एट्रोसिटी एक्ट के सवाल पर क्यों मुंह फेर गए शिवराज, देखिये वीडियो

होशंगाबाद। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का एट्रोसिटी एक्ट को लेकर दिया गया बयान अब उन्ही के गले पड़ गया है, और अब वो इस बारे में बोलने से बचते नजर आ रहे हैं। शुक्रवार देर रात पिपरिया पहंचे सीएम से जब एससी एसटी एक्ट पर दिए गए बयान पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने मुंह फेर लिया। पत्रकारों ने उनसे पूछा था कि संसद द्वारा किए गए संशोधन के बाद वह प्रदेश में उनके द्वारा किए गए ऐलान पर किस तरह अमली जामा पहनाएंगे। लेकिन सवाल पर सीएम खामोशी साध गए और मुँह फेरते हुए आगे निकल गए।

दरअसल, एट्रोसिटी एक्ट के खिलाफ बढ़ते आक्रोश को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज ने बड़ा ऐलान दिया था, उन्होंने कहा था कि प्रदेश में इस कानून के तहत बिना किसी जांच के गिरफ्तारी नहीं होने देंगे। उनके इस बयान के बाद राजनीति तेज हो गई। मामला दिल्ली तक पहुंचा और हड़कंप मच गया। राजनीति के जानकारों ने शिवराज के इस दांव को एक बड़ी सियासी चाल बताया। उनका मानना है कि नाराज सवर्णों को अपनी ओर करने के लिए सीएम ने ऐलान किया। लेकिन ये महज कोरी घोषणा साबित होगी क्योंकि जबतक कानून में संशोधन नहीं किया जाएगा तब तक कोई भी घोषणा करने से असर नहीं होगा। वहीं संसद में पारित कानून को राज्य सरकार कैसे बदल सकती है। 

गौरतलब है कि  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को एक बड़ी घोषणा की। CM शिवराज ने ट्वीट करके कहा कि मध्य प्रदेश में एट्रोसिटी एक्ट का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा और बिना जांच किए किसी की गिरफ्तारी नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री का यह बयान सुप्रीम कोर्ट के एक्ट्रोसिटी एक्ट में किए गए इस प्रावधान से मेल खाता है जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था की थी कि मामला दर्ज करने के बाद बिना जांच की गिरफ्तारी नहीं की जाएगी। इस प्रावधान को बाद में संसद में बदल दिया गया था और मामला दर्ज होते ही गिरफ्तारी करने की व्यवस्था पुनः लागू कर दी गई थी। संसद के द्वारा किए गए प्रावधानों के बाद इस एक्ट का विरोध पूरे देश और प्रदेश में होने लगा।


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