बीजेपी के गढ़ 'भोजपुर' में इस बार कांटे का मुकाबला, दिग्गज ठोक रहे ताल

भोपाल/रायसेन| रविंद्र सिंह राजपूत| मध्य प्रदेश में चुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही भोजपुर विधानसभा क्षेत्र में सियासत तेज हो गई है| अब तक टिकट को लेकर सक्रीय नेताओं ने अपनी रफ़्तार भी तेज कर दी है और अपने अपने नेताओं से जोर लगाया जा रहा है | संभावना है एक सप्ताह में कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही पार्टियां अपने प्रत्याशियों का ऐलान कर सकती है| बीजेपी के मजबूत वोटबैंक वाली इस सीट पर वर्तमान में पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के भतीजे सुरेंद्र पटवा विधायक है और सरकार में संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री हैं। इसी सीट से दो बार बीजेपी को जिताने वाले सुरेंद्र पटवा के लिए इस बार यहां से चुनाव लड़ना मुश्किल हो रहा है, चर्चा है वह नीमच जिले की मनासा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं| पिछले दिनों पार्टी के सर्वे में एक दर्जन से अधिक मंत्रियों की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद सीट बदलने की चर्चा तेज हैं, संभावना है पटवा भी भोजपुर सीट बदल सकते हैं| पटवा के सीट छोड़ने की चर्चा और स्थानीय नेता को प्रत्याशी बनाये जाने की चर्चा के बाद बीजेपी में दावेदारों की कतार लग गई हैं, कई बड़े स्थानीय नेता टिकट के लिए दावेदारी ठोक रहे हैं| वहीं लगातार दो बार हारने के बाद कांग्रेस की भी इस सीट पर नजर है और कई दावेदार मैदान में दिखाई दे रहे हैं, जो अपनी टिकट तय मान रहे हैं, वहीं यह भी चर्चा है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी एक बार फिर भोजपुर से चुनाव लड़ सकते है| 

रायसेन जिले की भोजपुर विधानसभा सीट का बीजेपी सरकार में हमेशा दबदबा रहा है| पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा इसी सीट से जीतकर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने| वर्ष 1985 में जब सुंदरलाल पटवा को प्रदेश में सुरक्षित सीट की तलाश थी, तब वे सीहोर से भोजपुर आए थे। यहां से चुनाव लड़कर लगातार 1998 तक वे जीत हासिल करते रहें। इसी सीट से विधायक रहते मुख्यमंत्री भी बने, बाद में दिग्विजय सरकार में वे नेता प्रतिपक्ष भी यहीं से रहे। 2003 के चुनाव में पहली बार उन्होंने अपने भतीजे सुरेंद्र पटवा को चुनाव लड़ाया, लेकिन वो हार गए| लेकिन इसके बाद भी बीजेपी ने दो बार सुरेंद्र पटवा को भोजपुर से टिकट दी और दोनों बार सुरेंद्र पटवा विधायक बने|  भाजपा के पितृ पुरुषों में शुमार रहे प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के न होने की कमी इस बार खलेगी, जिसके चलते इस बार यहां दावेदारों की फ़ौज भी खड़ी हो गई है| स्थानीय प्रत्याशी की मांग और क्षेत्र में उठ रहे विरोध के चलते सुरेंद्र पटवा के सीट बदलने की चर्चा है| 


बीजेपी में यह दावेदार ठोक रहे ताल 

भोजपुर में इस बार बीजेपी पार्टी के नेताओं द्वारा स्थानीय प्रत्याशी को चुनाव में उतारने की मांग चल रही है अगर कुछ ज्यादा उलटफेर नहीं हुआ तो बीजेपी से सबसे पहले स्वाभाविक दावेदार हैं सुरेंद्र पटवा, दूसरे नंबर पर बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष विपिन भार्गव जो 2016 के मंडीदीप नगरपालिका चुनाव में निर्दलीय चुनाव लड़े थे जिनकी वजह से मंत्री सुरेंद्र पटवा के सबसे करीबी बीजेपी प्रत्याशी राजेंद्र अग्रवाल चुनाव हार गए थे| संगठन में उनकी अच्छी पहुँच मानी जाती है और क्षेत्र के पुराने नेता और बड़े वोटबैंक पर उनका असर है| वहीं तीसरा नाम मंडीदीप के स्थानीय नेता और केंद्र में संगठन के काम करने वाले गणेश मालवीय जो आजकल भोजपुर में सक्रिय हैं| वहीं चौथे दावेदार हैं केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के करीबी माने जाने वाले वर्तमान में बीजेपी  प्रदेश प्रवक्ता कृष्ण गोपाल पाठक जो कि भोजपुर ओबेदुल्लागंज के स्थानीय निवासी हैं।  यह सभी बीजेपी के नेता इस विधानसभा चुनाव के लिए दावेदारी पेश कर रहे हैं और चुनाव से पहले भोजपुर क्षेत्र में सक्रिय हैं| 


कांग्रेस में भी दावेदारों की लम्बी सूची  

कभी कांग्रेस के कब्जे में रही भोजपुर सीट को फिर हासिल करने के लिए कांग्रेसियों ने भी कमर कस ली है| हालांकि कई दावेदार मैदान में हैं, लेकिन टिकट वितरण के बाद गुटबाजी और भितरघात के खतरे को भांपते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी आपसी समन्वय बैठा रहे हैं|  वहीं भोजपुर से कांग्रेस के दावेदारों में सबसे पहला नाम इस बार भी सुरेश पचौरी का ही है, हालांकि 2013 के विधानसभा चुनाव में पचोरी 20149 वोटों के बड़े अंतर से हारे थे। दूसरे नंबर पर कांग्रेस के एक और वरिष्ठ नेता पूर्व मंत्री राजकुमार पटेल का नाम चर्चा में है, क्षेत्र में उनकी सक्रियता बनी हुई है|  तीसरे दावेदार पूर्व विधायक राजेश पटेल और चौथा और आखरी नाम बद्री सिंह चौहान जो वर्तमान में मंडीदीप के नगर पालिका अध्यक्ष है और टिकट के लिए बड़े नेताओं से हमेशा संपर्क में रहते हैं।


विकास में पीछे, शिक्षा, स्वास्थ्य, बेरोजगारी बड़ा मुद्दा   

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के सबसे नजदीक और प्रदेश की राजनीति में दबदबा रखने वाले नेताओं की यह सीट विकास के मामले में पिछड़ी हुई है, पहले मुख्यमंत्री और फिर मंत्री देने वाली इस सीट पर विकास उम्मीद के अनुसार नहीं हुआ| क्षेत्र में सड़क, बेरोजगारी, स्वास्थ्य व्यवस्था, बड़ा मुद्दा है यहां पर कानून व्यवस्था के सुस्त रवैया के चलते महिलाएं परेशान हैं| भोजपुर विधानसभा क्षेत्र में प्रदेश का सबसे बड़ा इंडस्ट्रीज एरिया मंडीदीप होने के बावजूद भी यहां के लोग और युवा आज भी बेरोजगार हैं और कई गांवों में तो मूल भूत सुविधाओं तक का टोटा है| सड़कों की अगर बात की जाए तो जहाँ शहरी क्षेत्र में गड्ढे दार सड़के हैं तो वहीं दूसरी ओर कई जगह ग्रामीण क्षेत्रों में कीचड़ से सनी हुई सड़कें देखी जा रही है| क्षेत्र में बिजली और पानी की समस्या बड़ा मुद्दा है, साथ ही यहा अस्पताल तो हैं लेकिन अस्पतालों में संसाधनों और डॉक्टरों की कमी के कारण यहा के मरीजों का इलाज नहीं हो पाता आलम यह रहता है कि मरीजों को राजधानी भोपाल रेफर किया जाता है | क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था भी ठीक नहीं है, भोजपुर क्षेत्र के कई स्कूल जर्जर हालत में बने हुए हैं। 


क्या कहती है भोजपुर की सियासत, ऐसा है इतिहास 

राजधानी भोपाल से लगे भोजपुर विधानसभा के इस क्षेत्र में मंडीदीप,ओबेदुल्लागंज, गोहरगंज ,सुल्तानपुर से लेकर बाड़ी बड़े नगर हैं| लगभग सवा दो लाख मतदाताओं वाली इस विधानसभा मे 300 गांव आते हैं। भोजपुर विधानसभा सीट कभी कांग्रेस का गढ़ हुआ करती थी| 1967 में अस्तित्व में आई इस विधानसभा पर पहली बार के चुनाव में जनता ने कांग्रेस प्रत्याशी गुलाबचंद को जीत का तिलक लगाकर भोजपुर का पहला विधायक बनाया, गुलाबचंद यहां से दो बार जनता द्वारा चुने गए और 10 साल विधायक रहे।  इसके बाद भोजपुर विधानसभा की सीट पर पटवा परिवार का कब्जा हो गया, 1985 से 1998 तक सुंदरलाल पटवा ने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया, इसके बाद उनके भतीजे सुरेंद्र पटवा भोजपुर की इस सीट के उत्तराधिकारी हुए और बीजेपी के टिकट पर 2003 में यहां से चुनाव लड़े लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी राजेश पटेल से सुरेंद्र पटवा हार गए | 2003 के विधानसभा चुनाव में जहां राजेश पटेल को 56681 वोट मिले वहीं सुरेंद्र पटवा को 53328 वोट मिले, सुरेंद्र पटवा यहा राजेश पटेल से 3353 वोटों से हार गए| वही 2008 में सुरेंद्र पटवा ने राजेश पटेल को चुनाव में मात देकर पुरानी हार का बदला पूरा कर लिया| 2008 में जहां सुरेंद्र पटवा को 42960 वोट मिले वही राजेश पटेल को 29294 वोट मिले यहा राजेश पटेल मंत्री सुरेंद्र पटवा से 13666 वोटों से हार गए| 2013 में बीजेपी ने एक बार फिर सुरेंद्र पटवा को टिकट दिया जहां पर सुरेंद्र पटवा ने कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचोरी को शिकस्त देते हुए बड़े अंतर से जीत हासिल की| 2013 के विधानसभा चुनाव में सुरेंद्र पटवा को 80491 वोट मिले वही सुरेश पचोरी को 60342 वोट मिले सुरेंद्र पटवा ने सुरेश पचोरी को 20149 वोटों के बड़े अंतर से हरा दिया।