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एक रुपए किलो से भी नीचे बिक रहा टमाटर, नाराज किसानों ने सड़कों पर फेंका

नरसिंहपुर | मध्य प्रदेश में किसानों के नाम पर जमकर राजनीति होती है, लेकिन हकीकत में किसान इस कदर परेशान है कि मेहनत से उगाई हुई फसल को अपने हाथों से जानवरों को खिलाने पर किसान मजबूर हो गया है| सही दाम न मिलने से नाराज किसानों ने टमाटर को सड़कों पर फेंक दिया है और जानवरों को खिलाया जा रहा है| उनका कहना है कि आज टमाटर की फसल में उनकी जितनी लागत थी वो भी नहीं निकल पा रही है, बल्कि बेचने के लिए बाजार ले जाने में जो भाड़ा लग रहा है वो भी नहीं निकल पा रहा है| 

टमाटर की बंपर पैदावार के चलते प्रदेश में लगातार टमाटर के भावों में गिरावट देखी जा रही है। अभी कुछ दिनों पहले तक टमाटर एक रूपए किलो के भाव तक बिका था, लेकिन अब गाडरवारा की थोक सब्जीमंडी में भाव गिरकर 50 से 66 पैसे प्रति किलो हो गए। भाव गिरने से गुस्साए किसानों ने करीब दस क्विंटल टमाटर सड़कों पर फेंककर अपना विरोध जताया।

 प्रदेश में पिछले दिनों रायसेन जिले में भी टमाटर के किसानों ने जानवरों के आगे अपनी मेहनत की फसल को फेंक दिया था| अब गाडरवारा में किसानों ने सड़कों पर टमाटर फेंके हैं| टमाटर की खेती के लिए मशहूर सीहोर जिले जिले के शाहगंज और नसरुल्लागंज क्षेत्र के किसान इन दिनों लागत से भी कम भाव मिलने के कारण परेशान हैं। हालात ऐसे हैं कि क्षेत्र में किसानों को टमाटर सड़कों पर फेंकने की नौबत आ गई है। थोक मंडी में टमाटर के भाव मात्र 2 रुपए प्रति किलो रह गए हैं। ऐसे में किसानों को लागत और कर्ज चुकाने के लिए राशि निकलना मुश्किल हो रहा है। जब क्षेत्र में टमाटर की बोवनी की थी तब इसके भाव 80 रुपए किलो तक थे लेकिन, अब कौड़ियों के भाव टमाटर बिक रहे हैं|  किसानों के अनुसार दो एकड़ के रकबे में 9 हजार की दवाएं, 10 हजार का बीज, 3 हजार का सिंचाई पानी सहित मजदूरी की राशि जोड़ने पर लगभग 50 हजार का खर्च आता है जो कि निकलना मुश्किल हो रहा है।  अब लागत एवं मूल रकम निकालना भी मुश्किल हो रहा है।  

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