सिंधिया ने स्वीकारी हार, बीजेपी प्रत्याशी को दी जीत की बधाई

भोपाल| मध्य प्रदेश में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को करारी शिकस्त मिली है| कांग्रेस के दिग्गज नेताओं को हार का सामना करना पड़ा, जबकि पूरे चुनाव में 22 से ज्यादा सीटों पर जीत का दावा किया जा रहा था| लेकिन सिर्फ एक ही सीट खाते में आई| इस हार को लेकर नेताओं के बयान सामने आ रहे हैं| मुख्यमंत्री कमलनाथ, पूर्व सीएम व कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह के बाद अब गुना सीट से चुनाव हारने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया की भी प्रतिक्रिया आ गई है| 

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी हार को स्वीकार कर लिया है| हार के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्वीट किया और जनादेश को स्वीकार करने की बात कही। उन्होंने लिखा कि, "मेरे लिए राजनीति, जनसेवा करने का एक जरिया है और मैं हमेशा जन सेवा के लिए प्रतिबद्ध रहूंगा। मेरी तरफ से डॉक्टर केपी यादव को जीत की बधाई।"

बता दें कि गुना से कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया का किला ढहाने में बीजेपी को पहली बार सफलता मिली है। इस सीट पर आज तक गैर सिंधिया घराने का कोई उम्मीदवार नहीं टिका। लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने इतिहास रच दिया है। बीजेपी प्रत्याशी केपी यादव ने इस सीट पर करीब एक लाख 25 हजार से अधिक वोटों से जीत दर्ज की है। एग्जिट पोल में भी इस सीट पर ख़तरा बताया था|  सिंधिया की गुना-शिवपुरी लोकसभा सीट पर हुई करारी हार के साथ ही सिंधिया राजपरिवार का तिलिस्म भी टूट गया। 


सिंधिया के लिए बड़ा झटका  

गुना लोकसभा सीट पर तीन पीढ़ियों से सिंधिया घराने का कब्जा रहा है । ग्वालियर के बाद गुना ही वह लोकसभा सीट है, जहां से सिंधिया परिवार चुनाव लड़ना पसंद करता है। इस सीट से सांसद ज्योतिरादित्य की दादी विजयराजे सिंधिया और पिता माधवराव सिंधिया ने निर्दलीय चुनाव जीतकर इतिहास रचा था। पिछले लोकसभा चुनाव में मोदी लहर में भी गुना सीट से ज्योतिरादित्य ने भाजपा नेता और प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया को एक लाख 20 हजार 792 वोटों से शिकस्त दी थी। सिंधिया घराने के गढ़ में भाजपा ने कई बार सेंध लगाने की कोशिश की, लेकिन विजयाराजे सिंधिया के बाद से भाजपा को यहां पर कोई ऐसा उम्मीदवार नहीं मिला, जो माधवराव सिंधिया और ज्योतिरादित्य सिंधिया को हरा सके। लेकिन इस बार बीजेपी सफल हो गया|  सिंधिया परिवार की तीन पीढ़ियों को गुना लोकसभा सीट से 14 बार सांसद के तौर जनता ने चुनकर भेजा है। सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की दादी विजयाराजे सिंधिया छह बार गुना से सांसद रहीं, तो उनके पिता माधवराव चार बार चुने गए। ज्योतिरादित्य भी चार बार  गुना लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। ऐसी स्तिथि में यह हार काफी बड़ी हार मानी जा रही है| 



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