इन दो कारणों से उठाया भय्यूजी ने आत्मघाती कदम

भोपाल| आकर्षक ,ग्लैमरस और ओजस्वी व्यक्तित्व के धनी ,राष्ट्रीय संत की उपाधि से विभूषित उदय देशमुख उर्फ भैय्यू जी महाराज का इस तरह आत्महत्या कर लेना कई सवालों को जन्म दे रहा है । पुलिस  तमाम विवेचनाओं के बाद में इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि भैय्यू जी जिस अवसाद में गए उसकी दो प्रमुख वजह थी| 

1) पारिवारिक कलह:  लगभग सवा साल पहले डॉक्टर आरूषि के साथ हुई शादी के लिए भय्यूजी बिल्कुल तैयार नहीं थे। पारिवारिक सूत्रों की माने तो विवाह की बात जैसे ही चली , भैय्यू जी लगातार तनाव में थे और वे ऐसा नही चाहते थे। लेकिन डॉ आरुषि और उसके परिवार की ओर से इस कदर दबाव बढ़ा कि मजबूरी में भय्यूजी  को  विवाह करना पड़ा । इस विवाह के बाद डॉक्टर आरुषि का आश्रम में बढ़ता दवाब और प्रभाव धीरे-धीरे भय्यूजी के अनुयायियों की संख्या कम करता गया ,वहीं दूसरी ओर आरुषि के रिश्तेदारों ने धीरे धीरे कर भय्यू जी के परिवार में अपना प्रभाव जमाना शुरू कर दिया । बेटी कुहू और आरूषि के बीच लगातार बढ़ता विवाद इतना बढा कि आखिर भय्यूजी के सामने अपनी जीवन लीला समाप्त करने के अलावा कोई चारा न था।

2) भय्यूजी का घटता प्रभाव: चार महीने पहले भय्यूजी का एक स्टिंग ऑपरेशन सामने आया था जिसमें वे मुंबई के एक व्यापारी के ऊपर अघोरी क्रिया करते दिखाई दिए थे। कहा जाता है कि इंदौर के ही एक व्यक्ति ने उनका यह स्टिंग करवाया और बाद में यह प्रचारित किया गया कि व्यापारी के साथ अघोरी क्रिया करने के बदले भय्यूजी ने उससे एक मोटी रकम वसूली थी। भय्यू जी का यह अघोरी रूप भी उनके अनुयायियों की संख्या में धीरे-धीरे कमी का कारण बना और इसके चलते भय्यूजी अवसाद में आते चले गए। एक समय यह प्रचारित करने वाले कि देश के दो दो राष्ट्रपति उन्ही यानी भय्यूजी की कृपा दृष्टि से इस पद पर पहुंचे हैं, भैय्यू जी के आश्रम में जब  भीड़ कम होने लगी तो अवसाद आना स्वाभाविक था और यह  अवसाद जिंदगी समाप्त करने का एक बड़ा कारण बन गया| 

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