नतीजों से पहले नए डीजीपी और मुख्य सचिव को लेकर अटकलें तेज

भोपाल। मप्र में चुनाव परिणाम आने में अभी हफ्ता भर बाकी हैं, लेकिन अधिकारियों की नई जमावट को लेकर मंत्रालय से लेकर पुलिस मुख्यालय तक अटकलों के दौर चल रहे हैं। प्रदेश के नए मुख्य सचिव के रूप में इकबाल सिंह बैस और एसआर मोहंती के नाम चर्चा में आने के बाद अब नए पुलिस महानिदेशक के नाम की अटकलें शुरु हो गई हैं। चर्चा है कि भाजपा की सत्ता में वापसी हुई तो अवकाश पर चल रहे ऋषि कुमार शुक्ला फिर से डीजीपी की कुर्सी पर आमाद दे देंगे। यदि कांग्रेस की सरकार बनी तो पहली प्राथमिकता विवेक जोहरी के नाम पर बताई जा रही है। हालांकि इस दौड़ में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के ओएसडी रहे शैलेन्द्र श्रीवास्तव और जबलपुर में एसपी रहें संजय चौधरी के नाम भी शामिल हैं। 

सरकार के प्रशासनिक गलियारों में फिलहाल काम कम और अटकलें ज्यादा चल रही हैं। नई सरकार किसकी होगी, नई सरकार का सीएम कौन होगा। इन दो सवालों के बाद सबसे बड़ा सवाल नई सरकार में मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक कौन होगा इसकी अटकलें अब तेज हो गई हैं। पुलिस मुख्यालय में चल रही अटकलों पर भरोसा किया जाए तो भाजपा की वापसी पर दो विकल्प सामने हैं। पहला ऋषि कुमार शुक्ला वापिस लौटें, दूसरा चुनाव आयोग की अनुशंसा पर कार्यकारी महानिदेशक बनाए गए वी.के. सिंह को लोकसभा चुनाव तक यथावत रखा जाए। 


कांग्रेस सत्ता में आई तो पसंद का होगा DGP

कांग्रेस की सरकार आने पर यह माना जा रहा है कि डीजीपी कांग्रेस नेताओं की पसंद का होगा। सबसे पहला नाम मूलत: भोपाल के रहने वाले और इस समय रॉ में पदस्थ विवेक जौहरी का चल रहा है। यद्यपि जौहरी 31 दिसम्बर से पहले शायद मप्र न लौटें, क्योंकि उनका नाम रॉ प्रमुख बनने की सूची में है। 31 दिसम्बर तक रॉ प्रमुख का फैसला होना है। यदि जौहरी रॉ प्रमुख नहीं बने तो ही मप्र वापिस लौटेंगे। जौहरी भी दिग्विजय सिंह सरकार में मुख्यमंत्री के ओएसडी थे। जौहरी के अलावा दूसरे दो नाम भी चर्चा में हैं। इनमें वर्तमान में परिवहन आयुक्त शैलेन्द्र श्रीवास्तव के बारे में चर्चा है कि उनके कांग्रेस नेताओं से मधुर संबंध हैं। दूसरी ओर जेल महानिदेशक संजय चौधरी का नाम भी चर्चा में है। चौधरी के कमलनाथ से अच्छे संबंध माने जा रहे हैं।


मुख्य सचिव को लेकर अटकलें 

मुख्य सचिव बीपी सिंह 30 नवंबर यानी शुक्रवार से छुट्टी पर चले गए हैं। उनकी सेवानिवृत्ति 31 दिसंबर को है, इसलिए वे 7 दिसंबर को छुट्टी से वापस आएंगे। लेकिन उनका कार्यकाल 1 महीने का ही होने के कारण अब नए सीएस की चर्चाएं शुरू हो गई है । ऐसे में भाजपा सरकार और कांग्रेस सरकार दोनों के बनने पर अलग-अलग समीकरण की स्थिति बनेगी । यदि भाजपा सरकार आती है, तो एक बार फिर अपर मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस और राधेश्याम जुलानिया व एपी श्रीवास्तव प्रमुख दावेदार होंगे। वहीँ यदि सत्ता परिवर्तन होता है, तो कांग्रेस के आने पर अपर मुख्य सचिव एसआर मोहंती फिर प्रबल दावेदारों में शामिल हो जाएंगे। मोहंती 1982 बैच के सबसे वरिष्ठ अधिकारी है। इनके अलावा कमलनाथ या दिग्विजय सिंह के किसी करीबी अफसर की भी लॉटरी खुल सकती है। 


शिवराज सरकार में ये अफसर पॉवरफुल

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार में आधा दर्जन अफसरों की ज्यादा चलती रही है। अफसरों की मैदानी जमावट से लेकर सरकार में हर तरह के छोटे-बड़े फैसले इन्हीं मुठ्ठीभर अफसरों की सहमति से ही लिए जाते रहे हैं। यही वजह है कि सरकार में दूसरे अफसरों में इसको लेकर नाराजगी रहती। शिवराज सरकार में विवेक अग्रवाल, एसके मिश्रा, मोहम्मद सुलेमान, इकबाल सिंह बैंस, हरिरंजन राव, राधेश्याम जुलानिया, मनोज श्रीवास्तव की गिनती ताकतवर अफसरों में होती है। 


सरकार बदली तो ये होंगे ताकतवर

प्रदेश में सत्ता परिवर्तन की स्थिति में प्रशासनिक मुखिया की दौड़ में वरिष्ठ आईएएस एसआर मोहंती सबसे आगे हैं। मुख्य सचिव के बदलने पर विभागों के प्रमुख सचिव, संभागायुक्त एवं जिला कलेक्टरों तक बदलाव होगा। ऐसे अफसर जो लंबे समय से लूप-लाइन में हैं, उन्हें बेहतर पोस्टिंग मिलने की संभावना रहेगी। कांग्रेस की सरकार बनने पर मनु श्रीवास्तव के लिए मुख्यमंत्री सचिवालय के दरबाजे खुल सकते हैं। मनु की गिनती कमलनाथ के बेहद करीबी अफसरों में होती है। इसके अलावा मलय श्रीवास्तव, संजय बंदोपाध्याय, आशीष उपाध्याय, प्रवीण गर्ग, राजेश मिश्रा, गौरी सिंह भी ताकतवर होंगे। 


सत्ता परिवर्तन का इन पर नहीं पड़ेगा असर

सत्ता परिवर्तन की स्थिति में मोहम्मद सुलेमान और राधेश्याम जुलानिया पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। क्योंकि सुलेमान कांग्रेस सरकार के समय में कांग्रेस नेताओं के चहेते अफसर थे। वे भाजपा नेताओं के भी चहेते रहे हैं। जबकि जुलानिया तो अपने सख्त अंदाज की वजह से सरकारों के चहेते अफसर रहे हैं। 

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