चुनाव आयोग में रजिस्ट्रेशन के बाद पॉलिटिकल पार्टी बनी सपाक्स, जल्द मिलेगा चुनाव चिन्ह

भोपाल। सामाजिक संगठन से राजनीतिक दल बने सपाक्स को आखिरकार भारत निर्वाचन आयोग से मान्यता मिल गई। चुनाव आयोग ने सपाक्स का राजनीतिक पार्टी के रूप में रजिस्ट्रेशन कर लिया है। आयोग की ओर से इस संबंध में राज्य निर्वाचन आयोग को भी जानकारी भेज दी गई है। अब प्रदेश की सभी 230 सीटों पर सपाक्स विधानसभा चुनाव लड़ सकती है। पार्टी को जल्द ही फ्री चुनाव चिन्हों  की सूची में से एक  कॉमन चुनाव चिन्ह आवंटित हो जाएगा। 

जानकारी के अनुसार सामान्य पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक समुदाय (सपाक्स) अब राजनीतिक दल के रूप में भारत चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड हो गया है। सपाक्स अब अपने चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ सकती है। रजिस्ट्रेशन नहीं होने से पहले सपाक्स दूसरे दलों से अपने उम्मीदवारों को उतारने पर चर्चा कर रही थी। लेकिन अब जल्द ही उसे निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव चिन्ह जारी कर दिया जाएगा। 

गौरतलब है कि सपाक्स का राजनीतिक दल के रूप में गठन दो अक्टूबर को किया गया। सपाक्स ने प्रदेश कार्यकारिणी का भी गठन किया गया है। भाजपा नेता राजीव खंडेलवाल ने सपाक्स ज्वाइन की है, उन्हें उपाध्यक्ष बनाया गया है। वहीं, मप्र भूमि सुधार आयोग की सदस्य डॉ. वीणा घाणेकर आईएएस ने सपाक्स में जाने के लिए आयोग से इस्तीफा दे दिया है। 

एससीएसटी एक्ट विरोध मुख्य मुददा: सपाक्स ने ऐलान किया है कि वो प्रदेश की सभी 230 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेगी। एससीएसटी एक्ट और प्रमोशन में आरक्षण का विरोध इनका प्रमुख चुनावी मुद्दा होगा। चुनाव आयोग की मंजूरी के बाद चुनाव चिन्ह तय होगा। 

करणी सेना समेत कई संगठनों का समर्थन: एससीएसटी एक्ट की चौसर पर मध्य प्रदेश की सियासत में कई खिलाड़ी मैदान में कूद चुके हैं। सपाक्स भी अपना पूरा दम दिखा रही है। सपाक्स की सियासत मजबूत पार्टियों के लिए आखिर कितनी मुश्किल पैदा करेगी ये आने वाला वक्त ही बताएगा।