तीन सप्ताह में ही पब्लिक के दिलो पर छा गए नए कलेक्टर

हरदा| जिले के नवागत कलेक्टर एस. विश्वनाथन ने पदभार संभालने के तीन सप्ताह में ही जनता के बीच अपनी कार्यशैली का परिचय दे दिया है, उन्होंने आमजन के दिलों में एक सहयोगी सेवक की छवि बनाकर गुड गवर्नेन्स के संकल्पित स्वप्न को साकार किया बल्कि प्रयासों को अमलीजामा पहनाना भी शुरू कर दिया है। जिसकी जिले भर में चर्चा है| पदभार संभालते ही कलेक्टर श्री विश्वनाथन ने कहा था कि लोगों की समस्या हल करना मेरी पहली प्राथमिकता होगी, साथ ही हरदा को हर क्षेत्र में अव्वल रहने के लिए सीधे संपर्क में रहके और सुझाव देने का आग्रह किया था। इसमें भरोसा भी दिलाया गया था कि सामूहिक सहयोग से अपेक्षाओं पर खरा उतरने और परिणाम देने की बात कही गयी थी। कलेक्टर अपने प्रयासों पर खरा उतारते दिखाई दे रहे हैं| बहुत ही कम समय में इसका असर भी लोगों में देखने को मिल रहा है| 

अमूमन , प्रभावशाली पद होने के चलते कलेक्टर नाम सुनते ही आमजन अपने जेहन में रुबाब, ठसक की एक भयमिश्रित तस्वीर बना लेता है। लेकिन हरदा कलेक्टर ने मात्र तीन सप्ताह की अल्प अवधि में इस मिथक को तोड़ा है। वाकई ये पहली बार है जब हरदा के जिला बनने के इतिहास में जिलाधीश पद की सकारात्मक महत्ता जानी गई है। प्रशासनिक व्यवस्था में कसावट लाने, स्वास्थ्य, शिक्षा में गुणवत्ता लाने हेतु प्रयासरत , अपने किये वादे को पूरा करने की कसौटी पर धीरे धीरे खरा उतरने वाले  कलेक्टर एस. विश्वनाथन से हरदा जिला को बहुत उम्मीदें हैं।

कलेक्टर की अपील का असर था कि एक दम सीधे सुझाव देने के बजाय आजमाइश बतौर आमजन ने उन्हें अपनी समस्या व्यक्त करने का निर्णय लेकर उसके समाधान होने का इंतेज़ार किया। और परिणाम अप्रत्याशित आने पर आमजन का व्यवस्था के प्रति विश्वास बढ़ा। जो सचमुच आश्चर्यजनक रहा। इसका ताजा उदाहरण भी सामने आया| 

ऐसे मिले परिणाम -

एक आम व्यक्ति की तरह हरदा के कितिन अग्रवाल ने एक शिकायत का मैसेज किया था। तुरंत शिकायत को दर्ज होने का तुरंत प्रतिउत्तर पाकर कितिन को हैरानी हुई। पूर्व अनुभवों के आधार पर वो शिकायत को इस तरह सुनें जाने को लेकर आश्वस्त न थे। दूसरे दिन समस्या का समाधान पाकर उनकी व्यवस्था के प्रति नकारात्मक धारणा सकारात्मक विश्वास में तब्दील हो चुकी थी।  कितिन अग्रवाल की मानें तो जिला बनने के ढाई दशक से अधिक समय बीतने के बाद जिले के इतिहास में उन्हें पहली बार ये अनुभूति हुई है। जब कलेक्टर ने एक चिकित्सक की खूबी-समझ के समकक्ष, आमजन की व्यक्तिगत पहचान से इतर उसके रोग के लक्षण को जानकर, त्वरित उपचार देकर लाभ पहुंचाया है। ये वाकई अद्भुत है।  वे विश्वास जताते हैं कि कथनी को करनी की कसौटी पर कसने और अपेक्षानुरूप परिणाम देने वाला सच्चा सेवक हमारे बीच है। ये हमारा सौभाग्य है। मैं उनकी कार्यशैली को सलाम करता हूँ।

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