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आरक्षण व्यवस्था पर सवाल, मंत्री भार्गव बोले- 40% वाले ऊपर बैठेंगे तो पिछड़ जाएगा देश

 नरसिंहपुर।

चुनावी साल में भाजपा नेताओं का बड़बोलापन सरकार की किरकिरी कराए हुए है। लगातार नेताओं के विवादित बयान सामने आ रहे है। लगता है नेताओं ने इस क्रम को बनाए रखने के लिए कसम खा रखी है। अभी प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमार, सांसद मनोहर सिंह ऊंटवाल, विधायक अमरसिंह यादव और हाल में विवादित बयान देने वाली महिला विधायक उमा देवी का मामला शांत हुआ ही नही था कि शिवराज सरकार के एक और मंत्री ने विवादित बयान देकर राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। खास बात तो ये है कि मंत्री ने ये बयान दलितों और आरक्षण के संबंध में दिया है, जिसके बाद से ही विपक्ष के हमले तेज हो गए है, वही दलित वर्ग मे भी मंत्री के लिए आक्रोश है।हालांकि विवाद बढ़ते ही मंत्री ने सफाई पेश की है।

दरअसल, रविवार को शिवराज सरकार में पंचायत औऱ ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव  नरसिंहपुर में ब्राह्मण समाज के कार्यक्रम में पहुंचे थे। जहां उन्होंने अपने भाषण के दौरान कहा कि आज़ादी के समय ब्राह्मण के एक चौथाई सांसद, विधायक और अधिकारी-कर्मचारी हुआ करते थे, लेकिन अब 10 केवल फीसदी ही बचे है। हर पार्टी ब्राह्मण का समर्थन तो चाहती है पर उसे देना कुछ नहीं चाहती है। बाह्मण अब सिर्फ वोट बैंक बनकर रह गए हैं जैसे पहले दूसरी जातियां हुआ करती थींं। चुनावी साल में हर जाति और वर्ग  सरकार से कुछ न कुछ मांग चुका हैं लेकिन ब्राह्मण ने कभी किसी से कुछ नही मांगा। 

भार्गव यही नही रुके उन्होंने कहा कि जब 40 % वाले को 90 % वाले से पहले स्थान दिया जाता है तो देश पिछड़ने लगता है जो राष्ट्र के लिए घातक है। ये ब्राह्मण का नहीं बल्कि प्रतिभा का अपमान है। वही उन्होंने सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि आजादी के समय देश में अनीति का नहीं बल्कि नीति का काम था। आरक्षण के नाम पर ब्राह्मण या किसी और समाज के साथ नहीं, बल्कि प्रतिभाओं के साथ मजाक हो रहा है।भार्गव के बयान के बाद ही राजनैतिक गहमागहमी शुरु हो गई। आरक्षण के लेकर दिए गए भार्गव के बयान के बाद विपक्ष के साथ साथ दलितों मे भी आक्रोश है। हर वर्ग भार्गव के बयान की निंदा कर रहा है। इस कार्यक्रम में शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती, कांग्रेस नेता सुरेश पचौरी, पदम श्री विजयदत्त श्रीधर सहित कई विधायक, जनप्रतिनिधि और ब्राह्मण सन्त मौजूद रहे।

विवाद बढ़ने पर दी सफाई

भार्गव के बयान के बाद विवाद गहराने लगा। राजनैतिक हमले होने लगे है। विपक्ष इसको लेकर सरकार को घेरने में लगा हुआ है। जिसको लेकर मंत्री भार्गव ने सफाई पेश की है। उन्होंने कहा है कि मीडिया में उनके बयान को तोड़मरोडकर पेश किया गया है। उन्होंने ऐसा कुछ नही कहा जिससे विवाद पैदा हो या किसी की भावना को ठेस पहुंचे। वह पहले से ही आरक्षण के घोर समर्थक हैं, उन्होंने अनुसूचित जाति के कई लोगों को नौकरी दिलवाई है और उनकी मदद के लिए हमेशा खड़ा रहा हूं।उन्होंने कहा कि मैने अपने बयान में आरक्षण शब्द का कहीं प्रयोग नहीं किया। साथ ही उन्होंने कहा कि मैने 40 साल के राजनीतिक करियर में भी कभी आरक्षण शब्द का उल्लेख नहीं किया। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा है कि देश में अर्थ का अनर्थ ना करें, समरसता और समानता का भाव रखे।

बता दे कि आरक्षण को लेकर बीते दिनों ही देशभऱ में हिंसा हुई थी । प्रदेश में कर्फ्यू जैसे हालात हो गए थे। ग्वालियर, मुरैना और भिंड में हुई हिंसा में 8 लोगों को मौत हुई थी। कई दिनों तक इंटरनेट सेवाएं बंद कर अलर्ट कर दिया गया था। अब जैसे तैसे ये मामला शातं हुआ था कि ऐसे में मंत्री भार्गव के ये बयान देकर राजनीति में आरक्षण के मुद्दे को और हवा दे दी है।जिसका परिणाम सरकार को आने वाले चुनावों में भुगतना पड़ सकता है।


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