ग्वालियर: जातिगत समीकरण साधने में जुटी कांग्रेस, ब्राह्मण-कुशवाह समाज को टिकट की उम्मीद

 ग्वालियर।  मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा के बाद राजनैतिक दल चुनावी तैयारियों में जुट गए हैं।  विधानसभा टिकट के दावेदार अपनी अपनी ताकत का अहसास वरिष्ठ नेतृत्व के सामने करा रहे हैं। ग्वालियर कांग्रेस में भी टिकट चाहने वालों की लम्बी सूची है।  पार्टी नेताओं के सामने ये संकट है कि किसे टिकट नहीं दे और किसे नहीं।  जानकार बताते हैं कि इस बार पार्टी सोशल इंजीनियरिंग को ध्यान रखते हुए सही जातिगत समीकरण बैठाने की कोशिश में जुटी हुई है।   

ग्वालियर जिले में विधानसभा की छह सीटें हैं जिनमें से पिछले चुनाव में चार सीटें भाजपा ने और दो सीट कांग्रेस ने  जीती थीं।  ग्वालियर, ग्वालियर पूर्व, ग्वालियर दक्षिण और ग्वालियर ग्रामीण पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी जबकि डबरा और भितरवार से कांग्रेस जीती थी। लेकिन कांग्रेस इस बार पूरे प्रयास में है कि वो ग्वालियर की अधिक से अधिक सीटों पर कब्जा जमाये। सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को चुनावों की कमान मिलने के बाद कांग्रेस नेताओं में उत्साह भी कई गुना बढ़ गया है। 


दावेदारों की लम्बी सूची

टिकट के लिए दावेदारों की बात करें तो ये सूची लम्बी है। पूर्व विधायक, वरिष्ठ नेता, महिला नेत्रियों के युवा नेता भी बड़ी संख्या में टिकट की दावेदारी जता रहे हैं। सांसद सिंधिया द्वारा 30 प्रतिशत युवाओं को टिकट दिए जाने की घोषणा के बाद से युवाओं के होसले बुलंद हैं। विधानसभावार यदि टिकट के दावेदारों पर नजर डाली जाये तो ग्वालियर विधानसभा में दो प्रमुख दावेदार हैं एक पूर्व विधायक प्रद्युमन सिंह तोमर और दूसरे प्रदेश सचिव सुनील शर्मा।  दोनों ही नेता एक दूसरे के मुकाबले अपने दावे को मजबूत साबित करने के लिए कई जतन कर रहे हैं। पिछला  विधानसभा चुनाव जयभान सिंह पवैया से हारने के बाद भी हालाँकि प्रद्युमन सिंह तोमर का जनता से सीधा संवाद और उनकी बुनियादी जरूरतों के लिए सड़क पर संघर्ष करना नहीं थमा, इस दौरान वे कई बार गिरफ्तार हुए जेल भी गए लेकिन संघर्ष जारी रखा। आज भी ग्वालियर विधानसभा में कही कोई परेशानी हो प्रद्युमन सिंह तोमर वहां तत्काल पहुँच जाते हैं।  पार्टी के प्रदेश सचिव सुनील शर्मा भी पिछले लम्बे समय से ग्वालियर विधानसभा में सक्रिय हैं।  वे भी अपनी दावेदारी जताने के लिए धरना, प्रदर्शन करते रहते हैं। कुछ दिन पहले ही मनोरंजनालय पर कार्यक्रम कर भीड़ जुटाकर सुनील शर्मा ने अपनी ताकत का प्रमाण दिया है।  हालाँकि तुलनात्मक रूप से और क्षेत्र में लोकप्रियता को आधार बनाकर टिकट दिया जाए तो ग्वालियर विधानसभा से पूर्व विधायक प्रद्युमन सिंह का दावा मजबूत कहा जा सकता है। पार्टी सूत्र बताते हैं कि ठाकुर वोटों के साथ साथ अन्य सभी समाजों विशेषकर गरीब बस्तियों में रहने वाले लोगों का जो साथ प्रद्युमन सिंह तोमर ने दिया है उसका लाभ भी  कांग्रेस को मिलेगा ।  

ग्वालियर पूर्व विधानसभा में दावेदारों की संख्या अधिक है।  यहाँ प्रमुख दावेदार के रूप में पिछले दो चुनाव हार चुके मुन्नालाल गोयल का नाम सामने आ रहा है।  उसकी वजह ये है कि दोनों ही चुनावों में वो कुछ हजार वोट के अंतर से हारे लेकिन अंदरूनी खबरें ये निकलकर आईं कि उन्हें हराया गया तो इस बार भी पार्टी की सहानुभूति उनके साथ रहेगी ऐसा माना जा रहा है।  इसके अलावा युवा कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष बनाये गए मितेंद्र दर्शन सिंह भी अपनी दावेदारी जता रहे हैं हालाँकि कांग्रेस के सूत्रों का कहना है कि पिता पूर्व जिला अध्यक्ष  डॉ.  दर्शन सिंह के असामयिक निधन के बाद एक साल के अंदर ही उन्हें युवा कांग्रेस के कार्यकारी जिलाअध्यक्ष की जिम्मेदारी दिए जाने के बाद उनका दावा कमजोर माना जा रहा  है। इसके अलावा कांग्रेस प्रवक्ता  दिनेश शर्मा, युवा कांग्रेस के दूसरे कार्यकारी जिला अध्यक्ष हेवरन सिंह, युवा कांग्रेस के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष वीरेंद्र यादव लल्ला सहित कई युवा नेता लाइन में हैं लेकिन मुन्नालाल गोयल के मुकाबले इन सभी की दावेदारी कमजोर मानी जा रही है। हालाँकि ग्वालियर पूर्व में हमेशा से ही चेंबर ऑफ कॉमर्स समर्थित व्यक्ति उम्मीदवार होता है लेकिन पिछले चुनाव में चेंबर ने  मुन्नालाल गोयल का विरोध नहीं किया था और पार्टी इस बार भी ऐसा ही मानकर चल रही है।  हालाँकि पूर्व विधायक रमेश अग्रवाल सहित अन्य कई नेताओं ने भी  अपनी दावेदारी पार्टी नेतृत्व के सामने प्रस्तुत की है।  

ग्वालियर ग्रामीण विधानसभा में इस बार टिकट वितरण को लेकर कांग्रेस बहुत सावधानी बरत रही है। पिछली बार गुर्जर समाज को टिकट देकर सीट गंवाने वाली कांग्रेस हो सकता है कि इस बार गुर्जर नेता पर दांव नहीं खेले।  उधर जानकर मानते हैं कि जब गुर्जर समाज के सर्वमान्य नेता रामसेवक सिंह ग्रामीण से सीट नहीं निकाल पाए तो वर्तमान दावेदारों में शामिल पूर्व विधायक रामवरन सिंह , कल्याण सिंह , केदार कंसाना, साहब सिंह आदि के लिए सीट निकालना बहुत मुश्किल होगा। बताया ये भी जाता है कि इन सभी गुर्जर नेताओं की आपस में भी पटरी नहीं बैठती यानि यदि रामसेवक सिंह को छोड़कर  किसी दूसरे गुर्जर नेता को टिकट दिया गया तो भितरघात की संभावना बढ़ जाएगी।  इन सबसे अलग ग्वालियर ग्रामीण में एक नया समीकरण बना है वो ये कि बहुजन समाज पार्टी से कांग्रेस में हाल ही में शामिल हुए मदन कुशवाह को टिकट दे दिया जाये।  मदन कुशवाह को पार्टी ज्वाइन कराते ही प्रदेश महामंत्री बना दिया गया।  बताया जा रहा है कि मदन कुशवाह को कांग्रेस ज्वाइन कराने में दिग्विजय सिंह और अशोक सिंह की बड़ी भूमिका है।  ग्वालियर ग्रामीण में कुशवाह वोट अधिक है और यदि कांग्रेस मदन कुशवाह को टिकट देती है  तो एक तो कुशवाह समाज की उपेक्षा का कलंक उसके माथे से हट जाएगा दूसरा ग्वालियर दक्षिण सहित अन्य विधानसभाओं के कुशवाह वोटों का लाभ पार्टी को मिलेगा।  

उधर डबरा और भितरवार में कांग्रेस अपने वर्तमान विधायकों को ही रिपीट करना चाहेगी , दोनों ही विधानसभा में कोई मजबूत दावेदार भी अभी तक सामने नहीं आया है।  इसलिए माना जा रहा है कि डबरा से इमरती देवी और भितरवार से लाखन सिंह को ही टिकट दिया जाएगा।  डबरा में केवल उस स्थिति में समीकरण बदल सकते हैं जब सत्यप्रकाशी परसेडिया बीएसपी छोड़कर कांग्रेस ज्वाइन कर लें ऐसे से सम्भावना है कि उन्हें कांग्रेस डबरा से  प्रत्याशी बना दे और इमरती देवी को भांडेर से प्रत्याशी बना दिया जाए।   


यहां ब्राह्मण प्रत्याशी से मिलेगा लाभ 

अब बात करते हैं ग्वालियर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र की।  माना जा रहा है कि इस बार टिकट वितरण में पार्टी को इस क्षेत्र में सबसे अधिक दिमागी कसरत करनी पड़ेगी। दावेदारों की सूची  पर निगाह डालेंगे तो यहाँ 20 से अधिक  दावेदारों के नाम सामने आ रहे हैं जिसमें से लगभग 8 उम्मीदवार तो ब्राह्मण ही हैं।  ग्वालियर दक्षिण से दावेदारी जताने वालों में पूर्व मंत्री भगवान सिंह यादव, युवा नेत्री रश्मि पवार शर्मा, आशीष प्रताप सिंह, सुधीर गुप्ता, युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव संजय यादव के अलावा कई समाजों के उम्मीदवार है जिनमें ब्राह्मण समाज के नेता भी शामिल हैं।  इस बार इस सीट से ब्राह्मण समाज अपना दावा मजबूत बता रहा है। ग्वालियर दक्षिण से टिकट मांगने वाले ब्राह्मण नेताओं  में 10 साल से कांग्रेस के प्रवक्ता और तीन बार के पार्षद आनंद शर्मा , दो बार के पार्षद और पूर्व नेता प्रतिपक्ष शम्मी शर्मा, वरिष्ठ नेता केके समाधिया, शहर के बड़े ठेकेदारों में से एक किशन मुद्गल, प्रवीण पाठक और ब्रजेश शर्मा सहित और कई नाम शामिल हैं लेकिन टिकट किसे मिलेगा ये सांसद सिंधिया तय करेंगे।  लेकिन इस बार माना जा रहा है कि पिछले दिनों हुए आन्दोलनों को देखते हुए पार्टी ब्राह्मण समाज को नाराज नहीं करना चाहेगी। क्योंकि ग्वालियर दक्षिण में लगभग 25 हजार ब्राह्मण वोट है और अन्य विधानसभाओं में भी लगभग इसी के आसपास वोटर हैं।  यदि इस बार पार्टी ने एक ब्राह्मण प्रत्याशी उतार दिया तो उसका लाभ सभी विधानसभाओं को मिलेगा। हालाँकि अभी टिकट किसे मिलेगा ये तय नहीं है लेकिन जिन ब्राह्मण नेताओं ने दावेदारी दिखाई है उसमें आनंद शर्मा का नाम ऊपर चल रहा है। वे सिंधिया के करीबी भी हैं  और उनका अभी तक का राजनैतिक सफर विवादों से भी दूर रहा है। दावेदारों में हाल ही में एक बार फिर कांग्रेस ज्वाइन करने वाले ब्रजेश शर्मा का नाम भी चर्चा में है। ब्रजेश शर्मा बीएसपी फिर कांग्रेस फिर भाजपा और अभी फिर से कांग्रेस में शामिल हुए हैं।

टिकट के दावेदारों में एक नाम और चल रहा है वो है पार्टी के वरिष्ठ नेता अशोक सिंह का।  कांग्रेस से जुड़े सूत्र बताते हैं कि पार्टी का वरिष्ठ नेतृत्व उन्हें ग्वालियर चम्बल अंचल में सांसद सिंधिया के बाद दूसरा बड़ा नेता मानता है।  इस बार चर्चा है कि दो बार सांसद का चुनाव हारने के बाद हो सकता है कि अशोक सिंह को विधानसभा का टिकट दे दिया जाए सांसद सिंधिया भी यही चाहते हैं लेकिन अशोक सिंह से जुड़े  लोग बताते हैं कि अशोक सिंह उसी स्थिति में विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनती दिखेगी क्योंकि तब उनका मंत्री पद पक्का हो जाएगा वरना वो इस बार भी सांसद का चुनाव ही लड़ेंगे।  हालाँकि उन्होंने ग्रामीण और ग्वालियर पूर्व दोनों जगह से तैयारी शुरू कर दी है।  उनके समर्थकों ने अशोक सिंह ग्वालियर ईस्ट 1 और अशोक सिंह ग्वालियर ईस्ट 2  के नाम से व्हाट्स एप ग्रुप भी बना लिया है और प्रचार प्रसार शुरू कर दिया है।  माना ये जा रहा है कि अशोक सिंह जिस सीट के लिए कहेंगे हाईकमान उन्हें उसी सीट से टिकट  दे देगा।

चुनाव कार्यक्रम की घोषणा हो चुकी है सभी राजनैतिक दल चुनावी मोड में आ चुके हैं टिकट चाहने वालों की सूची बहुत लम्बी है और  ग्वालियर जिले की छह विधानसभा सीटों के लिए कांग्रेस हाईकमान को मात्र छह लोगों का नाम फाइनल करना है जिसमें उम्मीदवार को जातिगत समीकरण, सामाजिक स्वीकार्यता सहित कई बिंदुओं की कसौटी पर परखा जाएगा  और इसमें जो खरा उतरेगा वही पार्टी का उम्मीदवार होगा।