यहां दांव पर बीजेपी की साख, कांग्रेस ने दी कड़ी चुनौती, नतीजों पर टिकी नजर

 जबलपुर|  लोकसभा चुनाव की रणभूमि मे जंग किसने जीती इसका फैसला 23 तारीख को होने वाला है। जनता ने किसका चयन किया है इसको लेकर कयासो का दौर जारी है | जबलपुर लोकसभा सीट से जीत की हैट्रिक लगा चुके भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह चौथी बार अपनी किस्मत आज़मा रहे है। वही उनके सामने चुनौती दे रहे राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने मज़बूत दावेदारी पेश की है। जबलपुर लोकसभा सीट से वो कौन से पहलू है जो तय करेंगे जीत या हार का अंतर देखिए इस खास रिपोर्ट मे। 

जबलपुर लोकसभा सीट कहने को महाकौशल की राजनीती का केन्द्र बिंदू मानी जाती है। बीते कुछ समय से बदले समीकरणो ने एक बार फिर महाकौशल को उसकी राजनैतिक महत्वता वापस मिली है। जबलपुर लोकसभा सीट से दो कददावर चेहरो की साख इस बार दांव पर लगी हुई है। एक ओर बीजेपी से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह तो वही कांग्रेस से राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा अपनी किस्मत आज़मा रहे है। कहने को राकेश सिंह इस सीट से बीते तीन चुनाव मे जीत हासिल कर चुके है, आंकड़ो के तहत हर बार मतदान के प्रतिशत मे राकेश सिंह ने हाफ सेंचुरी लगाई।

 -2009 मे राकेश सिंह ने 54.29 प्रतिषत मत हासिल किए थे 

-कांग्रेस के रामेष्वर नीखरा को हराकर 106003 वोटो से जीत हासिल की 

-2014 मे राकेश सिंह ने 56.78 प्रतिषत वोट हासिल किए 

-इस चुनाव मे उन्होने कांग्रेस के विवेक तन्खा को 208639 मतो से हराया 

इस बार 2019 के लोकसभा चुनाव मे भाजपा भले ही चैथी बार जीत का दावा कर रही हो लेकिन कांग्रेस भी एंटी एंकमबेंसी का हवाला देते हुए भाजपा प्रत्याशी की हार का दम्भ भरती है। 8 विधानसभा सीटो मे बटी जबलपुर लोकसभा सीट मे 4 पर कांग्रेस तो 4 पर भाजपा का कब्ज़ा है। जबलपुर से आने वाले दो विधायक वर्तमान सरकार मे कैबिनेट मंत्री का दर्जा पाए हुए है ऐसे मे कांग्रेस ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।

सियासी दावो को छोड़ अगर जमीनी समीकरणो को पकड़े तो जबलपुर मे 8 विधानसभा सीटो मे से 3 विधानसभा सीटें जीत हार तय करने वाली है। 29 अप्रैल को हुए मतदान के चलते जबलपुर सीट पर कुल 69.38 प्रतिशत मतदान हुआ था । मतदान प्रक्रिया मे सबसे अधिक वोटिंग सिहोरा विधानसभा सीट पर 74.79 प्रतिशत , बरगी विधानसभा से 72.79 प्रतिशत और पाटन विधानसभा मे 72.04 प्रतिषत हुई थी। जबलपुर से राजनैतिक इतिहास को देखे तो 8 विधानसभाओ मे से पूर्व विधानसभा सीट कांग्रेस के लिए सबसे मज़बूत मानी जाती है । सबसे अधिक मुस्लिम वोटर्स इसी विधानसभा से आते है जबकि कैंट विधानसभा बीजेपी का मज़बूत गढ़ है। बची 6 विधानसभा सीटो मे उत्तर मध्य, पष्चिम और पनागर पर दोनो ही पार्टियो के पक्ष मे कड़ी टक्कर देखी जा रही है या फिर यूं कह लें कि यहाॅ बराबरी का मुकाबला रह सकता है। जबकि जीत हार का फैसला 3 विधानसभा सीटो से होगा जिसमे सिहोरा , बरगी और पाटन सीट शामिल है।

"To get the latest news update download the app"