आरकेडीएफ मामले में दिग्विजय को बड़ी राहत, EOW ने पेश की खात्मा रिपोर्ट

भोपाल ।

करीब 18  सालों बाद आरकेडीएफ मामले में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को बडी राहत मिली है।ईओडब्ल्यू ने आरकेडीएफ संस्थान को समझौता शुल्क में फायदा पहुंचाकर सरकार को आर्थिक हानि पहुंचाने के मामले  दिग्विजय सिंह को क्लीनचिट दे दी है। ईओडब्ल्यू ने इस केस में खात्मा लगा दिया है।दिग्विजय के साथ पूर्व मंत्री और तत्कालीन तकनीकी शिक्षा मंत्री राजा पटेरिया सहित अन्य लोगों को भी क्लीनचिट दे दी गई है।  

इस केस को खात्मा करने के तीन आधार बताए गए हैं। पहला खात्मे के लिए प्रकरण में आधार बनाया गया है कि तत्कालीन कॉलेज प्राचार्य की मौत हो चुकी है, इसलिए अब उनकी गवाही भी संभव नहीं है।दूसरा जिन 12 विद्यार्थियों को गलत लाभ देने की शिकायत थी, उनकी सूची जांच के दौरान कॉलेज में नहीं पाई गई है। तीसरा आधार यह है कि दिग्विजय सिंह को तत्कालीन सीएम होने के नाते बिजनेस रूल में यह अधिकार था कि वे विद्यार्थियों की फीस घटा या माफ कर सके, इसलिए दिग्विजय और पटेरिया के खिलाफ गलत तरीके से फीस माफ करने के आरोप खारिज कर दिए गए। साथ ही तर्क दिया गया है कि एफआईआर ही गलत हुई थी।  इस मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और तकनीकी शिक्षा मंत्री राजा पटेरिया को भी आरोपी बनाया गया था। 

ये है पूरा मामला

बता दे कि मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित एक निजी शिक्षण संस्थान को लाभ पहुंचाने के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पूर्व मंत्री राजा पटेरिया सहित कई लोगों को ईओडब्ल्यू ने आरोपी बनाया था। आरोप था कि भोपाल स्थित आरकेडीएफ इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी द्वारा शैक्षणिक सत्र 2000-2001 एवं 2001-2002 में अनधिकृत रूप से 12 छात्रों को दाखिला दिया गया। इस पर राज्य के तकनीकी शिक्षा विभाग के नियमानुसार इस संस्थान को 24 लाख रुपये बतौर समझौता शुल्क जमा करना था। ईओडब्ल्यू के अनुसार, आरकेडीएफ एजुकेशन सोसायटी के कार्यकारी अध्यक्ष सुनील कपूर एवं अन्य के साथ आपराधिक षड्यंत्र में शामिल होकर तत्कालीन तकनीकी शिक्षा मंत्री राजा पटैरिया ने प्रस्तावित 24 लाख रुपये के समझौता शुल्क को घटाकर पांच लाख रुपये करने का प्रस्ताव तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को दिया था। बताया गया है कि दिग्विजय ने प्रस्तावित पांच लाख रुपये के समझौता शुल्क में भी ढाई लाख रुपये की कटौती करने का अनुमोदन किया था। इस तरह समझौता शुल्क के तौर पर ली जाने वाली राशि 24 लाख रुपये के बदले इंस्टीट्यूट से सिर्फ ढाई लाख रुपये ही लिए गए। इससे राज्य शासन को साढ़े 21 लाख रुपये का नुकसान हुआ।कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह वर्ष 1993 से 2003 तक मुख्यमंत्री रहे हैं।

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