रडार पर शिव'राज' के 'मंत्री', घोटालों की फाइलें खुलेंगी

भोपाल। मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार अब एक्शन मोड में नजर आ रही है। विधानसभा चुनाव से पहले किए गए वादों के मुताबिक राज्य सरकार ने अब शिवराज सरकार में हुए घोटालों पर एक्शन लेना शुरू कर दिया है। ई-टेंडर घोटाले में हुई कार्रवाई के बाद से प्रदेश की सियासत का पारा एक बार फिर चढ़ गया है। सूत्रों के मुताबिक कमलनाथ सरकार जल्द ही शिवराज के पूर्व मंत्रियोंं पर कार्रवाई करने का इरादा कर रही है। इस बात के संकेत कमलनाथ सरकार ने आईटी रेड के बाद दिए हैं। बताया जा रहा है सरकार जल्द ही पुराने बही खाते खोलने जा रही है। जिसमें कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। 

मख्यमंत्री कमलनाथ ने इस संबंध में चीफ सेक्रेटरी और डीजीपी के साथ बैठक की है। उन्होंने इस मुलाकात में आईटी रेड संबंधित जानकारी ली और इसक साथ ही पूर्व सरकार के कार्यकाल में हुए घोटालों के बारे में भी चर्चा की। सूत्रों के मुताबिक सरकार अब बीते 15 सालों में हुए बड़े आयोजन और उनमें भ्रष्टाचार की तह में जाना चाहती है।  सीएम कमलनाथ ने स्पष्ट रूप से अफसरों को भाजपा सरकार के दौरान हुई अनियमितताओं की फाइलें प्राप्त करने और जांच के लिए ईओडब्ल्यू को सौंपने का निर्देश दिया है। भाजपा नेताओं को जांच के जरिए निशाना बनाया जाएगा। सरकार सभी दस्तावेजों को EOW और अन्य पुलिस एजेंसियों को सौंप देगी। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि जिलों में हुई अनियमितताओं की जानकारी लोकसभा चुनाव के बाद भी एकत्र की जानी चाहिए।

यही नहीं मुख्यमंत्री ने मंत्रियों और विधायकों को इस बात के साफ संकेत दिए हैं कि उनके सामने बीजेपी नेताओ से संबंधित सभी मुद्दे प्रथमिकता से रखे जाएं। कांग्रेस ने विधानसभा में भी बीजेपी के कार्यकाल में हुए घोटालों को उठाया था। सीएम ने सख्त रुख अपनाते हुए यह साफ कर दिया है कि चुनाव के बाद वह किसी भी भ्रष्ट नेता या अफसर को बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि, अंदरखाने की खबर यह भी है कि पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह कमलनाथ के इस रवैये से खुश नहीं हैं। 

विधानसभा चुनावों के बाद छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल ने पूर्व सीएम रमन सिंह और उनके विश्वासपात्रों पर कठोर कार्रवाई की है। अब, नाथ भी उसी तर्ज पर राज्य में भाजपा नेताओं के खिलाफ कार्रवाई चाहते हैं। आई-टी छापे के बाद नाथ ने अपने करीबी अधिकारियों को स्पष्ट रूप से संकेत दिया है कि वह अब किसी भी भाजपा नेता को नहीं बख्शेंगे।

ये घोटाले जांच के दायरे में


-सिंहस्थ के दौरान की गई खरीदारी

-सहकारिता विभाग और मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष में ऋण संवितरण में अनियमितता

-नर्मदा के किनारे किए गए प्याज और बागानों की खरीद

-व्यापमं के बारे में एसटीएफ के पास शिकायतें भेजना

-माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में नियुक्ति

-ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के आयोजन में खर्च

-छात्रवृत्ति घोटाला

-एनजीओ को सौंपा काम

-संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम

-वैचारीक महाकुंभ के दौरान व्यय

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