CM के दौरे से पहले वनकर्मियों से मिलने पहुंचे मंत्री शाह, कहा- जल्द होगा समस्या का समाधान

खंडवा । सुशील विधानी।

मप्र वन कर्मचारी संघ द्वारा 19 सूत्रीय मांगों को लेकर  प्रदेशव्यापी हड़ताल प्रारंभ कर दी गई है। खंडवा वन परिक्षेत्र के सभी कर्मचारी  हड़ताल पर चले गए है। गुरुवार के  दिन भी हड़ताल जारी रही जिला कलेक्टर में बैठक लेने के बाद  स्कूली शिक्षा मंत्री  विजय शाह  अचानक  कोर्ट चौराहे पर  चल रही  वन विभाग के  हड़ताल कर्मियों के बीच पहुंच गए  जहां  अचानक  मंत्री को देख  वनकर्मी भी  अचंभित हो गए ।

स्कूली शिक्षा मंत्री ने  वन कर्मियों को आश्वासन दिया कि  जल्द ही आपकी समस्याओं का समाधान किया जाएगा मुख्यमंत्री  कल  खेड़ी में आ रहे हैं  जहां  आपकी समस्याओं को उनके सामने रखा जाएगा  । आपके बीच में ही  एक प्रतिनिधिमंडल  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मिलेगा। मेरी सरकार है, मेरी जिम्मेदारी है, वह हमारे विरोधी नहीं है, हमारे दुश्मन नहीं हैं, करोड़ों रुपए की वन संपदा इनके हवाले हैं।

 उन्होंने मुझे हड़ताल पर नहीं बुलाया था मैं खुद इनके पास चलकर आया हूं इनकी समस्या सुनने मैं इस विभाग का मंत्री भी रहा हूं कई ऐतिहासिक फैसले लिए हैं वन विभाग में मेरा राजनीतिक दायित्व है सामाजिक दायित्व व्यवहारिक दायित्व है मैं उनकी समस्याओं का हल करूंगा मुख्यमंत्री के सामने रखूंगा 5 तारीख को भोपाल में बातचीत होंगी समस्या का हल बातचीत के तरीके से ही हल हो सकता है यह बात स्कूल शिक्षा मंत्री कुंवर विजय शाह ने वन कर्मियों के बीच कहीं

वहीं कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि जब तक मप्र सरकार हमारी मांगे पूरी नहीं करती है तब तक हमारी हड़ताल जारी रहेगी। तमाम कर्मचारियों ने  खंडवा के वन विभाग कार्यालय के बाहर धरना दे दिया है ऐसे में जंगल भगवान भरोसे हो गए हैं।

वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मध्य प्रदेश के तमाम वन विभाग के रेंजर से लेकर जवानों तक अपनी वेतन विसंगतियों को दूर करने की मांग के साथ हड़ताल पर चले गए हैं कर्मचारियों का साफ कहना है कि जब वह काम अन्य सुरक्षा एजेंसियों की तरह करते हैं तो फिर मध्य प्रदेश पुलिस की तरह ही उन्हें वेतन क्यों नहीं दिया जा रहा। कर्मचारी संगठनों ने आर-पार की लड़ाई का मूड बना लिया है अब ऐसे में पूरे प्रदेश में वन कर्मचारी जब हड़ताल पर चले गए हैं वहीं मध्य प्रदेश के तमाम जंगलों में सुरक्षा का जिम्मा विभाग के अधिकारियों पर आ गया है लेकिन क्या वाकई फॉरेस्ट गार्ड से लेकर रेंजर

11 साल बाद भी नहीं हुआ निराकरण

संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि बोरा-मुश्रान समिति ने वेतन विसंगति दूर करने के लिए शासन को सिफारिश की थी लेकिन 11 साल बाद भी कोई निराकरण नहीं हुआ है। इसी तरह ब्रह्मस्वरूप वेतन आयोग ने 5वें और अग्रवाल वेतन आयोग ने छठे वेतनमान को लेकर सिफारिश की थी, जो अब भी अधूरी है।

24 घंटे की ड्यूटी के बाद भी वेतन कम

वनकर्मचारियों का कहना है कि पुलिस कर्मचारी 8-8 घंटे की शिफ्ट में नौकरी करते हैं लेकिन वनरक्षक व वन क्षेत्रपाल 24 घंटे की ड्यूटी दे रहे हैं। इसके बाद भी उन्हें पुलिस के समान वेतनमान के तहत 13 माह का वेतन नहीं दिया जा रहा है।

वर्दी भत्ता भी दे सरकार

वन रक्षक से लेकर मुख्य वन संरक्षक तक के सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को वर्दी (यूनिफाॅर्म) अनिवार्य करने की मांग भी अब तक लंबित है। इसके अलावा वनरक्षकों को नियुक्ति दिनांक से ग्रेड पे 199/5680 देनेे, महाराष्ट्र सरकार की तर्ज पर 5 हजार रुपए वर्दी भत्ता देने सहित अन्य मांगें भी पूरी नहीं की गई है। इन्हीं मांगों को लेकर गुरुवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल की जा रही है।

ये हो सकता है हड़ताल का असर

तेंदूपत्ता खरीदी पर नकारात्मक असर

वन माफिया की सक्रियता बढ़ने से अवैध कटाई बढ़ेगी

वन भूमि पर अतिक्रमण, अवैध उत्खनन के काम हो सकते हैं

तापमान ज्यादा होने से वनों में आगजनी की घटना होती है, रोकने के लिए कर्मचारी न होने से आग से वनों को नुकसान होगा।