प्रचार करने गए भूरिया को ग्रामीणों ने सुनाई जमकर खरी-खोटी, कार्यकर्ता बोले-30 हजार वोट से हारोगे

रतलाम।

लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की मुश्किलें कम होने का नाम नही ले रही है। आए दिन प्रत्याशियों का विरोध देखने को मिल रहा है।बैतूल, शहडोल,धार और भिंड के बाद अब सोमवार को रतलाम से कांग्रेस प्रत्याशी और वर्तमान सांसद कांतिलाल भूरिया का विरोध हुआ है।हैरानी की बात तो ये है कि कार्यकर्ताओं ने ही भूरिया का विरोध किया। यही नहीं उन्‍हीं के सामने मोदी मोदी के नारे लगाए और कहा, यहां से वह 30 हजार वोट से हारेंगे।वही भूरिया को ग्राम सुराना में भी ग्रामीणों की नाराजगी झेलनी पड़ी। वही इस विरोध के बाद कांग्रेस में हड़कंप मच गया है। कांग्रेस लगातार विरोधियों को मनाने में जुटी हुई है। 

दरअसल, रतलाम झाबुआ लोकसभा सीट से कांग्रेस ने फिर वर्तमान सांसद कांतिलाल भूरिया पर भरोसा जताया है और उन्हें उम्मीदवार घोषित किया है। इसी के चलते भूरिया लगातार दौरे में जुट गए है। सोमवार को वे रतलाम ग्रामीण विधानसभा के ग्राम सुराना में  प्रचार प्रसार करने पहुंचे थे, जहां कार्यकर्ताओं के साथ साथ ग्रामीणों ने भी उन्हें जमकर खरी खोटी सुनाई और ३० हजार वोटों से हारने की बात कह दी।खबर है कि जैसे ही चर्चा के लिए पहुंचे भूरिया ने अपने बात रखी वैसे ही ग्रामीण और कार्यकर्ता सड़क और विकास कार्य ना होने के कारण बरस पड़े।

भूरिया के चर्चा करने से पहले ही  गांव की सड़क व विकास कार्यों को लेकर सवाल पूछना शुरू कर दिए। इस दौरान कुछ ने कहा कि अब आए हो, विकास कुछ नहीं कराया। इस पर भूरिया ने लोगों को समझाने की कोशिश की लेकिन बात नहीं बनी। कई बार तो बहस तीखी होती दिखी। गांव के कुछ लोगों ने इसका वीडिया बनाकर वायरल भी कर दिया।  इस दौरान उनके साथ जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजेश भरावा और अन्य पदाधिकारी भी मौजूद थे। वही कार्यकर्ताओं का भी आक्रोश इस हद तक पहुंच गया कि उन्होंने कांतिलाल भूरिया को साफ शब्दों में कह दिया कि वे 30 हजार वोट से हारने वाले हैं। इतना ही नहीं कांतिलाल भूरिया जब वहां से जाने लगे तो पीछे से नरेंद्र मोदी को जिताने का कहते हुए नरेंद्र मोदी जिंदाबाद के नारे लगाने लगे।

पहले भी विरोध का सामना कर चुके है भूरिया

हालांकि यह पहला मौका नही जब भूरिया को विरोध का सामना करना पड़ा हो। इसके पहले भी भूरिया का कई बार विरोध देखने को मिला है। इससे पहले गांव बिलपांक में भी ग्रामीणों ने भूरिया का विरोध किया था। वहां भी ग्रामीणों ने कांतिलाल भूरिया पर विकास न करने और चुनाव के समय वोट के लिए ही गांव में आने का आरोप लगाया था।इस तरह के विरोध से रतलाम झाबुआ लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस के लिए मुसीबत बढ़ती जा रही है।

बेटे को हराने के बाद भूरिया को चुनौती देंगे जीएस डामोर

वही रतलाम-झाबुआ सीट से बीजेपी ने वर्तमान झाबुआ विधायक जीएस डामोर को उम्मीदवार बनाया है। डमोर वर्तमान सांसद और कांग्रेस प्रत्याशी कांतिलाल भूरिया को चुनौती देंगें। डामोर वही है जिन्होंने हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान कांतिलाल भूरिया के बेटे विक्रांत भूरिया को हराया था और अब पिता से मुकाबला करेंगें। भूरिया जहां  1998, 1999, 2004 और 2009 में लोकसभा चुनाव चुनाव जीत चुके हैं और कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में से एक जाने जाते है वही डामोर वर्तमान में झाबुआ से विधायक है। इससे पहले वे भोपाल में पीएचई में नौकरी करते थे और रिटायर्ड होने के बाद राजनीति में आए। जहां बेटे की हार का बदला लेना भूरिया के लिए अग्निपरीक्षा से कम नही होगा।वही डामोर के लिए जीतना एक चुनौती से कम नही है। दोनों नेताओं के बीच मुकाबला रोमांचक होने वाला है। अगर भूरिया जीते तो बेटे की हार का बदला पूरा होगा और अगर डामोर जीते तो वे पहले विधायक होंगें जिसने बेटे को विधानसभा और पिता को लोकसभा चुनाव में हराया होगा।यह देखना बड़ा ही दिलचस्प होगा कि कांतिलाल बेटे विक्रांत की हार का बदला ले पाते है या बेटे की तरह डामोर से मात खाते है। अगर ऐसा हुआ तो डामोर का कद ना लोगों के बीच बल्कि संगठन में भी बढ़ेगा, वही वह पहले विधायक होंगें जिसने पिता पुत्र को हराया हो।

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