सालों का नाता टूटा, अब विधानसभा के मेहमान होंगे ये दिग्गज

भोपाल। प्रदेश में लंबे समय से राजनीति में सक्रिय दिग्गज नेता अब विधानसभा में दर्शक दीर्घा के मेहमान होंगे। इस बार इन नेताओं को विधानसभ चुनाव में उतरने का मौका नहीं मिला है। कुछ नेताओं ने बीमारी के चलते चुनाव नहीं और कुछ को पार्टी ने टिकट नहीं दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर का 40 साल बाद मप्र विधानसभा से नाता टूट रहा है। वे विधानसभा के 10 बार से लगातार सदस्य रहे हैं। 

इस बार विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने कई दिग्गज नेताओं को चुनाव मैदान में नहीं उतारा है। कांग्रेस ने भी कई वरिष्ठ नेताओं को चुनाव लडऩे का मौका नहीं दिया। हालांकि कांग्रेस की अपेक्षा भाजपा में ज्यादा नेता ऐसे हैं, जो वरिष्ठ हैं, लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। पंद्रहवीं विधानसभा के गठन के बाद ये सभी विधायक पूर्व सदस्य हो जाएंगे। साथ ही ऐसे नेता जो फिर से चुनाव मैदान में है, लेकिन वे फिर से जीत दर्ज नहीं करा पाते हैं, ऐसे नेता भी पूर्व सदस्य हो जाएंगे। 


ये कहलाएंगे पूर्व सदस्य

बाबूलाल गौर

पूर्व मुख्यमंत्री एवं विधायक मप्र विधानसभा के लिए 40 साल से लगातार 10 वीं बार विधायक चुने जा रहे  हैं। वे मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद लगातार मंत्री थे, लेकिन दो साल पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें उम्र का हवाल देकर मंत्री पद से हटा दिया था। इस बार विधानसभा चुनाव में गौर फिर से टिकट की मांग कर रहे थे, लेकिन पार्टी ने भोपाल की गोविंदपुरा विधानसभा सीट से गौर का टिकट काटकर उनकी बहू कृष्णा गौर को प्रत्याशी बनाया। ऐसे में गौर का सदन से नाता टूटने जा रहा है। वे दर्शक दीर्घा के ही मेहमान होंगे। 


कुसुम मेहदेले

भाजपा की वरिष्ठ नेत्री कुसुम मेहदेले को भी पार्टी ने इस बार घर बैठा दिया है। वे पन्ना से विधायक है, लेकिन पार्टी ने उनके स्थान पर पूर्व मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह को प्रत्याशी बनाया है। टिकट कटने का मेहदेले को दर्द भी है। वे ट्वीटर के माध्यम से इस दर्द को बीच-बीच में उजागर करती रही हैं। उन्होंने टिकट कटने पर मप्र भाजपा के दिग्गज नेताओं पर निशाना भी साधा था। अब मेहदेले भी दर्शक दीर्घा की मेहमान होंगी। 


गौरीशंकर शेजवार

रायसेन जिले की सांची से विधायक एवं मंत्री गौरीशंकर शेजवार ने इस बार खुद चुनाव लडऩे से इंकार कर दिया। शेजवार ने खुद की जगह बेटे मुदित शेजवार को चुनाव लड़ाया है। शेजवार मप्र विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष से लेकर उमा, गौर एवं शिवराज सरकार में मंत्री रहे हैं।  


माया सिंह

दो बार राज्यसभा सदस्य रहने के बाद माया सिंह ने 2013 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा और शिवराज सरकार में मंत्री बनीं। पार्टी ने इस बार माया सिंह को चुनाव मैदान में नहीं उतारा। हालांकि माया ने पार्टी के इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने अभी तक टिकट कटने पर किसी भी तरह की नाराजगी जाहिर नहीं की है। माया सिंह भी अब दर्शक दीर्घा की मेहमान होंगी। 


कैलाश विजयवर्गीय 

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव मप्र विधानसभा के लंबे समय से सदस्य है। दो साल पहले केंद्र में जिम्मेदारी मिलने के बाद उन्होंने शिवराज मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। इस बाद उन्होंने खुद विधानसभा चुनाव लडऩे से इंकार कर दिया। उन्होंने अपने बेटे आकाश विजयवर्गीय को चुनाव मैदान में उतारा है। कैलाश अब मप्र विधानसभा के पूर्व सदस्य होने जा रहे हैं। 


हारने वालों का भी टूटेगा नाता

हर विधानसभा चुनाव में हार-जीत होती है।  2013 के चुनाव में शिवराज मंत्रिमंडल के 10 मंत्री चुनाव जीतकर नहीं आ पाए थे। इस बार भी ज्यादातर मंत्रियों को चुनाव मैदान में उतारा है। जिनमें से एक दर्जन मंत्रियों की सीट पर कड़ा मुकावला है। ऐसे में जो दिग्गज नेता चुनाव हार जाते हैं, उनका भी सदन से नाता टूट जाएगा।

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