चुनाव से पहले शिवराज की इस योजना पर मंडरा रहा आयोग का खतरा

भोपाल।

चुनावी तारीखों का ऐलान होते ही आयोग ने राजनैतिक दलों पर पैनी नजर रखना शुरु कर दिया है। आयोग द्वारा दलों की हर छोटी से छोटी बात और बयान, घोषणा, ऐलान, और योजनाओं पर गौर किया जा रहा है। इसी बीच अब आयोग की नजर सरकार द्वारा चलाई जा रही संबल योजना पर है।  चुनावी साल में गरीबों के हित के लिए बनाई गई महत्वाकांक्षी संबल योजना पर अब चुनाव आयोग का खतरा मंडराने लगा है। चुनाव आयोग ने संबल योजना को लेकर सरकार को जांच रिपोर्ट तलब की है। 

दरअसल, संबल योजना पर शुरु से ही सवाल उठते आए है। कांग्रेस द्वारा कभी इसमें घोटाले के आरोप लगाए गए तो कभी कार्ड पर शिवराज की तस्वीर को लेकर। बीते दिनों कांग्रेस द्वारा संबल योजना के तहत बांटे जा रहे स्मार्ट कार्ड्स पर मुख्यमंत्री शिवराज की तस्वीर की शिकायत चुनाव आयोग से की गई थी।मामले को गंभीरता से लेते हुए आयोग ने जांच के आदेश दिए और इसी संबंध में एक जांच रिपोर्ट शासन से तलब की गई है। रिपोर्ट आने के बाद उसे भारत निर्वाचन आयोग भेजा जाएगा।

क्या है संबल योजना

 मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल) योजना, असंगठित श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा और उनके सभी तरह के हितों का ध्यान रखते हुए 1 अप्रैल 2018 से पुरे मध्यप्रदेश में लागू की गई. इसके तरह असंगठित श्रमिकों की सहायता के लिए निम्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। मध्यप्रदेश सरकार ने हाल ही में एम.पी. सरल बिजली योजना की शुरुआत की है। इस योजना के तहत मजदूर के परिवार को 200 रुपये के मासिक शुल्क पर बिजली मिलेगी। मध्यप्रदेश सरकार इस योजना की मदद से राज्य के हर घर तक बिजली पहुंचाना चाहती है।मुख्यमंत्री जन कल्याण (संबल) योजना के तहत लाभ पाने के लिए जरूरी है कि परिवार गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) की कैटेगरी में हो। इसके साथ ही परिवार की बिजली खपत महीने में 100 यूनिट या उससे कम हो। इस योजना का लाभ लेने के लिए यह भी जरूरी है कि आपके घर में एक किलोवाट लोड का ही कनेक्शन हो।