दिग्विजय ने सीएम से की यह मांग, घिर सकते हैं शिवराज

भोपाल। कैग रिपोर्ट के खुलासे के बाद मध्यप्रदेश में सियासी उबाल आ गया है। लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को बीजेपी पर दबाव बनाने रखने के लिए एक ठोस मुद्दा मिल गया है। जिसके बाद अब कांग्रेस इसे आधार बनाकर भाजपा को घेरने की कोशिश में लगी हुई है। मुख्यमंत्री कमलनाथ और कांग्रेस नेताओं द्वारा लगातार शिवराज सरकार की वित्तीय अनियमितताओं की जांच कराने की बात कही जा रही है। इसी बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कमलनाथ सरकार से समिति बनाकर घोटालों की जांच करने की मांग की है।

दरअसल, कैग ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया है कि शिव 'राज' में प्रदेश में करोड़ों रुपए वित्तीय अनियमितताएं हुई है। शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में वित्त विभाग ने बेहिसाब खर्च किया है।  वाणिज्यिक कर, उत्पाद शुल्क, वाहन कर, स्टॉम्प पंजीकरण शुल्क, खनन, जल कर का घोटाला किया गया, जिसकी वजह से प्रदेश के सरकारी ख़ज़ाने को 6270.37 करोड़ का नुकसान हुआ। हालांकि कैग रिपोर्ट आने के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा है कि रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है, इसमें दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि मप्र सरकार को तत्काल वित्त मंत्री जी की अध्यक्षता में मंत्री मण्डलीय समिति बना कर दोषी लोगों पर कार्रवाई करनी चाहिए। ऐसे में माना जा रहा है कि अगर कमलनाथ सरकार इस मामले की जांच करवाती है तो बड़ा खुलासा होगा और कई मंत्रियों, अधिकारियों और नेताओं पर गाज गिर सकती है। लोकसभा चुनाव के पहले सामने आई यह रिपोर्ट शिवराज समेत पूरी भाजपा पर भारी पड़ सकती है। 


रिपोर्ट के अनुसार, यहां देखें कहां-कितने करोड़ का नुकसान

-शिवराज सरकार के दौरान प्रदेश की पेंच परियोजना में करीब 376 करोड़ की अनियमितता की गयी। इसी तरह सार्वजनिक उपक्रमों से 1224 करोड़ का नुकसान हुआ।

-जनजाति के लिए विद्यालय, छात्रावास के संचालन में 147.44 करोड़ की अनियमितता उजागर की गयी है। निगम-मंडलों पर सरकार इनवेस्ट करती रही लेकिन रिटर्न नहीं मिल पाया। 

-2012 से 2017 के दौरान राज्य के निगम-मंडल लगातार घाटे में रहे। इसमें सरकार को 4 हजार 857 करोड़ का नुकसान हुआ।

-2017 में एक हजार 224 करोड़ का नुकसान हुआ था।

-विदेशी दौरा में 8.96 करोड़ इन्वेस्टमेंट ड्राइव के मद से का खर्च हुआ। वहीं, सरकार ने बजटीय जांच से 8.96 करोड़ का खर्च बचा लिया।

-जल संसाधन विभाग ने उद्योगों, घरेलू कनेक्शन और किसानों से 1627.54 करोड़ रुपए का बकाया नहीं वसूला। 

इसमें उद्योगों पर 506.34 करोड़ रुपए बकाया था। 

-अनूपपुर में ओरिएंट पेपर मिल, अमलाई पर जून 1998 से मार्च 2018 तक वसूली के लिए 771.06 करोड़ रुपए बकाया था। 

इस संबंध में उच्च न्यायालय ने उसकी याचिका भी खारिज कर दी, इसके बावजूद यह राशि नहीं वसूली गई।

-अलग-अलग अनाजों से शराब उत्पादन के मानदंड निर्धारित नहीं होने या निम्न मानदंड होने से सरकार को 1192.12 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। 

-देशी शराब के ठेकों में केवल प्रदेश के डिस्टलरी वालों को भाग लेने की अनुमति देने से प्रतिस्पर्धा कम हुई और उन्होंने सिंडीकेट बना लिया। इससे उनको 653.08 करोड़ रुपए का अनुचित लाभ पहुंचा।

-शराब परिवहन के शुल्क निर्धारण में गड़बड़ी के कारण एक वर्ग को अनुचित फायदा पहुंचा और सरकार को 100.62 करोड़ रुपए की हानि हुई। 




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