पूर्व विधायक बोले, 'शिवराज में इतना दम नहीं कि बुधनी के कार्यकर्ता को नजरअंदाज करे'

सोहीर। मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव का खुमार नेताओं पर पूरे शबाब पर है। आए राम गया राम की राजनीति भी जोरों पर हो रही है। टिकट बंटवारे से नाराज दावेदारों ने बीजेपी के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया है। इसकी शुरूआत सीएम के गृह जिले सीहोर से हो गई है। अपनी पत्नी को निर्दलीय चुनाव लड़ाने का ऐलान कर चुके पूर्व विधायक रमेश सक्सेना ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अगर वह बीजेपी से टिकट की मांग करते तो सीएम में इतना दम नहीं कि उनका टिकट काट सकते। 

उन्होंने कहा कि वह चाहते तो बुधनी विधानसभा में दो हजार कार्यकर्ता को धरने पर बैठा सकता था और शिवराज सिंह की इतनी दम नहीं है कि वह बुधनी के कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज करें। उन्होंने कहा कि टिकट मांगने नहीं जाएंगे। अगर पार्टी खुद दे तो बात अलग है। दो महीने से भोपाल नहीं देखा तो दिल्ली देखने का सवाल नहीं उठता। उन्होंने कहा कि टिकट के लिए कांग्रेस ने 20 दिन पहले उनसे संपर्क किया था। कांग्रेस नेताओं ने मुझे टिकट देने के लिए अॉफर दिया था। उन्होंने पूछा था कि क्या आप हमारे साथ हैं। इस सवाल के जवाब में मैंने उनसे कहा था कि पहले आप अपनी पार्टी के नेताओं से बात करें और फिर मुझे बताएं। उसके बाद में अपने साथियों से इस बारे में चर्चा करूंगा। 

गौरतलब है कि बीजेपी ने सीहोर से पिछला चुनाव निर्दलीय होकर लड़ने वाले विधायक सुदेश राय को मौका दिया है। इसके बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक रमेश सक्सेना चुनावी मैदान में कूद पड़े हैं और निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान किया है, हालांकि उनकी जगह उनकी पत्नी चुनाव लड़ेंगी। सीहोर सीट से रमेश सक्सेना तीन बार भाजपा और एक बार निर्दलीय के रूप में चुनाव जीते हैं। 2013 के चुनाव में उनकी पत्नी ऊषा सक्सेना बीजेपी की टिकट पर चुनाव लड़ी। लेकिन हार का सामना करना पड़ा| निर्दलीय विधायक सुदेश राय को टिकट मिलने के बाद, बीजेपी नेताओं ने बगावत कर दी है। रमेश सक्सेना ने बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।


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