दावा कर रहे हैं यह मामला आस्था और धर्म का है। फिर यही करोड़ों लोगों की आस्था और धर्म का मामला जब बुंदेलखंड की अयोध्या कहे जाने वाले ओरछा में आता है तो आप की चुप्पी राम भक्तों को व्यथित कर देती है ओरछा रामराजा सरकार की एक कहानी में आपको बताता हूं ऐसी लोक मान्यता है की त्रेता युग की के कई ने कलयुग में महारानी को कुँवरि गणेश के रूप में अवतार लिया और उन्होंने त्रेता मैं राम को वन भेजने के संताप का प्रायश्चित कर भगवान श्रीराम को अयोध्या से ओरछा लाकर त्रेता युग की जिस राजगद्दी से विलग किया था उसी राजगद्दी को ओरछा में राजतिलक करके दी थी जिस समय महारानी श्री राम राजा को अयोध्या से ओरछा ला रही थी तो अयोध्यावासी साधु संत इस बात पर अड़ गए थे कि राम बिना उनकी अयोध्या एक बार फिर सूनी हो जाएगी तब महारानी ने उन्हें वचन दिया था की भगवान राम राजा दिवस में ओरछा रहेंगे और रात्रि में अयोध्या वास करेंगे |

आंदोलन की चेतावनी 

सीएम को भेजे गए पत्र में कहा है पूजा के समय भी 15 मिनट का अंतर रखा गया था जिससे भगवान दोनों जगह आरती के समय मौजूद रह सके इसी को लेकर अयोध्या और ओरछा में आरती का समय तय हुआ और आज भी मंदिर उसी हिसाब से खुलता और बंद होता है पर जिलाधिकारी टीकमगढ़ करोड़ों लोगों की आस्थाओं की अनदेखी करके मंदिर के टाइम टेबल के साथ छेड़छाड़ करने पर आमादा है | आप करोड़ों भक्तों की आस्थाओं का ध्यान रखकर इस पर तत्काल रोक लगाएं |  पत्र में कहा गया है निवेदन है कि भक्तों की आस्थाओं का ध्यान रखकर रामराजा मंदिर की प्राचीन परंपराएं टूटने से बचाएं।।अगर कलेक्टर महोदय अपनी हठधर्मिता पर कायम रहे तो बुन्देलखण्ड के लोग पूरे बुन्देलखण्ड में आंदोलन करेंगे।

सोशल मीडिया से सड़क तक विरोध, कलेक्टर के खिलाफ आक्रोश 

श्री राम राजा भगवान ओरछा धाम के दर्शन समय के बदलाव की जानकारी लगते ही लोगों में जिला प्रशासन और सरकार के खिलाफ आक्रोश पनप गया, लोगों का आरोप है कि श्री राम राजा सरकार की परंपरा के साथ खिलवाड़ हो रहा है। आरोप यह भी है कि जिला प्रशासन अपनी हिटलरशाही-तानाशाह रवैया दिखाकर मंदिर की परंपराओं को तोड़ने का काम कर रहा है। निवाड़ी जिले में कलेक्टर अभिजीत अग्रवाल ने एक बैठक का आयोजन किया जिसमें यह निर्णय लिया गया है कि मंदिर के दर्शन समय बदलाव किया जाएगा। जैसे ही यह जानकारी आम नागरिकों को लगी तो लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया और सोशल मीडिया पर जमकर आलोचना होने लगी, गुरूवार को इस फैसले के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आये, जिसके बाद आखिरकार कलेक्टर को अपने फैसले को स्थगित करना पड़ा| 

इसलिए हुआ विरोध 

ओरछा को 'बुंदेलखंड की अयोध्या' कहा जाता है| भगवान श्रीराम का ओरछा में 400 वर्ष पहले राज्याभिषेक हुआ था और उसके बाद से आज तक यहां भगवान राम को राजा के रुप में पूजा जाता है| यहां रामराजा का मंदिर है, मान्यता है कि यहां राम भगवान के तौर पर नहीं, राजा के रूप में विराजे हैं| मंदिर की स्थापना के बाद संभवत: पहली बार कपाट खुलने के समय में बदलाव करने का फैसला हुआ था,  मंदिर के पट 2 घंटे पहले खोले जाने की तैयारी थी| कार्तिक से फागुन तक शाम 7 बजे के स्थान पर 5 बजे और फागुन से क्वांर तक 8 बजे के स्थान पर 6 बजे मंदिर का समय किया जा रहा था,  जिसे लेकर सोशल मीडिया पर विरोध हुआ और फिर सड़कों पर लोग उतर आये |