सीएम के दौरे के बाद बड़ी रार, पूर्व मंत्री और नपाध्यक्ष में से एक होगा उम्मीदवार

हरदा। शिशिर गार्गव| मप्र विधानसभा चुनाव की घोषणा के पूर्व ही हरदा विधानसभा से दावेदारों के बीच चल रही प्रतिस्पर्धा अब अपने चरम पर पहुंच चूंकि है। इस बात को क्षेत्रीय मतदाताओं ने विगत दिनों 6 सितंबर को जब प्रदेश के मुख्यमंत्री हरदा जन आशीर्वाद रैली लेकर पहुंचे थे, भलीभांति महसूस भी किया है। विगत कुछेक माह से हरदा विधानसभा सीट के रास्ते विधानसभा तक का रास्ता तलाश रहे भाजपा के कई स्थानीय नेताओं के मंसूबो पर सीएम शिवराज ने अपनी जन आशीर्वाद रैली के संबोधन में पानी फेर दिया और हरदा की जनता को केबीसी की तर्ज पर अगले विधायक के लिए दो ऑप्शन दे गए, उल्लेखनीय है कि अपनी सभा के दौरान सीएम ने इशारों ही इशारों में हरदा विधानसभा से पूर्व मंत्री कमल पटेल और नपाध्यक्ष सुरेंद्र जैन की दावेदारी को वजन दिया है। 


पोस्टर होर्डिंग्स वार के बाद अब शब्द बाणों के वार

सीएम शिवराज की जन आशीर्वाद यात्रा को लेकर जिला भाजपा विगत एक माह से तैयारियों को अंजाम दे रही थी, लेकिन यात्रा की तारीख आते आते यह तैयारियां दो गुटों तक सीमित हो गई, जिसके एक सिरे पर पूर्व मंत्री कमल पटेल और उनके समर्थक थे तो दूसरे सिरे पर हरदा नगर पालिका अध्यक्ष सुरेंद्र जैन और उनके समर्थक। सीएम के स्वागत को लेकर इन दिनों टिकिट अपेक्षित नेताओं के समर्थकों ने नगर और पूरी विधानसभा को होर्डिंग्स और बैनरों से इस कदर पाट दिया कि इसमें जिला भाजपा और अन्य कार्यकर्ताओं के पोस्टरों और होर्डिंग्स को बमुश्किल किसी कोने में जगह मिल पाई। 

पूर्व मंत्री पटेल के समर्थकों ने जिला मुख्यालय पर रैली मार्ग पर 800 से अधिक छोटे बड़े होर्डिंग-पोस्टर लगाए तो, नगर पालिका अध्यक्ष सुरेंद्र जैन के समर्थकों ने भी 700 से अधिक स्थानों पर होर्डिंग-पोस्टर लगाए, नगर में लग रहे होर्डिंग्स को देखने के बाद शहर की जनता के लिए इस बात को समझना तो आसान हो गया था कि आगामी विधानसभा में दावेदारी इन दोनों नेताओं के बीच से ही होना है जिसकी पुष्टि सीएम ने रथ से भाषण देते देते इशारों में कर दी। 

उल्लेखनीय है कि सीएम शिवराज की जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान पूर्व मंत्री और नपाध्यक्ष दोनों बराबरी से सीएम खिरकिया से लेकर हरदा तक परछाई बने रहे, लेकिन यात्रा के हरदा प्रवेश के पूर्व सीएम की अगवानी की तैयारियों का जायजा लेने हरदा नपाध्यक्ष को रारह से उतरना इतना भारी पड़ा की उन्हें स्थानीय रविदास चौराहे से घंटाघर तक सीएम साहब के रथ के आगे आगे पैदल चलना पड़ा, हालांकि इस दौरान सीएम ने एक दो दफा जैन को रथ पर बुलाने को कहा लेकिन रोड़ शो के चलते ऐसा हो न सका, इस दौरान सीएम के साथ रात पर सवार पूर्व मंत्री पटेल और उनके समर्थक प्रफुल्लित और उत्साह से भरे नज़र आए, वही रथ के घण्टाघर पहुंचते ही अपने संबोधन के दौरान सीएम ने जिस जोश और उत्साह के साथ हरदा नगर पालिका अध्यक्ष के कार्यों की प्रशंसा करते हुए उन्हें रथ पर आने के लिए कहा उसके बाद आरंभिक बढ़त बना चुके पटेल की आशाओं पर एक बार फिर मानो कुठाराघात हो गया।

भाषण के दौरान जब सीएम ने पूर्व मंत्री के ऊंचे कद को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा कि आपका कद इतना ऊंचा है कि अगर थोड़ा पीछे भी खड़े होंगे तो कोई फर्क नही पड़ेगा, पूरे सभा स्थल पर तालियों की गड़गड़ाहट गूंज गई। बहरहाल नगर की जनता को हरदा विधानसभा से कमल खिलाने का संकल्प दिलाकर सीएम तो आगे बढ़ गए लेकिन अपने पीछे छोड़ गए क्षेत्रीय राजनीतिक महासमर, इस समर में पहला वार पूर्व मंत्री कमल पटेल के छोटे पुत्र सुदीप ने किया है। 


नपाध्यक्ष को बताया शादी में आया नाराज़ फूफा

सीएम की जन आशीर्वाद यात्रा के बाद जैसा कि अपेक्षित था कि टिकिट की दावेदारी को लेकर जुबानी जंग तेज़ होगी, और हुआ भी ऐसा, सोशल मीडिया पर अपने कटु शब्दो, बिंदास बोलो को लेकर सुर्खियों में रहने वाले पूर्व मंत्री पटेल के जनपद उपाध्यक्ष पुत्र सुदीप पटेल ने इस बार बहुत ही रोचक और मजेदार पोस्ट की है, इस पोस्ट में उन्होंने सीएम की सभा के बाद स्थानीय अखबारों की खबरों पर टिप्पणी करते हुए हरदा नगर पालिका अध्यक्ष सुरेंद्र जैन की तुलना शादी में आए उस फूफा से की है जो हर बात पर नाराज़ हो जाता है। सुदीप ने लिखा कि  "जब शादी व्याव मे कोई फूफा नाराज हो जाता है तो परिवार के मुखिया उसका ज्यादा ध्यान देते है। और अपने वाले को पीछे ही रखने का प्रयास करते हैं। वैसे ये सब परिवार मे चलता रहता है । मन बहलाने के लिए ख्वाब बढ़िया है ग़ालिब"।

खैर यह तो मात्र चुनावी समर की शुरुआत भर है, आगे और भी कई पड़ाव बाकी है, जिनका सामना गाहे बगाहे स्थानीय नेताओं को करना है, फिर भी देखने लायक बात यह होगी कि अपने नेता पर चले शब्द बाणों की ढाल बनकर जैन समर्थकों में से कौन रणवीर आगे आता है।


आसां नही डगर टिकिट की, 5 सर्वे रिपोर्ट के आधार पर होगा चयन

आगामी विधानसभा चुनावों में लगातार चौथी बार सरकार बनाने के सपने को साकार करने में जुटी भाजपा और पार्टी आलाकमान किसी भी कीमत पर विपक्षियों को प्रत्याशी चयन, टिकिट वितरण में हावी नही होने देना चाहते है, प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर अभी तक प्रदेश में 5 सर्वे हो चुके है। जिदजे आधार पर आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी प्रत्याशी तय किए जाएंगे। 

उम्मीदवारों के चयन के लिए किए गए पांच सर्वे, जिसमें एक मुख्यमंत्री का, एक निजी संस्था का, एक जन अभियान परिषद का, एक इंटेलिजेंस और एक खुद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का सर्वे है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक इन सर्वे में पार्टी कार्यकर्ताओं के फीडबैक, स्थानीय गणमान्य नागरिकों, समाजसेवियों के मतों के आधार पर  उम्मीदवारों का चयन होगा। 


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