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असम की तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी बने NRC : कैलाश विजयवर्गीय

इंदौर। इन दिनों देश में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लेकर जमकर विवाद चल रहा है। इसी बीच असम के बाद मप्र में भी एनआरसी की मांग जोर पकड़ने लगी है। भारत रक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक  सूर्यकांत केलकर के बाद भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने भी मप्र में एनआरसी लागू करने की मांग की है।उनका कहना है कि असम की तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी एनआरसी बनाया जाए और घुसपैठियों को यहां से खदेड़ा जाए।उन्होंने दावा किया है कि अकेले पश्चिम बंगाल में करीब दो करोड़ बांग्लादेशी अवैध तौर पर प्रवास कर रहे हैं।

दरअसल, सोमवार को मीडिया से चर्चा के दौरान विजयवर्गीय ने कहा कि असम की तर्ज पर मध्यप्रदेश में भी एनआरसी लागू कर सूबे से घुसपैठियों को खदेड़ने का अभियान शुरू किया जाना चाहिये।उन्होंने कहा कि ये उनके निजी विचार है। मेरा मानना है कि नवंबर मे होने वाले विधानसभा चुनावों के लिये  तैयार किए जा रहे बीजेपी के घोषणापत्र में भी शामिल किया जाना चाहिये।

इतना ही नही उन्होंने आगे कहा कि उन्हें इंदौर के एक मुस्लिम युवक ने जानकारी दी है, कि शहर की एक बस्ती में चार-पांच हजार बांग्लादेशी रहते हैं जो मकान बनाने जैसे काम करते हैं।इसके कारण देश में रोजगार के अवसरों और संसाधनों पर अनावश्यक दबाव पड़ रहा है।ये लोगो  नकली नोटों और अवैध हथियारों की तस्करी जैसी आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रहे है। आने वाले समय में इससे देश की आंतरिक सुरक्षा के सामने गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। मैं इस बारे में जांच के लिये शहर के आला अधिकारियों से चर्चा करूंगा। 

वही उन्होंने कांग्रेस द्वारा इसका विरोध किए जाने पर कहा कि कांग्रेस को देश की नहीं, बल्कि अपने वोट बैंक की चिंता है। जो पार्टियां एनआरसी के पक्ष में खड़ी नहीं हो रही हैं, मैं उन्हें देशद्रोही तो नहीं कहूंगा. लेकिन मैं इन दलों को देश के प्रति गैर जवाबदार जरूर कहूंगा।

गौरतलब है किृ असम का राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (National Register of Citizens or NRC) को लेकर सड़क से लेकर संसद तक चर्चा हो रही है। NRC की सूची के मुताबिक 3.39 करोड़ में से 2.89 करोड़ लोगों को नागरिकता के लिए योग्य पाया गया। इसका मतलब ये हुआ कि 40 लाख लोगों के नाम इस लिस्ट में नहीं हैं। केंद्र सरकार कह रही है कि यह अंतिम सूची नहीं है और जिन लोगों के नाम इसमें शामिल नहीं हैं उन्हें आगे भी मौका मिलेगा। पिछले साल 31 दिसंबर को NRC की पहली लिस्ट जारी की गई थी। इसमें कुल 1.90 करोड़ लोगों के नाम थे।जिसको लेकर अब देशभऱ में विवाद हो रहा है।


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