मध्य प्रदेश भाजपा के लिए अपने विधायक बढ़ा रहे टेंशन

भोपाल। प्रदेश में कांग्रेस सरकार गिरने का दावा करने वाली भारतीय जनता पार्टी इन दिनों अपने ही विधायकों के बढ़ते कांग्रेस प्रेम की वजह से परेशान है। ये विधायक सार्वजनिक तौर पर स्पष्ट कर चुके हैं कि वे मुख्यमंत्री कमलनाथ के काम से प्रभावित हैं। स्थिति यह है कि प्रदेश संगठन इन विधायकों को नोटिस देने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रहा है। अनुशासन प्रिय राजनीतिक दल के अंदरखाने अनुशासनहीनता बढ़ती जा रही है।  

पिछले विधानसभा सत्र में भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी एवं शरद कोल ने सरकार के पक्ष में वोट दिया था। विधायकों के इस कदम से भाजपा को बड़ा झटका लगा, लेकिन भाजपा ने यह कहकर स्थिति को संभाला कि विधायकों ने फ्लोर टेस्ट में कांग्रेस का पक्ष नहीं लिया, वे विकास प्रस्ताव पर सरकार के पक्ष में थे। हाल ही में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह ने सरकार के प्रस्ताव का सदन में समर्थन करने वाले विधायक नारायण त्रिपाठी के साथ प्रदेश कार्यालय में पत्रकारवार्ता कर बताया कि त्रिपाठी भाजपा में ही है। इसके बाद से त्रिपाठी कांग्रेस नेता एवं मंत्रियों के साथ बंद कमरे में बैठक कर रहे हैं। इस बीच ब्यौहारी विधायक शरद कौल ने एक बार फिर कहा कि वे मुख्यमंत्री कमलनाथ के काम से प्रभावित हैं और उनके साथ हैं। हालांकि कौल ने कहा कि वे भाजपा के सदस्य हैं। दोनों ही विधायकों का कहना है कि क्षेत्र का विकास सर्वोपरी है और परिस्थिति के हिसाब से फैसला लेंगे। इन विधायकों का कांग्रेस प्रेम सामने आने के बाद भी संगठन ने नोटिस तक जारी नहीं किया। वहीं इधर एक अन्य विधायक राकेश गिरी भी सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री कमलनाथ की तारीफ करते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने पिछले कुछ महीनों में कमलनाथ के साथ के फोटो भी शेयर किए हैं। फिलहाल इन विधायकों की वजह से पार्टी टेंशन में है और इन पर नजर भी रखी जा रही है। 

शुक्ला को दो घंटे में थमाया नोटिस

झाबुआ उपचुनाव में हार के बाद भाजपा के वरिष्ठ विधायक केदार शुक्ला ने सार्वजनिक बयान देकर प्रदेशाध्यक्ष केदार शुक्ला की काबिलियत पर सवाल उठाए। प्रदेश संगठन ने दो घंटे के भीतर शुक्ला को नोटिस थमा दिया। हालांकि अभी तक पार्टी को कोई जवाब नहीं मिला है, नहीं कोई कार्रवाई की गई है। शुक्ला को नोटिस थमाए जाने पर संगठन में ही अंदरूनी तौर पर विरोध हो रहा है, क्योंकि कांग्रेस सरकार का समर्थन करने वाले विधायकों पर संगठन मेहरबान क्यों है। 

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