बीजेपी के लिए सिरदर्द बने पार्टी के यह 'तारणहार'

भोपाल। मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव में भाजपा की मुश्किलें बढ़ाने वाले वरिष्ठ नेताओं ने अब लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी का सिरदर्दी बढ़ा दिया है| पिछले पांच सालों में पार्टी से दरकिनार चल रहे बुजुर्ग नेताओं के तीखे तेवर देखने को मिले हैं, विरोधी पार्टी को अनुशाशन की दुहाई देने वाली भाजपा के यह नेता अब खुलकर अपनी ही पार्टी पर सवाल उठा रहे हैं| विधानसभा चुनाव में वरिष्ठ नेता सरताज सिंह ने कांग्रेस का दामन थाम लिया| रामकृष्ण कुसमरिया बागी हो गए और पार्टी नेताओं की लाख कोशिशों के बाद भी निर्दलीय चुनाव लड़े और अब कांग्रेस से जा मिले| चुनाव के दौरान एक और वरिष्ठ नेता बाबूलाल गौर ने भी अपने बयानों से भाजपा में हलचल बढाए रखी| हालांकि बहु को टिकट मिलने के बाद सरताज जैसा फैसला उन्होंने नहीं लिया| लेकिन इस बार की भी चर्चा खूब रही कि अगर उन्हें टिकट नहीं मिलता तो वह भी कांग्रेस के हो जाते| अब लोकसभा चुनाव से पहले एक बार फिर बुजुर्ग नेताओं ने भाजपा की मुश्किलें बढ़ा दी है| भाजपा इन नेताओं के बगावती तेवरों को रोक नहीं पा रही है, वहीं कांग्रेस इसे लेकर भाजपा पर आरोप लगाने से नहीं चूक रही है। कभी पार्टी के तारणहार रहे यह नेता आज अपनी जरुरत पार्टी को महसूस करा रहे हैं|

एक तरह बाबूलाल गौर जहां लगातार अपने बयानों से पार्टी की मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं, वहीं अब पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता कुसुम महदेले ने भी बगावत का झंडा बुलंद कर दिया है। महदेले ने पार्टी से कहा है कि या तो मुझे टिकट दिया जाए या फिर राज्यपाल बनाया जाए। महदेले ने खजुराहो या दमोह से टिकट की दावेदारी ठोककर दोनों सीटों पर पार्टी के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। विधानसभा चुनाव में भाजपा ने महदेले का टिकट काट दिया था। इससे वे अपनी नाराजगी जता चुकी हैं। अब उन्होंने लोकसभा सीट के लिए टिकट मांगा है। उनके इस मांग के बाद से भाजपा में हड़कंप मच गया है| क्यूंकि पार्टी अगर उन्हें चुनाव लड़ाना ही चाहती तो विधानसभा चुनाव ही लड़ाती|  लेकिन अब उनके लोकसभा की टिकट मांगने से पार्टी पर दबाव बढ़ गया है, कहीं महदेले भी पाला न बदल लें, हालांकि वो इसको लेकर इंकार कर चुकी हैं|  

महदेले का कहना है कि पार्टी में बुजुर्ग नेताओं का सम्मान होना चाहिए। इधर, पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने कुछ दिन शांत रहने के बाद एक बार फिर पार्टी नेताओं पर हमला बोला है। उन्होंने वरिष्ठ नेता रामकृष्ण कुसमरिया के कांग्रेस में शामिल होने के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि कुसमरिया के साथ पार्टी ने ठीक नहीं किया। गौरतलब है कि कुसमरिया ने सार्वजनिक तौर पर यह कहा है कि उन्हें कांग्रेस में शामिल होने का सुझाव बाबूलाल गौर ने ही दिया था।

पिछले दिनों संगठन महामंत्री रामलाल और लोकसभा चुनाव के लिए मप्र के प्रभारी स्वतंत्रदेव सिंह ने बाबूलाल गौर से मुलाकात पर पार्टी के खिलाफ बयानबाजी न करने की सलाह दी थी। इसके बाद गौर कुछ समय तो खामोश रहे, लेकिन अब फिर उन्होंने कुसमरिया के कांग्रेस में शामिल होने के फैसले को सही ठहराकर खामोशी तोड़ दी है। इन बुजुर्ग नेताओं के रुख ने एक बार फिर पार्टी को मुश्किल में डाल दिया है| गौर की बयानबाजी के बाद भी पार्टी कार्रवाई नहीं कर पा रही है, हालांकि बार बार चेतावनी जरूर दी जा रही है| 

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