पदोन्नति के इंतज़ार में रिटायर हो गए 2500 कर्मचारी, अब 1500 को सुप्रीम कोर्ट से उम्मीद

भोपाल। मध्य प्रदेश में अधिकारी-कर्मचारी प्रोमोशन में देरी से परेशान हैं, जबकि पिछले पांच माह में बगैर पदोन्नति के ढाई हजार अधिकारी-कर्मचारी रिटायर हो गए हैं| ऐसी स्थिति में लगभग डेढ़ हजार कर्मचारियों को अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार हैं। इन्हें मार्च 2017 तक रिटायर होना है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले पदोन्न्ति की औपचारिकताएं पूरी कराने को लेकर बेचैन हैं, ताकि रिटायरमेंट के ठीक पहले उन्हें प्रमोशन मिल जाए।\r\n\r\nदरअसल, पदोन्नति में आरक्षण को लेकर हाई कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए 30 अप्रैल को 'मप्र लोक सेवा INSERT INTO [dbo].[wp_posts] VALUES (पदोन्नति) नियम 2002' खारिज कर दिया है। तब तक विभिन्न् विभागों की पदोन्नति समितियां करीब ढाई हजार अधिकारियों-कर्मचारियों को पदोन्नति देने की अनुशंसा कर चुकी थीं, लेकिन विभागों ने पदोन्नति आदेश जारी नहीं किए थे। हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद विभागों ने आदेश तो जारी किए, लेकिन उन्हें मान्य नहीं किया गया। ऐसे में कर्मचारी बगैर पदोन्नति के रिटायर हो गए।\r\n\r\nअब जो कर्मचारी अभी रिटायर नहीं हुए हैं उनके साथ भी ऐसी ही स्थिति बन रही है| सुप्रीम कोर्ट इस मामले में 8 नवंबर को फैसला सुनाएगा। इसके बाद सरकार निर्णय लेगी और पदोन्नति नियम बनाए जाएंगे। इस पूरी प्रक्रिया में तीन से चार माह गुजरने की संभावना है। इसके बाद नए नियमों के तहत डीपीसी और फिर पदोन्नति आदेश जारी होने में दो माह से ज्यादा समय लग सकता है। कर्मचारी संभावित प्रक्रिया को लेकर काफी परेशान हैं। उनका कहना है कि ऐसा हुआ, तो ये डेढ़ हजार कर्मचारी भी बगैर पदोन्नति के ही रिटायर हो जाएंगे। पदोन्न्ति में आरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले सरकार पदोन्न्ति की तैयारी कर ले। यह मांग कर्मचारी सामान्य प्रशासन विभाग के अफसरों के सामने रख चुके हैं। कर्मचारियों का कहना है कि इससे कोर्ट का फैसला आने के बाद पदोन्नति की कार्यवाही में कम समय लगेगा। हालांकि सामान्य प्रशासन विभाग के अफसरों को फैसले का इंतजार है। वे कहते हैं कि कोर्ट जो फैसला सुनाएगा, उसी के हिसाब से तैयारी होगी।\r\n

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