शिवराज का शायराना अटैक, 'सर्दी-खांसी न मलेरिया हुआ, ये गया यारों इसको रॉफेलेरिया हुआ’

भोपाल| मध्य प्रदेश में लम्बे समय तक सत्ता में रहकर राज करने वाले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सत्ता जाने के बाद भी सुर्ख़ियों में रहते हैं| कभी उनके बयान तो कभी उनकी सक्रियता कांग्रेस खेमे में हलचल मचा रही है, तो वहीं उनके ट्वीट भी सियासत को गरमा देते हैं| एक बार फिर शिवराज ने राफेल को लेकर शायराना अंदाज में ट्वीट किया है, शिवराज के इस ट्वीट को राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं के उन बयानों से जोड़ा जा रहा है, जो कि उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार की आलोचना करने के लिए दिए हैं।  

दरअसल, शुक्रवार को राहुल गांधी भोपाल दौरे पर थे| वे यहां आभार सम्मलेन में शामिल हुए और मंच से भाजपा और मोदी सरकार पर कई मामलों को लेकर हमला बोला| वहीं राफेल को लेकर भी उन्होंने मोदी सरकार पर निशाना साधा| इसके बाद शुक्रवार रात को ही पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शायराना अंदाज में एक ट्वीट किया| उन्होंने लिखा कि सर्दी, खाँसी न मलेरिया हुआ,  ये गया यारों इसको रॉफेलेरिया हुआ!' सोशल मीडिया पर लोग इस ट्वीट का अपने हिसाब से मायने निकाल रहे हैं। वहीं शिवराज के इस ट्वीट को राहुल गांधी के राफेल को लेकर दिए गए बयानों से जोड़ा जा रहा है| 

 गौरतलब है कि देश की राजनीती में राफेल डील को लेकर बवाल मचा हुआ है| अंग्रेजी अखबार 'द हिंदू' ने खुलासा किया है कि फ्रांस सरकार के साथ राफेल डील को लेकर रक्षा मंत्रालय की ओर से की जा रही डील के दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के दखल का फायदा फ्रांस को मिला था| पीएमओ की इस दखल का रक्षा मंत्रालय ने विरोध भी किया था| अब इसी मीडिया रिपोर्ट के आधार पर कांग्रेस ने फिर मोदी सरकार पर निशाना साधा और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीधे तौर इसमें हस्तक्षेप किया था| वहीं राहुल गांधी ने भोपाल दौरे पर भी राफेल को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोला, कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा- संसद में 1.45 मिनट मोदीजी भाषण देते हैं। इसमें मोदी एक मिनट राफेल की बात नहीं करता। रक्षा मंत्रालय का हर आदमी कहता है कि नरेंद्र मोदी चोर। भाषण सुनिए उनके, मैं 56 इंच की छाती वाला, चौकीदार, भ्रष्टाचार को मिटाऊंगा|  इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष ने शुक्रवार को आयोजित प्रेसवार्ता में कहा कि आप रॉबर्ट वाड्रा और चिदंबरम की जांच कीजिए, मगर राफेल पर भी सरकार को जवाब देना चाहिए।  इसके जवाब में रक्षामंत्री ने  लोकसभा में बोलते हुए कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा की ओर से विषयों के बारे में समय-समय पर जानकारी लेना हस्तक्षेप नहीं कहा जा सकता है।



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