भाजपा में बगावत, आधा दर्जन नेताओं ने बढ़ाई मुश्किलें, बड़ी टूट का खतरा

भोपाल। लोकसभा लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा में जहां भगदड़ मची हैं। वहीं चुनाव में भितरघात और बगावत का खतरा बढ़ गया है। आधा दर्जन से ज्यादा सीटों पर पार्टी नेताओं ने खुलकर खिलाफत शुरू कर दी है। खास बात यह है कि टिकट कटने से नाराज नेताओं को पार्टी की ओर से मनाने की पुरजोर कोशिश की जा चुकी है, लेकिन ये नेता मानने को तैयार नहीं है। इनमें से कुछ नेता पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ नामांकन पत्र दाखिल कर चुके हैं, जबकि कुछ नेता खुलकर चुनाव प्रचार में उतार आए हैं। ऐसे नेताओं को पार्टी की ओर से समझाइश दी जा  रही है। चुनाव से पहले उन्हें बाहर करने का फैसला लिया जा सकता है। 

विधानसभा चुनाव से पहले तक दूसरे दलों के नेता भाजपा में शामिल हो रहे थे। प्रदेश में सत्ता बदलने के बाद भाजपा, सपा एवं बसपा नेताओं का कांग्रेस में जाने का सिलसिला शुरू हो गया है। पिछले कुछ सालों में जो नेता कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे, वे भी अब कांग्रेस नेताओं के यहां हाजिरी लगाते देखे जा रहे हैं। भाजपा में नेताओं का पार्टी छोडऩे का सिलसिला अभी थमा नहीं है।  पूर्व विधायक आरडी प्रजापति ने जहां भाजपा छोड़कर समाजवादी पार्टी की सदस्यता ले ली  है और वे अब टीकमगढ़ लोकसभा सीट से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे। वहीं भाजपा को सागर लोकसभा क्षेत्र में नेताओं के पार्टी छोडऩे की संभावना है। टिकट काटने पर मौजूदा सांसद लक्ष्मीनारायण यादव ने पार्टी को धमकी दी है। 


6 नेताओं ने बढ़ाई भाजपा की मुश्किल

लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के आधा दर्जन से ज्यादा नेता पार्टी की खिलाफत कर चुके हैं। शहडोल सांसद ज्ञान सिंह ने पार्टी प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार नहीं करने का ऐलान किया है। टिकट कटने से ज्ञान सिंह बेहद नाराज हैं और उन्होंने पूर्व में निर्दलीय चुनाव लडऩे की घोषणा कर पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी थीं। बाद में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के मनाने पर ज्ञान सिंह ने यह कहकर चुनाव लडऩे से इंकार कर दिया कि वे उन्हें पास पैसा नहीं है। जिन लोगों से आर्थिक सहयोग मांगा था, उन्होंने भी मदद से इंकार कर दिया है। इसी तरह छतरपुर के चंदाला से पूर्व विधायक आरडी प्रजापति ने भाजपा छोड़कर सपा का दामन थाम लिया है। वे टीकमगढ़ से भाजपा के वीरेन्द्र खटीक के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे। खास बात यह है कि ज्ञान सिंह और आरडी के बेटे भाजपा से विधायक हैं। बालाघाट सांसद बोध सिंह ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है। प्रदेश भाजपा की ओर से बोध सिंह को मनाने की पुरजोर कोशिश की गई, लेकिन वे अपनी जिद पर अड़े हैं। पूर्व मंत्री हिम्मत कोठारी ने भी पत्र लिखकर भाजपा की परेशानी बढ़ा दी है और टिकट चयन में हो रही देरी को लेकर पार्टी नेतृत्व की मंशा पर भी सवाल उठाए हैं। इसी तरह लोकसभा अध्यक्ष एवं इंदौर सांसद सुमित्रा महाजन भी खुला पत्र लिखकर पार्टी हाईकमान की टिकट वितरण प्रक्रिया को कठघरे में खड़ा कर चुकी हैं। मुरैना महापौर अशोक अर्गल भी भिंड से टिकट नहीं मिलने से नाराज हैं। वे कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के संपर्क में है। हालांकि कांग्रेस में अर्गल को भिंड से प्रत्याशी बनाए जाने पर सहमति नहीं बन पा रही है। यही वजह है कि अर्गल बैकपुट पर आते दिख रहे हैं।   


बड़ी टूट का खतरा

भाजपा में अभी इंदौर, भोपाल, गुना, विदिशा समेत 8 सीटों पर टिकट का फैसला नहीं हुआ है। नेताओं के लगातार बगावत पर उतरने से पार्टी में बड़ी टूट का खतरा बढ़ गया है। पार्टी को आशंका है कि यदि टिकट वितरण में गड़बड़ी हुई तो भोपाल, इंदौर, विदिशा में बड़ी संख्या में भाजपा नेता पार्टी छोड़ सकते हैं। 

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