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RSS के मंच पर पूर्व राष्ट्रपति, भाषण में कहीं भी नहीं लिया संघ का नाम

नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के पहुँचने से पहले देश भर में जमकर चर्चा रही, खासकर कांग्रेस में इसको लेकर तगड़ा विरोध भी हुआ| इसको लेकर पी. चिदम्बरम, जयराम रमेश, सीके जाफ़र शरीफ़ समेत कई कांग्रेस के नेताओं के बयान आये कि प्रणब मुखर्जी को आरएसएस के कार्यक्रम में शामिल नहीं होना चाहिए| लेकिन इन सब चर्चाओं और विरोध को दरकिनार करते हुए आज मुखर्जी आरएसएस के कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए नागपुर पहुंचे| जहां उन्होंने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए राष्ट्र, राष्ट्रवाद और देशभक्ति पर अपनी बात रखी| ख़ास बात यह रही कि आरएसएस के मंच से मुखर्जी ने अपने भाषण में आरएसएस या संघ का नाम नहीं लिया| 

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा मैं यहां राष्ट्र, राष्ट्रवाद और देशभक्ति पर बोलने आया हूं।  देशभक्ति में देश के सारे लोगों का योगदान है।  देशभक्ति का मतलब देश के प्रति आस्था है।  भारत में आने वाले सभी लोग इसके प्रभाव में आए।  उन्होंने कहा  हिन्दुस्तान एक स्वतंत्र समाज है।  सबने कहा है कि हिन्दु धर्म एक उदार धर्म है ।  राष्ट्रवाद किसी भी देश की पहचान ।  भारत के दरवाजे सबके लिए खुले हैं । उन्होंने कहा भारतीय राष्ट्रवाद में एक वैश्विक भावना रही है।  हम एकता की ताकत को समझते हैं। विविधता हमारी सबसे बड़ी ताकत है और सहिष्णुता हमारी सबसे बड़ी पहचान है। 

मुखर्जी ने कहा 1800 साल तक भारत दुनिया में शिक्षा का केंद्र रहा। चाणक्य ने अर्थशास्त्र की रचना की ।  कई शासकों के राज के बाद हमारी संस्कृति सुरक्षित रही । अगर हम भेदभाव, नफरत करें तो पहचान को खतरा है| उन्‍होंने कहा कि सहनशीलता हमारे लिए बेहद जरूरी है। इसके साथ ही इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है हमें आपस में बात करनी होगी। संवाद होना बहुत जरूरी है। आरएसएस के मंच से प्रणब मुखर्जी ने संकेत दिया और कहा मैं अतिथि हूं, स्वयंसेवक नहीं|  इससे पहले संघ प्रमुख मोहन भागवत ने उनका स्वागत किया। प्रणब मुखर्जी ने हेडगेवार के घर का दौरा भी किया और उनकी तस्‍वीर पर फूल अर्पित किए। इसके बाद पूर्व राष्‍ट्रपति ने विजिटर बुक में लिखा कि 'भारत मां के महान सपूत को दी श्रद्धांजलि।


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