'एनेक्सी' से चलेगी नई सरकार, 615 करोड़ का भवन, 100 करोड़ का CM सचिवालय

भोपाल। प्रदेश में सरकार किसी भी दल की बन जाए, लेकिन अब संचालन 615 करोड़ के नए भवन से ही होगा। मुख्यमंत्री समेत विभागों के मंत्रियों के कक्ष पूरी तरह से तैयार है। विभाग भी शिफ्ट हो चुके हैं। नई सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री समेत मंत्रियों को अपने अत्याधुनिक कक्षों में बैठकर काम शुरू ही करना है। 

मप्र में सबसे महंगी बिल्डिंग की पांचवीं मंजिल के एक भव्य कक्ष में रखी सिंहासननुमा कुर्सी को नए मुख्यमंत्री का इंतजार है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बड़े अरमानों से यह भवन बनवाया है। लगभग 100 करोड़ की लागत से मुख्यमंत्री सचिवालय भी उनके सपनों जैसा तैयार किया गया है। मुख्यमंत्री के कक्ष की सजावट पर एक करोड़ से ज्यादा खर्च हुआ है, लेकिन लाख टके का सवाल यह है कि इस भव्य भवन का उद्घाटन किस मुख्यमंत्री के हाथों से होगा और नई कुर्सी पर कौन मुख्यमंत्री बैठेगा। 


शिवराज ने लिया एनेक्सी बनाने का फैसला

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने बीते कार्यकाल में भोपाल के मंत्रालय भवन में अति आधुनिक एनेक्सी बनाने का निर्णय लिया। 615 करोड़ की लागत से लगभग 40 हजार स्क्वेयर फीड में  पांच मंजिल बनी इस एनेक्सी  में जिस तरह का मुख्यमंत्री सचिवालय तैयार किया गया है वह शायद पूरे देश में  नहीं होगा। पूरी पांचवीं मंजिल के 40 हजार वर्गफीट में सीएम सचिवालय बनाया गया है। इसमें सीएम कक्ष के बगल में मीटिंग रूम है। पांच हजार वर्गफीट ओपन ऐरिया है। 50 मीटर की लाबी है जिसमें सीएम सचिवालय के अधिकारी बैठ सकेंगे। कैबिनेट की बैठक के लिए हाईटेक हाल बनाया गया है।  जिसमें ई-कैबिनेट की व्यवस्था की गई है। बड़े-बड़े प्रोजेक्टर लगाए गए हैं। हॉल में 200 लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है। 


आचार संहिता की वजह से नहीं गए शिवराज

मुख्यमंत्री की नई कुर्सी और नया कार्यालय तैयार है। चुनाव आचार संहिता के कारण शिवराज सिंह चौहान न तो इसका उद्घाटन कर सके और न ही नई कुर्सी पर एक मिनिट के लिए बैठ सके। अब शिवराज सिंह को इस कुर्सी पर बैठने के लिए चुनाव परिणाम का इंतजार करना होगा। यदि परिणाम उनके पक्ष में हुए तो वे इस भवन और अपने कार्यालय का उद्घाटन एक साथ करेंगे। परिणाम विपरीत हुए तो शिवराज सिंह चौहान का इस नए भवन के भव्य कार्यालय की सिंहासननुमा कुर्सी पर बैठने का सपना अधूरा रह जाएगा। भवन उन्होंने बनाया और उसका आनंद कोई और लेगा। 


एक फ्लोर पर पूरा मंत्रालय 

एनेक्सी में इस तरह की बैठक व्यवस्था की गई है कि एक फ्लोर के एक हिस्से में पूरा मंत्रालय है। जहां मंत्री से लेकर प्रमुख सचिव, सचिव, उप सचिव एवं सेक्शन बैठेगा। जबकि पुराने भवन में ज्यादातर विभागों के मंत्री, प्रमुख सचिव एवं सेक्शन अलग-अलग फ्लोर पर थे। नए भवन में लगभग सभी विभाग शिफ्ट हो चुके हैं, जो विभाग अभी शिफ्ट नहीं हुए, वे नई सरकार के गठन से पहले शिफ्ट हो जाएंगे। 


एनेक्सी में 4 घंटे नहीं बैठ पाए मुख्य सचिव 

मुख्य सचिव बसंत प्रताप सिंह ने भी पिछले महीने अपना कार्यालय एनेक्सी में शिफ्ट कर लिया था। लेकिन वह दिनभर नए कक्ष में नहीं बैठ पाए। महज 4 घंटे के भीतर ही मुख्य सचिव का मन भर गया और वे अगले दिन पुराने भवन में चौथी मंजिल पर स्थित अपने कक्ष में आकर बैठने लगे। मुख्य सचिव के पुराने भवन में वापस आने पर उनका स्टाफ भी पुराने भवन में ही है। 


एनेक्सी एक नजर में 

-भवन निर्माण में 495 करोड़ रुपए खर्चा 

-फर्नीचर और साज-सज्जा पर 120 करोड़ रुपए खर्च

-700 कारों के लिए मल्टी लेविल पार्किंग 

-सभी प्रमुख सचिवों के लिए हाईटेक आफिस और मीटिंग रूम

-भवन को साढ़े तीन साल में बनाकर तैयार किया है। 

-राज्य सरकार का सबसे महंगा भवन

-भवन का निर्माण शापुर जी पालोनी जी कंपनी ने किया है।

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