आंध्र को विशेष राज्य का दर्जा देने कमलनाथ ने दिया नायडू को समर्थन



भोपाल। मप्र के मुख्यमंत्री कमल नाथ ने अपना, कांग्रेस पार्टी और मप्र राज्य का आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चन्द्रबाबू नायडू और आंध्र प्रदेश की जनता को विशेष राज्य का दर्जा देने के लिए आयोजित एक दिवसीय धरना में समर्थन दिया। आंध्र प्रदेश भवन में आयोजित धर्म पोरता दीक्षा न्याय संघर्ष के लिए केन्द्र सरकार की वादा खिलाफी पर एकदिवसीय अनशन किया गया। ज्ञात हो कि केन्द्र सरकार ने आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2014 के तहत आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिया जाना था जो अभी तक नहीं दिया गया है।

मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री कमल नाथ ने बताया कि यूपीए सरकार के दौरान संसदीय कार्यमंत्री की हैसियत से उन्होंने न केवल आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की बहस में भाग लिया बल्कि संसद द्वारा आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने के लिए केन्द्र की प्रतिबद्धता का भी साक्षी रहा हूं। यह आंध्र प्रदेश की जनता के साथ अन्याय है। उन्होंने नायडू को सिद्धांतवादी बताया और कहा कि कई बार अपने सिद्धांतों के लिए वह कांग्रेस पार्टी के खिलाफ भी खड़े हो जाते थे और इस समय आंध्र प्रदेश की जनता के लिए वह केन्द्र के खिलाफ अनशन कर रहे हैं। देश में आज के हालातों का जिक्र करते हुए कमल नाथ ने बताया कि आज न केवल देश के महत्वपूर्ण संस्थान जैसे भारतीय रिजर्व बैंक, सीबीआई , न्यायपालिका बंटे हुए हैं साथ ही केन्द्र सरकार ने समाज को बांटने का भी काम किया। इसके खिलाफ हम अंत तक लड़ते रहेंगे और इनके मन्तव्य को जनता के सामने रखेंगे। केन्द्र सरकार ने देश के नौजवानों, किसानों और विभिन्न राज्य सरकारों के साथ भी वादा खिलाफी की है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि अगले तीन माह में इस सरकार को उखाड़ फेकेंगे।

कमल नाथ ने आंध्र प्रदेश की जनता की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा सच्चाई का साथ दिया है। कांग्रेस पार्टी ने भी हमेशा स्वाधीनता से पहले और स्वाधीनता के बाद हमेशा सत्य का साथ दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री मप्र दिग्विजय सिंह ने भी कांगे्रस पार्टी की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने संसद के पटल पर आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की प्रतिबद्धता जाहिर की थी। पर अब केन्द्र सरकार किन्हीं राजनीतिक कारणों के कारण अनदेखा कर रही है।

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