चुनाव में अकेले पड़े दो पूर्व प्रदेशाध्यक्ष, टिकट में न नंदकुमार की चली, न अरुण की

भोपाल। छह महीने पहले तक दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों की कमान संभाल रहे नेता विधानसभा चुनाव में पूरी तरह से हासिए पर चले गए हैं। भाजपा में न तो पूर्व प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमार चौहान की चली और न ही कांग्रेस में अरुण यादव की ज्यादा पूछ परख रही। दोनों दलों ने पूर्व प्रदेशाध्यक्षों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया है। यही वजह है कि नंदकुमान चौहान ने समर्थकों के माध्यम से अपनी पीड़ा व्यक्त की थी। 

विधानसभा चुनाव में नंदकुमार सिंह चौहान खुद मांधाता सीट से चुनाव लडऩे की तैयारी में थे, लेकिन पार्टी ने चौहान की हसरत पूरी नहीं होने दी। यहां से नरेन्द्र सिंह तोमर को चुनाव मैदान में उतारकर नंदकुमार चौहान को तगड़ा झटका दे दिया है। खास बात यह है कि निमाड़ में नंदकुमार सिंह चौहन के समर्थकों को भी टिकट नहीं दिए गए हैं। जिससे नंदकुमार चौहान खुद अपेक्षित मान रहे हैं। चौहान की इसी घुटन का फायदा उठाकर तथाकथित राजनीतिक विरोधियों ने उनके नाम से एक पत्र सोशल मीडिया पर वायरल किया। इस पत्र को लेकर नंदकुमार पुलिस में शिकायत दर्ज करा चुके हैं। 

इधर कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव भी चुनाव से पूरी तरह से दूर है। पार्टी ने उनके भाई सचिन यादव को कसरावद सीट से प्रत्याशी बनाया है। खास बात यह है कि कांग्रेस ने अरुण यादव के अन्य किसी समर्थक को टिकट नहीं दिया है। न ही प्रदेश नेतृत्व ने अरुण यादव को चुनाव में कोई जिम्मेदारी सौंपी है। यही वजह है कि वे न तो पीसीसी की बैठक में शामिल रहे और न ही मप्र कांग्रेस के नेताओं के साथ चुनावी रणनीति बनाई। दोनों दलों ने पूर्व प्रदेशाध्यक्ष को पूरी तरह से हासिये पर ला दिया है।