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भ्रष्टों पर आखिर क्यों इतनी मेहरबानी.?

भोपाल| मध्य प्रदेश का आबकारी विभाग एक बार फिर एक नया कारनामा करने जा रहा है। इंदौर में हुए आबकारी घोटाले के प्रमुख सूत्रधार सहायक आयुक्त संजीव दुबे को विभाग देवास जिले का प्रभार देने जा रहा है। हालांकि इस मामले में अभी जांच पूरी नहीं हुई है और ना ही सरकारी खजाने में पूरी राशि वापस पहुंची है। राजनीतिक हलकों में अच्छा खासा रसूख रखने वाले संजीव पर विभाग की मेहरबानी विधानसभा चुनाव में सरकार के खिलाफ एक और मुद्दा बनेगी, इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता ।लेकिन मंत्री से लेकर संतरी तक सबको अपनी जेब में रखने का ताल ठोक कर दावा करने वाले संजीव की देवास पदस्थापना  के आदेश आज शाम तक जारी होने की पूरी उम्मीद है । हैरत की बात यह है कि सरकार को हुए 41 करोड़ के घाटे में से अभी लगभग 25 करोङ रुपए की वसूली बाकी है ।उसके बावजूद संजीव पर आखिरकार विभाग मेहरबान क्यों है ,इसका कारण समझ से परे है| 

हैरत की बात यह है कि इस पूरे मामले में इंदौर के आबकारी उपायुक्त ने सरकार को एक पत्र लिखकर इस पूरे मामले में सरकार को कितने राजस्व की हानि हुई और यह घोटाला कितने करोड़ का है इसके लिए पुनः जांच करने का निवेदन किया है । ऐसे में यदि आरोपों के घेरे में फंसे संजीव दुबे जैसे अधिकारी की पदस्थापना की जाती है तो यह समझ से परे है|

फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद 41 करोड़ के आबकारी घोटाले में सहायक आयुक्त समेत छह अफसरों को निलंबित कर दिया गया था| जबकि उपायुक्त सहित 20 अफसर व कर्मचारियों के तबादले किए गए थे।  लेकिन पिछले दिनों शराब कारोबारियों के साथ मिलकर कूटरचित दस्तावेजों से शासन को करोड़ों रुपए का चूना लगाने वाले आबकारी विभाग के सहायक आयुक्त संजीव दुबे समेत सभी 6 अधिकारियों-कर्मचारियों को बहाल भी कर दिया था| जिसका जमकर विरोध भी हुआ| लेकिन अब एक बार फिर भ्रष्टों पर मेहरबानी की जा रही है| 


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