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जज्बे को सलाम: 'नायक' के अनिल कपूर की तरह साथी को कंधे पर उठाकर दौड़ा यह पत्रकार

मुरैना| बॉलीवुड की चर्चित फिल्म 'नायक' का वो सीन तो सभी को याद होगा, जब फिल्म के लीड हीरो अनिल कपूर एक जर्नलिस्ट के तौर पर दंगे की रिपोर्टिंग करते हैं और इस दौरान एक घायल छात्र को अपनी जान जोखिम में डालकर भी अस्पताल पहुंचाते हैं और मानवता की मिसाल बन जाते हैं| ऐसा ही कुछ कर दिखाया है मध्य प्रदेश के मुरैना में एक पत्रकार ने, जिसने न सिर्फ हिंसाग्रस्त इलाकों में रिपोर्टिंग कर अपना कर्त्तव्य निभाया बल्कि अपने साथी पत्रकार को घायल अवस्था में कन्धों पर उठाकर हिंसा वाले इलाके से दूर ले जाकर अस्पताल भी पहुँचाया|  

मध्य प्रदेश में पिछले दिनों 2 अप्रैल को दलित आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में आपने सड़कों पर उत्पात देखा होगा, हर कोई हिंसा की आग को हवा देने में लगा था, देश जल रहा था| उपद्रवी चारो तरफ कोहराम मचा रहे थे और लोग अपनी जान बचा कर सुरक्षित ठिकाना ढून्ढ रहे थे|  हिंसा बढ़ती गई और कई लोग इसकी चपेट में भी आये, ऐसे ही एक पत्रकार जो इन हालातों में भी अपना कर्त्तव्य निभाते हुए रिपोर्टिंग कर रहे थे, उन पर भी पथराव हुआ और वो घायल हो गए| उपद्रवियों ने रेलवे ट्रैक को भी निशाना बनाया और  आउटर पर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस पर कब्जा कर लिया | चारो तरफ पथराव, आगजनी, गोलीबारी हो रही थी इसी पथराव में इलेक्ट्रॉनिक चैनल के पत्रकार सतेंद्र तोमर घायल हो गया, घायल सतेंद्र तोमर को साथी पत्रकार दुष्यन्त सिकरवार ने अपने कंधे पर उठाया और रेल्वे ट्रेक पर 100 मीटर तक दौड़ लगाते हुए उसको बचाया और अपनी गाड़ी से अस्पताल तक पहुंचाया । दुष्यन्त ने अपने पत्रकारिता कर्म के साथ साथ मानवता धर्म का पालन किया । आज दुष्यन्त की बहादुरी भरे इस कार्य की सभी लोग प्रशंशा कर रहे है, अधिकारियों ने भी दुष्यन्त की सराहना की है|

इस दृश्य को देखकर नायक फिल्म के अनिल कपूर याद आ जाते हैं| मानवता की मिसाल पेश करने वाले फिल्म में निभाए किरदार जब हकीकत में दिखाई देते हैं, तो समझ में आता है मानव धर्म ही सबसे बड़ा धर्म है और असल जिंदगी के हीरों वो ही है जो अपने कर्त्तव्य के साथ मानवता का भी ध्यान रखे, हालात चाहे कितने मुश्किल हो अपने अंदर इंसान को ज़िंदा रखें|  


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