फ्रेंडशिप डे पर ख़ास: ख़ुशी का दूसरा नाम है दोस्ती, जानिए क्यों मनाया जाता है यह दिन, क्या है इसके पीछे का इतिहास

फ्रेंडशिप डे पर ख़ास:  फ्रेंडशिप डे मतलब दोस्तों का त्यौहार,   दोस्तों के साथ समय बिताना और खुश रहना, मस्ती करना और पुराने दिनों को याद कर एक दूसरे को गुदगुदाना| दोस्ती जिसका अहसास सबसे अलग हैं, अपने दोस्त की हर बात को बिना कहे समझना, बिना बोले उसे सबकुछ पता चल जाना| यह अहसास सिर्फ एक ही रिश्ते में हो सकता है और वो है दोस्ती | दोस्ती का रिश्ता सबसे अनोखा रिश्ता होता है जिसकी गहराई दूसरे रिश्तो से भी ज्यादा होती है| अपने सच्चे दोस्त के साथ बिना किसी स्वार्थ के हर दम खड़े रहना दोस्त के दुःख में दुखी और सुख में खुश रहना यही दोस्ती की असली जड़ होती है | खून के रिश्ते हमें परिवार में मिलते हैं, लेकिन दोस्ती भगवान का दिया हुआ वह खूबसूरत वरदान व तोहफा है जो सभी रिश्तों की बुनियाद बन जाता है। दोस्ती वह रिश्ता है जो आप खुद तय करते हैं, जबकि बाकी सारे रिश्ते आपको बने-बनाये मिलते हैं। जरा सोचिए कि एक दिन अगर आप अपने दोस्तों से नहीं मिलते हैं, तो कितने बेचैन हो जाते हैं और मौका मिलते ही उसकी खैरियत जानने की कोशिश करते हैं। आप समझ सकते हैं कि यह रिश्ता कितना ख़ास है। दोस्ती के लिए मनाये जाना वाला यह त्यौहार भले ही ज्यादा पुराण ना हो पर दोस्ती तो युगों पुराणी चली आ रही है| हर युग में दोस्ती को एक अलग तरह का रिश्ता ही माना गया है| अब चाहे महाभारत के ज़माने की बात हो या रामायण की| दोस्ती ने हमेशा अपना कर्तव्य सदा निभाया है| आज जिस तकनीकी युग में हम जी रहे हैं, उसने लोगों को एक- दूसरे से काफी क़रीब ला दिया है। लेकिन साथ ही साथ इसी तकनीक ने हमसे सुकून का वह समय छीन लिया है जो हम आपस में बांट सकें। आज हमने पूरी दुनिया को तो मुट्ठी में कैद कर लिया है, लेकिन इसके साथ ही हम खुद में इतने मशगूल हो गये हैं कि एक तरह से सारी दुनिया से कट से गये हैं।\n\nफ्रेंडशिप डे का इतिहास\n\nदोस्ती के प्रतीक के रूप में जाने वाले इस दिन की शुरुआत सन् 1919 में हुई, जिसका श्रेय हॉलमार्क कार्डस के संस्थापक जॉएस हॉल को जाता है। लोग उन दिनों अपने दोस्तों को फ्रेंडशिप डे कार्ड भेजा करते थे। उन दिनों से शुरू हुआ यह सिलसिला बदस्तूर आज भी जारी है। अगस्त के पहले रविवार को यह ख़ास दिन मनाने के पीछे वजह यह थी कि अमेरिकी देशों में यह समय ऐसा होता है, जब दूर-दूर तक किसी पर्व-त्योहार की छुट्टी नहीं होती। सन् 1958 के 30 जुलाई को औपचारिक रूप से अंतरराष्ट्रीय फ्रेंडशिप डे INSERT INTO [dbo].[wp_posts] VALUES (विश्व मैत्री दिवस) की घोषणा की गई थी। बताया जाता है कि डाक्टर अर्टरमिओ ने अपने दोस्त ब्राचो के साथ पैरागुए नदी के पास रात्रि भोजन किया था। पहली बार पैरागुए में ही इस दिन को मनाया गया था। दक्षिण अमेरिकी देशों में सबसे पहले इस दिन को उत्सव के रूप में मनाने की शुरुआत हुई थी। भारत में अगस्त के पहले रविवार को फ्रेंडशिप डे मनाया जाता है, लेकिन दक्षिण अमेरिकी देशों में जुलाई महीने को काफी पावन माना जाता है, इसलिए जुलाई के अंत में ही इस दिन को मनाया जाता है। बांग्लादेश व मलेशिया में डिजिटल कम्यूनिकेशंस के तहत यह दिन ज्यादा चर्चित हो गया है। यूनाइटेड नेशंस ने भी इस दिन पर अपनी मुहर लगा दी थी। हालांकि, दोस्ती का यह त्योहार दुनियाभर में अलग-अलग तिथियों को मनाया जाता है, लेकिन इसके पीछे की भावना हर जगह एक ही है - दोस्ती का सम्मान। दक्षिण अमेरिकी देशों से शुरू हुआ यह त्योहार उरुग्वे, अर्जेटीना, ब्राजील में 20 जुलाई को, पराग्वे में 30 जुलाई को, जबकि भारत, मलेशिया, बांग्लादेश आदि दक्षिण एशियाई देशों सहित दुनियाभर के बाकी देशों में यह अगस्त महीने के पहलेरविवार को मनाया जाता है।\n\nक्या होता इस दिन\n\nइस दिन दोस्त एक दूसरे को गिफ्टस, कार्ड देते है। एक-दूसरे को फ्रेंडशिप बैंड बांधते है। दोस्तों के साथ पूरा दिन बीता कर अपनी दोस्ती को आगे तक ले जाने व किसी भी मुसीबत में एक दूसरे का साथ देने का वादा करते हैं। हालांकि जिनके पास गिफ्टस व कार्ड देने की क्षमता नहीं है, वह अपने प्यार के एहसास से ही दोस्त को दोस्ती का महत्व समझा देते हैं। पहले इस दिन को कुछ चुनिंदा देशों में कुछ चुनिंदा लोगों में ही मनाने का दस्तूर था, लेकिन इन दिनों सोशल नेटवर्किग साइट्स की बढ़ते पायदान की वजह से लोगों में यह दिन काफी चर्चित हो गया है।\n\nफ्रेंडशिप डे पर शुरू में ग्रीटिंग कार्डस के लेन-देन से शुरू हुए इस सिलसिले ने गिफ्ट्स से लेकर फ्रेंडशिप बैंड को अपनी परंपरा में शामिल किया है। आज तकनीकी क्रांति और सोशल नेटवर्किग साइट्स के जमाने में दोस्त और दोस्ती के प्रति अपनी भावना व्यक्त करने का यह अवसर, दुनियाभर में दिन-प्रतिदिन लोकप्रिय हो रहा है।\n\nलोगों के बीच रंग, जाति, धर्म जैसी बाधाओं को तोड़कर आपस में दोस्ती और परस्पर सौहाद्र बढ़ाने का संदेश देने वाले इस अनूठे त्योहार के सम्मान में, वर्ष 1998 में संयुक्त राष्ट्र के तत्कालीन महासचिव कोफी अन्नान की पत्नी, नाने अन्नान ने प्रसिद्ध कार्टून कैरेक्टर विन्नी द पूह को दोस्ती के लिए संयुक्त राष्ट्र में दुनिया का राजदूत घोषित किया।\n
दोस्ती के लिए लिखी गयीं यह कुछ लाइन जो बताती है इस रिश्ते कि पहचान  \n\n\n"दोस्ती नाम है सुख दुःख का,\nदोस्ती राज़ है मुस्कुराने का,\nये कोई पल दो पल का नाम नहीं,\nदोस्ती फ़र्ज़ है उम्र भर निभाने का"\n\n\n

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