पानी की तलाश में गांव में घुसे तेंदुए ने ग्रामीणों पर किया अटैक, दो गंभीर घायल

 खण्डवा /पंधाना| सुशील विधानी|  जिला मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थिति और पंधाना तहसील क्षेत्र से मात्र 8 किलोमीटर की दूरी पर बसे ग्राम बड़ौदा अहीर में सुबह के  अपने खेतों में जाते समय दो ग्रामीणों पर अचानक तेंदुए ने घात लगाकर हमला बोल दिया। जिससे वन्य प्राणी के इस अचानक हमले में मोहन पिता प्यार ,गोविन्द पिता मांगीलाल बुरी तरह से ज़ख्मी हो गए।जिन्हें तुरन्त गांव वालों के द्वारा डायल 100 को बुलवाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पंधाना में भर्ती कराया गया।  गांव के लोगो को इकट्ठा होते देख  तेंदुआ अपनी जान बचाने के लिए सड़क पर बने पुलिया के नीचे बंबे (पाइप)में जाकर छुपकर घंटो गिनती बैठ गया। लेकिन जैसे ही ग्रामीणों तेंदुए को नाले के पास छुपा देखा तो ग्रामीणों ने हो हल्ला शुरू कर दिया जिससे घबराकर तुरंत तेंदुआ वहाँ से दौड़ लगाकर नाले में लगे तांबेसर की झाड़ियों के अंदर खोल में जाकर छुप गया।मौके पर पहुंचे पंधाना वन विभाग के पास कोई रेस्क्यू साधन नही होने के कारण शाम 4 बजे तक भी तेंदुआ पकड़ा नही जा सका गया।आखिर इंदौर से रेस्क्यू टीम को बुलवाना ही पड़ा।

ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि पिछले एक माह से देखा जा रहा है कि इलाके में वन्य जीवों आवागमन हो रहा है। जिसका मुख्य कारण पानी और शिकार की तलाश में वन्य प्राणियों का प्रवेश होना स्पष्ट है। ग्रामीणों ने बताया कि आबादी क्षेत्र में उनके द्वारा कई बार जंगली जानवरों को विचरण करते हुए देखा जा रहा था।जिसमें यह तेंदुआ भी आसपास के इलाके में पिछले एक माह से देखा जा रहा था। जिसकी सूचना कई बार ग्रामीणों द्वारा वन विभाग को दे दी गई थी मगर कमजोर एवं  सुस्त वन अमले द्वारा इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।जिसके चलते आज दो लोगो को इसके कोप का भाजन बनना पड़ा।


वन विभाग की बड़ी लापरवाही के चलते ग्रामीणों को होना पड़ रहा है परेशान

ज्ञात हो कि भीषण गर्मी के चलते सभी जंगली जीव जंतुओं को जंगल से निकलकर पानी की तलाश में इधर उधर भटकना पड़ता है और इसके चलते कई बार पानी की तलाश में जंगली जानवर रिहायसी इलाको तक चले आते हैं।जबकि शासन द्वारा वन विभाग को जंगली जानवरों की प्यास बुझाने के लिए जंगलो में छोटे छोटे कंटूर(होद) बनाने के लिए एक बड़ी राशि आवंटित की जाती है जिसे की जिले में बैठे आला अधिकारियों द्वारा उस राशि को डकार लिया जाता है।यदि वन विभाग द्वारा जंगलो में कंटूर बनाकर उसमें पानी भरने की व्यवस्था की गई होती तो इन जंगली जानवरों को अपनी प्यास बुझाने के लिए रिहायसी इलाको में जाने पर मजबूर ना होना पड़े।इन वनाधिकारियो द्वारा कंटूर के रुपयों को वन पशु संरक्षण में ना लगाकर अपनी जेबें गरम करने के कारण आम मासूम ग्रामीणों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। जो कि एक जांच का विषय को ओर अंकित करता है।


इस विषय को लेकर लगातार संबंधित अधिकारियों से उनके सरकारी नम्बरों पर बात करने का प्रयास किया गया लेकिन किसी जवाबदार द्वारा फोन रिसीव करने की जहमत नहीं की गई।