Diwali 2018: इस शुभ मुहूर्त में करें लक्ष्मी पूजन, जानिये पूजा की विधि

देश भर में आज दिवाली की धूम है, दीपो के इस त्यौहार में कहीं कोई भी कौना ऐसा नहीं मिलेगा जहां उजियारा न हो| मन के अँधेरे को दूर कर खुशियों के दीप जलाकर आज इस त्यौहार को घर घर में धूम धाम से मनाया जाता है| कार्तिक महीने की अमावस्या के दिन दीपावली यानी दिवाली

मनाई जाती है, मान्यता है कि भगवान राम चौदह साल के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे| इस खुशी में अयोध्यावासियों ने घर में घी के दिए जलाए थे और अमावस्या की काली रात भी रोशन हो गई थी| इसलिए दिवाली को प्रकाशोत्सव भी कहा जाता है| इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है| दिवाली को अन्य भाषाओं में अलग-अलग नामों से जाना जाता है जैसे बंगाली में 'दीपाबॉली' नेपाली में 'तिहार' और 'स्वन्ति' सिंधी में 'दियारी', और मारवाड़ी में 'दियाळी'. यहां जानिए दिवाली लक्ष्मी पूजन के शुभ मुहूर्त, पूजा की सामग्रियों, पूजा- विधि  

59 साल बाद दिवाली पर कई लाभकारी संयोग बन रहे हैं। गुरु और शनि का दुर्लभ योग बन रहा है। दिवाली पर देव गुरु बृहस्पति, मंगल के स्वामित्व वाली वृश्चिक राशि में रहेंगे। वहीं, त्रिग्रही और आयुष्मान, सौभाग्य योग के कारण दीपावली व्यापार, राजनीति और नौकरी करने वालों के लिए अधिक मंगलकारी होगी।


दिवाली पूजा का शुभ मुहूर्त

इस साल दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त 1 घंटा 58 मिनट तक रहेगा| इसी दौरान सभी घरों में लक्ष्मी-गणेश की पूजा सम्पन्न की जाएगी. 

लक्ष्मी-गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त - शाम 06:12 से 08:10 तक है| प्रदोष काल: शाम 17:27 बजे से 20:06 बजे तक वृषभ लग्न: 17:57 बजे से 19:53 बजे से तक.



दिवाली पूजा विधि-

- सबसे श्री गणेश जी का ध्यान करें

- इसके बाद गणपति को स्नान कराएं और नए वस्त्र और फूल अर्पित करें.

- इसके बाद देवी लक्ष्मी का पूजन शुरू करें. मां लक्ष्मी की प्रतिमा को पूजा स्थान पर रखें.  

- मूर्ति में मां लक्ष्मी का आवाहन करें. हाथ जोड़कर उनसे प्रार्थना करें कि वे आपके घर आएं.

- लक्ष्मी जी को वस्त्र अर्पित करें. वस्त्रों के बाद आभूषण और माला पहनाएं.

- मां इत्र अर्पित कर कुमकुम का तिलक लगाएं.

- अब धूप व दीप जलाएं और माता के पैरों में गुलाब के फूल अर्पित करें.

- इसके बाद बेल पत्र और उसके पत्ते भी उनके पैरों के पास रखें.

- 11 या 21 चावल अर्पित कर आरती करें. आरती के बाद परिक्रमा करें.

- इसके बाद उन्हें भोग लगाएं.