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तीन लाख करोड़ के ई टेंडरिंग घोटाले में फंस सकते हैं 5 आईएएस

भोपाल। मध्यप्रदेश में ई टेंडरिंग के नाम पर हो रही भारी गड़बड़ी पकड़ी गई है। पीएचई के प्रमुख सचिव प्रमोद अग्रवाल ने गङबङी को पकड़ा है। तीन बड़े मामलों में उन्होंने इस गड़बड़ी को पकड़ते हुए मैप आटी के डायरेक्टर मनीष रस्तोगी को पत्र लिख पूरे मामले की जांच की बात लिखी है ।यह घोटाला तीन लाख करोड रुपए तक का हो सकता है और इसमें मुख्यमंत्री के बेहद खास माने जाने वाले पांच आईएएस अधिकारी शामिल हो सकते हैं। हालांकि यह गड़बड़ी की बात सामने आते ही पूरी सरकार इस मामले को दबाने में जुट गई है। इस पूरे मामले का पर्दाफाश किया है पत्रिका के स्टेट ब्यूरो हरीश दिवेकर ने....

मध्यप्रदेश सरकार के ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल में टेम्परिंग करने का मामला उजागर हुआ है। टेम्परिंग के जरिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग के १000 करोड़ रुपए के तीन टेंडरों के रेट बदल दिए गए। चुनावी साल में ई-टेंडर में छेड़छाड़ से सरकार के हाथ-पांव फूल गए हैं। गंभीर तथ्य यह है कि इनमें दो टेंडर राजगढ़ के बांधों से करीब एक हजार गांवों में पेयजल सप्लाई परियोजना के भी हैं। इनका शिलान्यास २३ जून को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करने वाले हैं। यह गड़बड़ी सामने आते ही मैप-आइटी के प्रमुख सचिव मनीष रस्तोगी के पत्र के बाद पीएचई प्रमुख सचिव प्रमोद अग्रवाल ने तीनों टेंडर निरस्त कर दिए हैं। इस खुलासे के बाद २०१४ से अब तक करीब तीन लाख करोड़ रुपए के ई-टेंडर संदेह के दायरे में आ गए हैं। सूत्रों के अनुसार इसकी व्यापक जांच से वरिष्ठ अधिकारियों, ठेकदारों और पोर्टल डवलपर कंपनी का बड़ा गठजोड़ सामने आ सकता है।   

  लाल क्रास से खुला मामला

पीएचई विभाग के जल निगम ने जलप्रदाय योजना के तीन टेंडर २६ दिसंबर को जारी किए थे। इनमें सतना का 138 करोड और राजगढ़ जिले में 656 और 282 करोड़ के टेंडर थे। इनमें दो टेंडरों मेंं एलएंडटी कंपनी ने भी भाग लिया था। वह दोनों टेंडर में दूसरे नंबर पर रही। बाद में कंपनी ने पीएचई विभाग के प्रमुख सचिव प्रमोद अग्रवाल से शिकायत की। प्रमुख सचिव ने विभाग की लॉगिन से ई-टेंडर साइट को ओपन किया तो उसमें एक जगह लाल क्रॉस दिखाई दिया। उन्होंने विभाग के इंजीनियरों से इस बारे में पूछा तो उनका जवाब था कि टेंडर साइट पर यह निशान हमेशा आता है, लेकिन इसका कारण हमें नहीं पता। प्रमुख सचिव ने इसकी खोजबीन के लिए मैप आइटी के प्रमुख सचिव मनीष रस्तोगी को पत्र लिखा। जांच में सामने आया कि ई-प्रोक्योरमेँट में कोई छेड़छाड़ करता है तो लाल क्रास का निशान आ जाता है। जांच में ई-टेंडर में टेम्परिंग कररेट बदलने का तथ्य भी उजागर हुआ। 

 

2014 से शुरू हुई ई-टेंडरिंग

राज्य सरकार ने पीडब्ल्यूडी, पीएचई, जल संसाधन और एनवीडीए जैसे विभागों के ठेकों में भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए 2014 में ई-टेंडर की व्यवस्था लागू की थी। इसकी केन्द्रीयकृत व्यवस्था के लिए बंगलुरु की एक आइटी कंपनी से मध्यप्रदेश ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल बनवाया गया। तब से प्रदेश का प्रत्येक विभाग इसके माध्यम से ई-टेंडर करता है। ई-टेंडर में छेड़छाड़ से इस पोर्टल की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।  


वर्जन

नल-जल समूह योजना में गांवों में पानी सप्लाई करने को लेकर टेंडर जारी किए थे। हमेें टेंडर में गड़बड़ी होने की शिकायत मिली थी। इसके बाद पूरे मामले की जांच कराई गई। इसमें ई-टेंडर में टेम्परिंग करने का मामला सामने आया है। हमने तीनों टेंडर निरस्त कर दिए  हैं। 

प्रमोद अग्रवाल, प्रमुख सचिव पीएचई विभाग 


इनमें हुई गड़बड़ी 

- टेंडर नंबर 91 - सतना के बाण सागर नदी से 166 एमएलडी पानी 1019 गांवों में पहुंचाने के लिए 26 दिसंबर 2017 को ई-टेंडर जारी किया गया था। इस योजना में पांच बड़ी नामी कंपनियों जीवीपीआर, एलएंडटी, दिलीप बिल्डकॉन, जेएमसी लक्ष्मी ज्वाइंट वेंचर और जेएमसी प्रोजेक्ट (इंडिया) लिमिटेड ने टेंडर भरे थे। जांच में सामने आया कि जीवीपीआर कंपनी के लिए टेंडर टेम्पर किया गया है। इस कंपनी के टेंडर में 37, 50000 रुपए कम किए गए। इसके चलते एलएंडटी दूसरे नंबर पर चली गई।  

- टेंडर नंबर 93 - राजगढ़ जिले की काली सिंध नदी से 68 एमएलडी पानी 535 गांवों को सप्लाई करने का टेंडर 26 दिसंबर 2017 को जारी किया गया था। इसमें चार नामी कंपनियों द इंडियन हय़ूमन पाइप कंपनी लिमिटेड, एलएंडटी लिमिटेड, दिलीप बिल्डकॉन कंपनी, लक्ष्मी सिविल इंजीनियरिंग सर्विस प्राईवेट लिमिटेड टेंंडर भरे थे। जांच में सामने आया कि द ह्यूमन पाइप कंपनी लिमिटेड को ठेका देने के लिए टेम्परिंग की गई। इस कंपनी को टेंडर दिलाने के लिए 2 करोड 25 लाख कम किए गए। जिसके चलते इस टेंडर में भी एलएंडटी कंपनी दूसरे नंबर पर आ गई।

- टेंडर नंबर 94 - राजगढ़ जिले के नेवाज नदी पर बने बांध से 26 एमएलडी पानी 400 गांवों को सप्लाई करने के लिए  26 दिसंबर 2017 को ई-टेंडर जारी किया गया था। इसमें भी सात नामी कंपनियों जेएमसी  प्रोजेक्ट (इंडिया) लिमिटेड, डीवी प्रोजक्टस लिमिटेड, जैन इरिगेशन सिस्टम लिमिटेड, द इंडियन हय़ूमन पाइप कंपनी लिमिटेड, वा-टेक वाबाग लिमिटेड,  दिलीप बिल्डकॉन, दारा कंस्ट्रक्शन कंपनी ने टेंडर भरे थे। अफसरों ने जेएमसी प्रोजेक्ट (इंडिया) लिमिटेड को टेंडर दिलाने के लिए इनके रेट 2 करोड 48 लाख 2966 रुपए कम कर दिए।

पत्रिका के स्टेट हैड हरीश दिवेकर की खबर


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