कमलनाथ सरकार में खूब फलफूल रहा ट्रांसफर उद्योग, प्रशासनिक व्यवस्था चौपट : नेता प्रतिपक्ष

भोपाल।  मध्य प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही तबादलों की झड़ी लगी हुई है| रोजाना अलग अलग विभागों की तबादला सूची जारी हो रही है| इसको लेकर विपक्ष ने सवाल उठाये हैं| नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कमलनाथ सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि जब से प्रदेश में कमलनाथ की सरकार बनी है, ट्रांसफर उद्योग खूब फलफूल रहा है| विकास का वचन देने वाले कमलनाथ मुख्यमंत्री बनते ही विकास कार्यो पर ध्यान देने के बजाय ट्रांसफर पोस्टिंग में लगे है। रोजाना चार - चार पेज की ट्रांसफर सूचियाँ जारी हो रही है, जिससे प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो गईं है। प्रशासनिक अधिकारी हतोत्साहित हो रहे है और आम जनता परेशान हो रही है। 

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि भाजपा सरकार ने 15 साल में जितने ट्रांसफर नही किये उससे कही ज्यादा ट्रांसफर 50 दिनों में कर कांग्रेस ने प्रशासनिक व्यवस्था चौपट कर दी है| जनता यह जानना चाहती है की क्या यही है वक्त है बदलाव का| कमलनाथ सरकार ने 50 दिनों में 800 से ज्यादा वरिष्ठ अधिकारियों के ट्रांसफर कर प्रशासन को पंगु बना दिया है। अधिकारियों को जिस जगह तैनात किया जाता है उसे काम समझने  के पहले ही फिर से उनका ट्रांसफर कर दिया जाता है। जिससे प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।  उन्होंने कहा कि राजनीति का मुख्य काम प्रशासन को नेतृत्व प्रदान करना होता है, ताकि प्रशासन जनता की आकांक्षा को 'विधि द्वारा स्थापित शासन' की सीमाओं में पूरा कर सके। प्रशासन अधिकारी  शासन का हाथ पैर होता है, जो विकास को गति देते है। भार्गव ने कहा कि एक तरफ सरकार वित्तीय संकट का रोना रोतीं हैं वही दूसरी और इन अधिकारियों के ट्रांसफर पर जनता के जेब का लगभग 100 करोड़ रूपयें का भार ट्रांसफर अलाउंस के नाम पर शासन पर पड़ रहा है। 


पोस्टिंग को लेकर दलाल, ठेकेदार और ट्रांसफर माफिया सक्रिय 

गोपाल भार्गव ने आरोप लगाया है कि सरकार एक ओर भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण दे रही है वही दूसरी ओर कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों पर लांछन लगाकर उन्हें प्रताड़ित और हतोत्साहित कर रही है। सरकार में ट्रांसफर पोस्टिंग को लेकर वल्लभ भवन से लेकर जिला और तहसील तक कांग्रेस के दलाल, ठेकेदार और ट्रांसफर माफिया सक्रिय है। जनता परेशान हैं और ईमानदार कर्मचारी अधिकारी दबाव में है। कांग्रेस सरकार लोकसभा के लिए पैसा जुटाने के लिए अधिकारियों पर दबाव बना रही है। उन्हें उगाही के टारगेट दिए जा रहे है और टारगेट पूरा न करने पर अधिकारियों के एक माह में 3 बार ट्रांसफर पर ट्रांसफर किये जा रहे है।  पुरे प्रदेश में प्रशासनिक अराजकता फ़ैल गईं है। दर्जनों अधिकारियों ने मुझे इस भयावह स्थिति से अवगत करवाया है। सरकार के मंत्री खुले आम मंच से कर्मचारियों और अधिकारियों को धमकी देते है जिससे असुरक्षा, असन्तोष और भय का वातावरण है। 



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