किसानों की कर्जमाफी के लिए मैदान में उतरेगी 'टीम कमलनाथ'

भोपाल। मध्य प्रदेश में कांग्रेस के 15 साल के वनवास को ख़त्म करने वाली कर्जमाफी की घोषणा का लाभ लोकसभा चुनाव से पहले किसानों को मिले इसके लिए कमलनाथ सरकार ने कमर कस ली है| मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद सबसे पहली फाइल कर्जमाफी की साइन करने के बाद आदेश जारी हो चुके हैं| जिला कलेक्टरों को निर्देश जारी किये जा चुके हैं| अब किसानों को लाभ दिलाने और कर्जमाफी के नाम पर मुख्यमंत्री कमलनाथ की ब्रांडिंग के लिए सरकार एक साथ मैदान में उतरने वाली है| 15 जनवरी को एक साथ पूरी सरकार, विधायक और पार्टी पदाधिकारी किसानों के फार्म भरवाने की शुरुआत करेंगे। इसकी तैयारियों को लेकर मंत्रालय में बुधवार को अनौपचारिक कैबिनेट बैठक हुई।

मुख्यमंत्री कमलनाथ 15 जनवरी को भोपाल में योजना के तहत किसानों के फार्म भरवाने की शुरूआत करेंगे। इस मौके पर कुछ किसानों से फार्म भी भरवाए जाएंगे। प्रमुख सचिव कृषि डॉ. राजेश राजौरा ने योजना से जुड़ी बारीकियां मंत्रियों को बताई, जिसे मंत्री किसानों के बीच पहुंचकर उन्हें बताएँगे| लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी किसानों से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है| कमलनाथ सरकार की कर्जमाफी की घोषणा की कमियों को लेकर बीजेपी हमला बोल रही है| इसी के चलते सरकार ने 12 दिसम्बर तक कर्जमाफी का एलान किया है| अब बीजेपी की रणनीति को बिफल करने के लिए सरकार मैदान में उतरेगी|  

बुधवार को विधानसभा की कार्यवाही स्थगित होने के बाद साढ़े 12 बजे से मंत्रालय में कर्जमाफी के मुद्दे पर करीब आधा घंटे अनौपचारिक कैबिनेट बैठक हुई। योजना की बारीकियां मंत्रियों को समझाने के लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रमुख सचिव कृषि डॉ. राजेश राजौरा को बुलवाया था। बैठक में तय किया गया कि 15 जनवरी को एक साथ सभी मंत्री और विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में कर्जमाफी योजना की शुरुआत करेंगे। इसके तहत किसानों के फार्म भरवाए जाएंगे। 


आचार संहिता से पहले मिले किसानों को लाभ 

कर्जमाफी की घोषणा पर आचार संहिता का पेंच लग सकता है। राज्य सरकार ने पात्र किसानों की तलाश के लिए 22 फरवरी तक का कार्यक्रम जारी कर दिया है। इसमें कहा गया है कि 21 फरवरी को पात्र किसानों की संख्या के हिसाब से जिलों में फंड ट्रांसफर होगा और 22 फरवरी से खातों में पैसा जाना शुरू हो जाएगा। सूत्रों का कहना है कि योजना को लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने के पहले पंचायत स्तर पर पहुंचाने की रणनीति बनाई गई है। इस काम में सरकारी तंत्र के साथ पार्टी भी जुटेगी।   

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