बाढ़ से बर्बादी और सियासत : विपक्ष ने की सत्र बुलाने की मांग, सत्तापक्ष ने केंद्र से मांगी मदद

भोपाल। प्रदेश में बाढ़ की वजह से 10 हजार करोड़ से ज्यादा की बर्बादी हो चुकी है। सर्वे के बाद यह आंकड़ा बढ़ सकता है|  सरकार की ओर से अभी तक पीडि़तों को किसी भी तरह की मदद मुहैया नहीं कराई है। न ही कोई सरकारी नुमाइंदा जनता के बीच पहुंचा है। इससे पहले ही जनता की बर्बादी पर सियासत शुरू हो गई है। सत्ता पक्ष ने केंद्र सरकार पर मप्र की मदद रोकने का आरोप लगाया है और विपक्ष से मदद दिलाने में सहयोग की अपील की है। वहीं विपक्ष ने सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरने की रणनीति बना ली है। दोनों ही दलों में से पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अकेले नेता हैं, जो बाढ़ पीडि़तों के बीच पहुंचे हैं। 

राज्य सरकार प्रभावितों को मदद पहुंचाने की कोशिश कर रही है। इस बीच विपक्ष की ओर से सरकार पर असंवेनशील होने के ओराप लगाए जा रहे हैं। सत्ता पक्ष की ओर से जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा केंद्र सरकार से मप्र के हिस्से का रुका पैसा तत्काल दिलाने की मांग करे। शर्मा ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मप्र का पैसा रुकवाया है, अब वे राजनीतिक फायदे के लिए किसानों के बीच पहुंच गए हैं। कांग्रेस नेता नरेन्द्र सलूजा ने कहा कि शिवराज जब मुख्यमंत्री थे,तब मंदसौर में अपने हकों की मांग कर रहे किसानों पर गोली चलवाई थी, अब विपक्ष में हंैं तो उसी मंदसौर में किसानों कि नाम पर सियासत करने पहुंच गए हैं। पूर्व मंत्री नरेन्द्र मिश्रा ने भी कमलनाथ सरकार पर आरोप लगाया है कि कोई मंत्री जनता के बीच नहीं पहुंचा है। 

10 हजार करोड़ का नुकसान 

प्रदेश में पिछले एक हफ्ते से बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। भारी बारिश से बांधों से ज्यादा मात्रा में पानी छोड़े जाने की वजह से भिंड, मुरैना एवं श्योपुर के 100 से ज्यादा जिलों में बाढ़ के हालात बने हैं। इधर मंदसौर, नीमच, रतलाम, उज्जैन में बाढ़ का पानी घरों में घुस गया है। राज्य सरकार ने नुकसान की प्रारंभिक रिपोर्ट बुला ली है। मुख्य सचिव एसआर मोहंती ने बताया कि प्रदेश में अभी तक 10 हजार करोड़ रुपए के नुकसान का आंकलन है। प्रभावितों को राहत पहुंचाने का काम जारी है। साथ ही आर्थिक सहायता देने की भी तैयारी हो रही है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रभावित जिलों के कलेक्टरों से वीडिय़ो कॉफ्रेंसिंग के जरिए हालात जानकर स्थिति पर नजर रखने को कहा है। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में खाने-पीने का सामान  उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। 

सीएम ने खुद संभाली कमान

विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया है कि मंत्री, मुख्यमंत्री जनता के बीच नहीं पहुंचे है। जबकि मुख्यमंत्री कमलनाथ प्रदेश के हालात पर खुद नजर रखे हुए हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की मॉनीटरिंग में जुटे हैं और अधिकारियों के संपर्क में है। कमलनाथ ने ट्वीट के जरिए कहा कि नुकसान का सर्वे के पूर्व में निर्देश जारी किए जा चुके हैं। संकट की इस घड़ी में सरकार पूरी तरह से पीडि़तों के साथ है। हर तरह की राहत देने के निर्देश जारी हो चुके हैं। 

प्रभावित जिलों में घूमेगा केंद्रीय दल

प्रदेश में बाढ़ के हालात और नुकसान का जायजा लेने के लिए केंद्रीय दल 19 एवं 20 सितंबर को मप्र प्रवास पर रहेगा। केंद्रीय टीम मंदसौर, नीमच, रतलाम, उज्जैन, भिंड, मुरैना एवं श्योपुर जिले का दौरा करेगी। इस दौरान टीम के साथ मप्र के अफसर रहेंगे। 

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