सर्वे ने बदले समीकरण, कांग्रेस ने फिर बुलाई CEC की बैठक, आज-कल में पहली सूची

भोपाल।

चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव 2019 के मतदान की तारीख घोषित कर दी है। ऐसे में राजनीतिक पार्टियां अपनी तैयारियों में जुट गई है । लोकसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस में जबरदस्त मंथन चल रहा है। कई सीटों पर सिंगल नाम तय हो चुके है,लेकिन कईयों पर पैनल बना हुआ है। इसी के चलते आज फिर दिल्ली में कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक बुलाई गई है। इसमें लोकसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों के नाम पर चर्चा होगी। कई सीटों पर फेरबदल की भी संभावना जताई जा रही है। इस बैठक में मध्यप्रदेश समेत अन्य राज्यों के प्रत्याशियों को लेकर भी चर्चा की जाएगी।बैठक में शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ दिल्ली में हैं और  उनके साथ प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया भी शामिल होंगे। वही गुना सांसद सिंधिया और वरिष्ठ नेता दिग्विजय के भी शामिल होने की अटकलें है। उम्मीद की जा रही है कि आज शाम तक कांग्रेस एक लिस्ट जारी कर सकती है।

       बताया जा रहा है कि हाल ही में करवाए गए सर्वे मे कई सीटों पर समीकरण बदले नजर आ रहे है। बीजेपी की रणनीति के चलते बड़े नेताओं की सीटों में हेरफेर किया जा सकता है।ग्वालियर में एंटीइनकमबेंसी और अंदरुनी कलह के चलते ज्योतिरादित्य सिंधिया गुना के बदले ग्वालियर से चुनाव लडऩे का मन बना रहे हैं। सर्वे की रिपोर्ट में गुना की परिस्थितियां अनुकूल नहीं बताई गईं। अभी तक सिंधिया और उनकी पत्नी प्रियदर्शिनी सिंधिया ने गुना संसदीय क्षेत्र में फोकस कर रखा था। सर्वे रिपोर्ट ने कांग्रेस को चिंता में डाल दिया है। संभावना जताई जा रही है कि राहुल गांधी से चर्चा के बाद सिंधिया ग्वालियर से उतरेंगे। वही दिग्विजय सिंह को राजगढ़ की जगह भोपाल से चुनाव लडऩे को कहा गया है।चुंकी अभी तक पार्टी को भोपाल से कोई जिताऊ उम्मीदवार नही मिल पाया है। वहीं, अजय सिंह सतना को छोड़कर सीधी की राह पर बढ़ चले हैं। सर्वे में यह बात सामने आई है कि सतना में अजय सिंह का विरोध हो रहा है, जिससे एक बार फिर उन्हें परेशानी आ सकती है।सीधी में पिछले चुनाव मे हार का अंतर कम रहा है, इसी के चलते  अजय सिंह ने सतना छोड़कर अब सीधी की राह पकड़ ली है।दिल्ली में हुई बैठक के बाद नेताओं ने इस तरह के संकेत दिए हैं। राजगढ़ का उम्मीदवार तय करने की जिम्मेदारी दिग्विजय के अलावा मंत्री जयवद्र्धन सिंह, प्रियव्रत सिंह और विधायक लक्ष्मण सिंह पर छोड़ दी गई है। सुंदरलाल तिवारी के निधन के बाद अब रीवा में दूसरे ब्राह्मण नेता की तलाश की जा रही है।प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया के अनुसार, चुनाव में सर्वे के आधार पर उम्मीदवार तय किए जा रहे हैं। कौन-कहां से चुनाव लड़ेगा, ये केंद्रीय चुनाव समिति तय करेगी। पूरी परिस्थितियों को देखकर ही जिताऊ उम्मीदवार तय किए जाएंगे।

गुरुवार को हुई बैठक में इनके नाम फायनल

वही दिल्ली में गुरुवार देर रात तक चली बैठक की अध्यक्षता एआईसीसी के संगठन प्रभारी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने की। मुख्यमंत्री कमलनाथ और राष्ट्रीय महासचिव व प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया भी बैठक में मौजूद थे।  गुरुवार को कई सीटों को लेकर चर्चा की गई, लेकिन सर्वे के चलते आज फिर बैठक बुलानी पड़ी।हालांकि कुछ सीटों जैसे झाबुआ से कांतिलाल भूरिया का और छिंदवाड़ा से कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ का नाम तय माना जा रहा है। पहले कांतिलाल भूरिया के नाम को लेकर भी पार्टी असंमजय मे थी, क्योकि जेवियर मेडा ने लोकसभा चुनाव मे ताल ठोक दी थी, लेकिन गुरुवार को हुई घर वापसी के बाद पार्टी ने राहत की सांस ली है। इसके अलावा मंदसौर से मीनाक्षी नटराजन, धार से गजेंद्र सिंह राजूखेड़ी, खंडवा से अरुण यादव, सागर से प्रभुसिंह ठाकुर, दमोह से रामकृष्ण कुसमरिया आदि के नाम दौड़ में शामिल हैं। 

इन सीटों पर अब भी जिताऊ उम्मीदवार की तलाश

वही प्रदेश की 8 से 10 सीटें ही ऐसी है, जिन पर अभी उम्मीदवारों को लेकर स्थिति साफ हो पाई है, बाकी सीटों पर पार्टी जिताऊ उम्मीदवारों को ही मैदान में उतारना चाहती है। जबकि पार्टी के पास स्थानीय स्तर पर भोपाल, उज्जैन, इंदौर, देवास, मुरैना, भिंड, टीकमगढ़, खजुराहो, रीवा, सीधी, विदिशा, बालाघाट, शहडोल, मंडला, जबलपुर समेत अन्य चार सीटों पर सर्व सम्मति से चुनाव लड़ाने के लिए उम्मीदवार ही नहीं है। इसलिए पार्टी इन सीटों पर उपयुक्त उम्मीदवार ना मिलने पर युवा और महिलाओं पर दांव खेलने के मूड में है।  इससे पहले स्क्रीनिंग कमेटी की एक बैठक हो चुकी है। उसमें करीब 20 नामों पर चर्चा हो चुकी है।




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