पूर्व मंडी अध्यक्ष ने राष्ट्रपति से मांगी इच्छा मृत्यु

ग्वालियर। एक्टिव मांझी आदिवासी समाज विकास परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष और ग्वालियर मंडी के पूर्व अध्यक्ष हरपाल मांझी ने राज्य सरकार पर मांझी समाज की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि उनके साथ सैंकड़ों लोग मृत्यु का वरण करेंगे।

ग्वालियर में पत्रकारों से बात करते हुए हरपाल मांझी ने बताया कि 1 जनवरी 2018 को मध्य प्रदेश के सामान्य प्रशासन विभाग ने एक अधिसूचना जारी कर साफ़ कर दिया है कि उसे हमारी कोई चिंता नहीं है। सरकार हमसे हमारी जाति का प्रमाण पत्र मांगती है  जबकि हमारी जाति रामराज्य से प्रमाणित है। 

हरपाल मांझी ने कहा है कि यदि 9 अगस्त तक राष्ट्रपति के यहाँ भेजे पत्र का जवाब नहीं आता तो वे समाज के सैंकड़ों लोगों के साथ मृत्यु का वरण करेंगे। हालाँकि वे ये नहीं बता पाए कि ये आत्मघाती आन्दोलन कब और कहाँ होगा।

1 जनवरी 2018 की अधिसूचना में ये है

राज्य शासन ने फैसला लिया है कि ढीमर, भोई, कहार, केवट, मल्लाह, निषाद आदि जाति के द्वारा मांझी अनुसूचित जन जाति के परमं पत्र के आधार पर 11 नवम्बर 2005 के पूर्व शासकीय सेवाओं में नियोजन/ शैक्षणिक संस्थाओं में प्रवेश प्राप्त किया है उन्हें संरक्षण दिया जायेगा । उसके बाद से उन्हें अनुसूचित जन जाति के अंतर्गत नहीं मानते हुए आरक्षण का लाभ नही दिया जाएगा।

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