MP: इन सीटों पर उसी का कब्जा जिसे जनता ने स्वीकारा, आंधी और लहर भी रहती है बेअसर

भोपाल

मध्यप्रदेश में कई ऐसी सीटे है जिन पर ना तो किसी लहर का असर होता है ना ही किसी आंधी का कोई फर्क पड़ता है।इन सीटों पर कहानी कुछ और ही कहती है। चाहे केन्द्र और राज्य में किसी की भी सरकार हो इसका प्रभाव नही पड़ता। इन सीटों पर जनता उन्ही को चुनती है, जिन सालों से यह अपना विश्वास बनाया है। कई सीटों पर सालों से बीजेपी का दबदबा है तो कई सीटों पर कांग्रेस अपना कब्जा जमाए हुए है।इनमें मध्यप्रदेश की विदिशा, भोपाल,इंदौर के अलावा भिंड पिछले 7-8 बार से भाजपा का कमल खिलता आ रहा है। वहीं मध्यप्रदेश की छिंदवाड़ा और गुना सीट पर कांग्रेस परचम फहराती आ रही है। हालांकि इस बार समीकरण कुछ बदले बदले नजर आ रहे है, क्योंकि विधानसभा चुनाव के दौरान कई सीटों पर कांग्रेस तो कुछ पर बीजेपी सेंध लगाने में कामयाब हुई ।हालांकि लोकसभा चुनाव में इसका कितना असर पड़ता है ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा। वही मुकाबला रोचक और हो जाएगा जब बीजेपी कांग्रेस के गढ़ को और कांग्रेस बीजेपी के गढ़ को भेदने की कोशिश करेगी।

इन सीटों की अलग ही है कहानी

विदिशा लोकसभा सीट-

मध्यप्रदेश की विदिशा सीट पर 1989 से भाजपा का कब्जा है। इस सीट से अटल बिहारी वाजपेयी, शिवराज सिंह चौहान और सुषमा स्वराज जीते। वहीं इस बार कांग्रेस के शैलेंद्र पटेल प्रत्याशी हैं, लेकिन भाजपा का अब तक प्रत्याशी तय नहीं है।साल 1991 के चुनाव में यहां से देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने जीत दर्ज की थी, अटल बिहारी ने उस साल विदिशा के साथ-साथ लखनऊ से भी चुनाव लड़ा था और वो दोनों जगह से विजयी हुए थे।लेकिन बाद में उन्होंने लखनऊ को चुना और विदिशा को छोड़ दिया था। इसी के चलते बीजेपी ने शिवराज सिंह चौहान को विदिशा से उपचुनाव लड़ाया और शिवराज सिंह चौहान 1991 से लेकर 2005 तक विदिशा के सांसद रहे, लेकिन मध्य प्रदेश के सीएम बनने के बाद शिवराज सिंह को लोकसभा सीट से इस्तीफा देना पड़ा, जिसके बाद यहां उपचुनाव हुए भाजपा के रामपाल सिंह यहां से सांसद बने। साल 2009 के बाद 2014 का चुनाव भी यहां से सुषमा स्वराज ने जीता।अब कांग्रेस बीजेपी के इस किले को ढाहने के लिए एड़ी से चोटी तक का जोर लगा रही है।

भोपाल लोकसभा सीट-

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में 8 चुनाव से भाजपा जीती। दो बार पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी, एक बार उमा भारती जीतीं। साल 1989 में कांग्रेस की इस सीट को सबसे पहले पूर्व मुख्य सचिव रहे सुशीलचंद्र वर्मा ने भाजपा के कब्जे की। इसके बाद वे लगातार चार बार 1998 तक इस सीट से सांसद रहे।इसके बाद 1999 में भाजपा नेत्री उमा भारती और 2004 और 2009 में कैलाश जोशी ने यहां जीत दर्ज की और साल 2014 के चुनाव में यहां से आलोक संजर सांसद बने।  इस बार कांग्रेस के दिग्विजय सिंह मैदान में हैं। जबकि भाजपा का प्रत्याशी अब तक तय नहीं है।हालांकि शिवराज और उमा भारती के मना करने पर प्रज्ञा ठाकुर को उम्मीदवार बनाए जाने की अटकले तेज है।बताया जा रहा है कि हिन्दुवादी चेहरा होने के कारण ठाकुर का नाम आगे बढ़ाया गया है।

 गुना लोकसभा सीट-

मध्यप्रदेश की गुना सीट कांग्रेस का अभेद्य किला है। ज्योतिरादित्य सिंधिया इस सीट से चार बार जीते। जबकि इससे पहले उनके पिता दिवंगत माधवराव सिंधिया यहां से कांग्रेस के सांसद रहे।वैसे तो ये सीट सिंधिया राजपरिवार का गढ़ रही है, लेकिन पिछले कई चुनावों से यहां सिंधिया परिवार ने कांग्रेस के लिए जीत दर्ज कराई है। यहां तक की 2014 की मोदी लहर में भी ये सीट जस की तस कांग्रेस की झोली में ही गिरी।1999 के चुनाव में कांग्रेस के साथ-साथ माधवराव सिंधिया की इस सीट पर वापसी हुई। 2001 में हुई एक हवाई दुर्घटना में माधवराव सिंधिया का असामायिक निधन हो जाने के बाद उनके पुत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 2004 के चुनावों से सक्रिय राजनीति में पदार्पण किया और गुना को ही संसदीय क्षेत्र चुना, जिसके जवाब में गुना की जनता ने अपने युवराज को सर-आंखों पर बिठाया और तब से लेकर अब तक ज्योतिरादित्य सिंधिया ही इस सीट से सांसद हैं और भाजपा यहां जीत के लिए तरस रही है।इस बार भी कांग्रेस ने सिंधिया को मैदान में उतारा है, वही बीजेपी अब उम्मीदवार अबतक तय  वही कर पाई है।अब देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी सिंधिया को टक्कर देने लिए किसे मैदान में उतारती है।

छिंदवाड़ा लोकसभा सीट-

मध्यप्रदेश की छिंदवाड़ा सीट भी कांग्रेस का अभेद्य किला है। मुख्यमंत्री कमलनाथ इस सीट से नौ बार जीते। ये अपने आप में एक रिकॉर्ड है।लेकिन प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद कमलनाथ ने इस बार  बेटे नकुलनाथ को मैदान में उतारा है वही विधानसभा सदस्य बनने के लिए खुद छिंदवाड़ा से ही उपचुनाव लड़ने जा रहे है।वही भाजपा ने बेटे नकुलनाथ को हराने के लिए नथ्थन शाह को टिकट दिया है। कमलनाथ साल 1980 से इस सीट से लोकसभा का चुनाव जीतते आ रहे हैं। छिंदवाड़ा की जनता ने कमलनाथ को सिर्फ एक बार निराश किया है, जब 1997 में उन्हें यहां से हार मिली।

इंदौर लोकसभा सीट-

मध्यप्रदेश की इंदौर सीट पिछले 8 चुनाव से कांग्रेस जीत नहीं पाई है। लोकसभाध्यक्ष सुमित्रा महाजन यहां लगातार 8 बार से जीत दर्ज कराती आ रही हैं। पिछले चुनाव में महाजन ने कांग्रेस प्रत्याशी सत्यनारायण पटेल को चार लाख 66 हजार मतों से शिकस्त दी थी। महाजन इस बार चुनाव लडऩा नहीं चाहती। भाजपा उनके विकल्प के रूप में मजबूत प्रत्याशी तलाश करने में व्यस्त है।1989 से यह सीट भाजपा की सुरक्षित सीटों में गिना जाता है। कहने को तो ये मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी है, लेकिन राजनीतिक नजरिए से भी यह शहर बेहद खास है।सुमित्रा महाजन ने 1989 के चुनाव में कांग्रेस नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश चंद्र सेठी को हराया। ज्ञात हो कि सुमित्रा महाजन इससे पहले इंदौर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से वो लगातार तीन विधानसभा चुनाव हार चुकी थीं। सुमित्रा महाजन लगातार 1989 के चुनाव से यहां पर जीतती आ रही हैं।कांग्रेस ने उनको हराने की हर कोशिश की, लेकिन उसकी सारी कोशिश नाकाम ही साबित हुई। ताई के नाम से मशहूर सुमित्रा महाजन 8 बार से इंदौर की सांसद हैं। सुमित्रा इससे पहले 1982-85 में इंदौर महापालिका में पार्षद रह चुकीं हैं।वही अभी तक कांग्रेस-बीजेपी दोनों ने यहां से पत्ते नही खोले है।हालांकि कांग्रेस से जीतू पटवारी और पकंज संघवी के नामों की चर्चा जोरों पर है वही बीजेपी से कैलाश विजयवर्गीय और मालिनी गौड दौड़ में शामिल है।

भिंड लोकसभा सीट-

मध्यप्रदेश की भिंड लोकसभा सीट बीजेपी के मजबूत किले में से एक है। इस सीट पर पिछले 8 चुनाव से बीजेपी का ही कब्जा है। इस सीट पर कभी विजयाराजे सिंधिया चुनाव जीत चुकी हैं, तो वहीं उनकी बेटी और राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे भी इस सीट पर किस्मत आजमा चुकी हैं। 1996 से जीत का जो सिलसिला बना हुआ था वह 2009 के चुनाव में भी जारी रहा। 2009 के चुनाव में भी बीजेपी के अशोक अर्गल ने जीत हासिल की। उन्होंने तब कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े डॉ. भागीरथ प्रसाद को हराया था।2014 के चुनाव में बीजेपी ने कांग्रेस के टिकट पर यहां से चुनाव लड़ चुके डॉ. भागीरथ प्रसाद को उतारा। 2009 में हारने के बाद डॉ. भागीरथ प्रसाद इस बार यहां भाजपा प्रत्याशी के रूप में जीत मिली।इस बार कांग्रेस ने भिंड लोकसभा से देवाशीष जरारिया को उम्मीदवार बनाया है वही बीजेपी से संध्या सिंह मैदान में है।

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