वेटिकन सिटी में मदर टेरेसा को आज मिलेगी संत की उपाधि, यह होती है संत घोषित करने की प्रक्रिया

नई दिल्ली| वेटिकन सिटी में रविवार को एक समारोह के दौरान रोमन कैथोलिक चर्च के पोप फ्रांसिस मदर टेरेसा को संत घोषित करेंगे. इस मौके पर दुनियाभर से आए मदर टेरेसा के एक लाख अनुयायी भी मौजूद होंगे| करीब 10 हजार लोग इस मौके पर मौजूद रहेंगे। सुषमा स्वराज 12 लोगों के उस डेलिगेशन को हेड कर रही हैं जो भारत से इस समारोह में पहुंचा है। वेटिकन के लोकल टाइम के मुताबिक सुबह 10.30 पर उपाधि दी जाएगी। उस वक्त भारत में दोपहर के 2 बजे होंगे।\r\n\r\nपश्चिम बंगाल सहित पूरे भारत में लाखों लोग टीवी के जरिए इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनेंगे। मदर टेरेसा की कर्मभूमि कोलकाता में इस अवसर को उत्सव के रूप में मनाया जाएगा। मदर हाउस को सजाया गया है। जगह-जगह मदर के बड़े-बड़े पोस्टर लगाए गए हैं। वहीं, गोवा के पणजी में चर्च में विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।\r\n\r\nराष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मदर टेरेसा को गरीबों का 'मसीहा' और कमजोर लोगों का मददगार बताया और कहा कि रविवार को उन्हें संत की उपाधि दिए जाने से हर भारतीय गौरवान्वित होगा|\r\nवेटिकन सिटी में पोप फ्रांसिस द्वारा संत की उपाधि दिए जाने के कार्यक्रम की पूर्व संध्या पर मुखर्जी ने कहा कि मदर टेरेसा दया की प्रतिमूर्ति थीं. उन्होंने कहा, N'उन्हें अपना पूरा जीवन समाज के सबसे गरीब लोगों की सेवा में लगा दिया. मदर टेरेसा खुद को 'भगवान के हाथ में एक छोटे पेंसिल' की तरह देखती थीं और चुपचाप अपना काम करती रहीं.|\r\n\r\nयह चमत्कार किये \r\n\r\nओडिशा की एक महिला मोनिका बेसरा को पेट का अल्सर था। दावा है कि मिशनरी ऑफ चैरिटी की ननों द्वारा की गई प्रेयर से वो ठीक हो गया था। मोनिका ने कहा था कि उन्हें एक पोट्रेट से चमत्कारिक किरणें निकलती दिखाई दीं थीं। \r\nब्राजील में ब्रेन डिसीज से परेशान एक शख्स की फैमिली ने टेरेसा से प्रार्थना की। ये शख्स भी ठीक हो गया था।\r\n\r\n\r\nसंत मानने की यह प्रक्रिया\r\n\r\nसंत घोषित करने की प्रक्रिया की शुरुआत उस स्थान से होती है, जहां वह रहे या जहां उनका निधन होता है। मदर टेरेसा के मामले में यह जगह है कोलकाता। प्रॉस्ट्यूलेटर प्रमाण और दस्तावेज जुटाते हैं और संत के दर्जे की सिफारिश करते हुए वेटिकन कांग्रेगेशन तक पहुंचाते हैं। कांग्रेगेशन के विशेषज्ञों के सहमत होने पर इस मामले को पोप तक पहुंचाया जाता है। वे ही उम्मीदवार के ‘नायक जैसे गुणों’ के आधार पर फैसला लेते हैं। अगर प्रॉस्ट्यूलेटर को लगता है कि उम्मीदवार की प्रार्थना पर कोई रोगी ठीक हुआ है और उसके भले चंगे होने के पीछे कोई चिकित्सीय कारण नहीं मिलता है तो यह मामला कांग्रेगेशन के पास संभावित चमत्कार के तौर पर पहुंचाया जाता है जिसे धन्य माने जाने की जरूरत होती है। संत घोषित किए जाने की प्रक्रिया का यह पहला पड़ाव है।\r\nचकित्सकों के पैनल, धर्मशास्त्रीयों, बिशप और चर्च के प्रमुख INSERT INTO [dbo].[wp_posts] VALUES (कार्डिनल) को यह प्रमाणित करना होता है कि रोग का निदान अचानक, पूरी तरह से और दीर्घकालिक हुआ है और संत दर्जे के उम्मीदवार की प्रार्थना के कारण हुआ है। इससे सहमत होने पर कांग्रेगशन इस मामले को पोप तक पहुंचाता है और वे फैसला लेते हैं कि उम्मीदवार को संत घोषित किया जाना चाहिए। हालांकि संत घोषित किए जाने के लिए दूसरा चमत्कार भी जरूरी होता है। संत घोषित करने की प्रक्रिया की आलोचना भी होती है क्योंकि इसे खर्चीला, गोपनीय माना जाता है। यह भी माना जाता है कि इसका दुरुपयोग हो सकता है। राजनीति, वित्तीय और आध्यात्म क्षेत्र के दबाव के चलते किसी एक उम्मीदवार को कम समय में संत का दर्जा मिल सकता है जबकि कोई और सदियों तक इसके इंतजार में रहना पड़ सकता है।

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